संदेश

सुखी कौन

चित्र
       मेरा सवाल सुखी कौन हैं ?   सुखी वही हैं जिसपर कोई कर्ज नहीं हैं,लेकिन ये बात 3000 साल पुरानी हैं ये द्वापर युग की बात हैं उस समय की बात अच्छी लगती हैं हमने तो कहानियों और किताबों में सुना हैं लोग झुट नहीं बोलते थे और एक दुसरे को कभी ठगते नही थे,लोग सच्चे थे और लोग अच्छे थे I कलयुग आज की बात करते हैं आज कोई सुखी नहीं हैं आज आप लोगों को एक ऐसी जानकारी दे रहा हूँ जो हर किसी की जिंदगी से जुड़ी हुई हैं I लोग गाँव में रहते हैं लेकिन पढ़े लिखे लोग गाँव में रहना पसंद नहीं करते हैं उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की तम्मना रहती हैं I किसी कम्पनी में काम करना शूट बूट टाई पहन कर जाना ,दफ्तर के कर्मचारी सलाम करे ये सब सपने लेकर गाँव से शहर में अपनी जिंदगी शुरू करने के लिए नौकरी,व्यापार और दुकान बहुत सारी सपने शुरू करने के लिये गाँव से या दुसरे शहर से आकर सुखी जीवन की तलाश करते हैं और शहर में अपनी जिंदगी चलाने के लिए क्या क्या नहीं करते हैं अपनी सारी ताकत एजुकेशन मेहनत सभी लगा देते हैं काम तो मिल जाता हैं मगर घर चलाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं कमा पाते हैं काफी मेहनत करते हैं की ...

ऑपरेशन सुरंग

चित्र
             उत्तराखंड की   उत्तरकाशी..        भगवान विश्वनाथ के उत्तरकाशी एक तरफ प्राक्रतिक सौंदर्य और पहाड़ो से बहती नदियाँ दूसरी तरफ पहाड़ों और जंगलों से घिरा मानो स्वर्ग धरती में उतर आई हो ऐसा प्रतीत होता हैं I यहाँ का मौसम बहुत ही लुहावनी और मनोरंम,पहाड़ो पर मानो बर्फ की चादर बिछी हो I यह शहर भागीरथी और गंगा नदी के तट पर स्थित हैं,यहाँ लोग साहसिक और पर्यटन के लिए आते हैं I इसके रास्ते में चार धाम आते हैं बद्रीनाथ,केदारनाथ,गंगोत्री और यमुनोत्री हैं जो भारत में बहुत प्रसिद्ध हैं I       उत्तरकाशी  जिले का निर्माण 24 फ़रवरी 1960 को हुआ था यह एक धार्मिक नगरी हैं यहाँ पवित्र गंगा नदी का उध्गम स्थल हैं I यहं भगवान् विश्वनाथ का प्रसिद्ध मंदिर हैं यह नगरी प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर हैं I प्रशासनिक कार्य के लिए  उत्तरकाशी  को ६ तहशील और २ उप-तहशीलों में बांटा गया जिसमें भटवाड़ी,डुंडा,चिन्याली सौड़,बड़कोट,पुरोला,मोरी (जोशियाड़ा और धौंतरी ) ये दोनों उप-तहशील हैं I उत्तरकाशी की कुल आबादी २०११ की जनगणना के अनुसार ...

लाइट् कैमरा एक्शन

चित्र
       करीब  200  साल अंग्रेजो की गुलामी करने के बाद 15अगस्त 1947को भारत को आज़ादी मिली I इससे पहले  अंग्रेजो ने 1747 से लेकर 1947तक भारत को ईस्ट इंडिया कम्पनी के नाम से और कंट्रोल ब्रिटेन किया करते थे I देश के स्वतंत्रता सेनानीयों की साहस और हिम्मत की वजह से अंग्रेजो को घुटने टेकने पड़े और हमें आज़ादी मिली I काफी लोगों ने बलिदान दे कर देश को आजादी दिलाई I       आज़ादी मिलने के दौर और गुलामी के दौर में अंग्रेजो ने रेडियो प्रसारण की शुरुआत हुई I मीडिया के प्रसार को आगे बढ़ने और बढ़ावा देने के लिए इसकी गुणवता को जबरदस्त बढ़ोतरी हुई I इसी बीच टीवी का भी आगमन हुआ,मुद्रित मीडिया निजी क्षेत्रो के हाथों में और रेडिओ,टीवी सरकार ने अपने हाथों में लगाम लिये I 1959 में शिक्षात्मक उद्देशों के लिए दूरदर्शन की शुरुआत हुई I समाचार पत्र में भारत विश्व का सबसे बड़ा देश हैं,उपग्रह चैनलों में हमारा देश भारत के 690 चैनल हैं I जिसमें 80 न्यूज़ समाचार चैनल हैं I समाचार पत्रों की बहुत बोलबाला थी,न्यूज़ चैनल बहुत कम होने की वजह से लोग ज्यादा समाचार पत्र पढ़ा करते थे और दू...

ईमानदारी

चित्र
ईमानदारी की मिशाल     व्यक्ति के र्त क व्य को पालन करने के लिए पूरी निष्ठा,निष्पक्षता,पारर्देशिता और सत्यानिष्ठा चोरी धोखा इन सभी चीजों से दूर रहना और अपने कर्त्तव्य का हमेशा जेहन में रखना हर किसी के बस की बात नहीं हैं और इन सभी चीजों से परे होना बहुत कम लोगों में होता हैं ऐसे बहुत ही कम इंसानों में होता हैं इनसे परमात्मा भी बहुत खुश होते हैं और इनकी सहायता भी करते हैं इनको बहुत सारी यातनाओ से गुजरना पड़ता हैं तब जा के वो एक ईमानदार इन्सान में गिनती होती  हैं I ईमानदार इन्सान को इस दुनिया में जीना मुश्किल नहीं थोड़ा मुश्किल जीना कह सकते हैं I ये सर तो उठा के जीते हैं लोग इनकी तारीफ भी करते हैं मान सम्मान भी बहुत मिलते हैं लेकिन ये सारी जिन्दगी दुःख और परिवार को सँभालने में कब ये अपनी जिन्दगी के वो पल खो देते है, उन्हें पता ही नहीं चलता हैं आज हमारे देश में ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपनी जिंदगी ईमानदारी से काट रहे हैं और वो किसी को अपनी ईमानदारी की सबूत देने की जरुरत नहीं समझाते हैं बस वो अपना काम किये जा रहे हैं I     ये हैं श्रध्दानन्दजी       जै...

त्याग

चित्र
                                                "बाबा आप की कृपा अपरमपार हैं आप महान हो साईं"           बहुत समय पहले की बात हैं ये बात कोरोना काल की हैं सन २०२१ मार्च की बात हैं कोरोना चाइना से भारत में शुरुआत हुई थी एक साधारण सा परिवार किसी तरह से पैसे की व्यवस्था कर के शिर्डी जाने की तेयारी कर रहे थे ये परिवार शिर्डी साईं बाबा से बहुत लगाव था ये लोग बाबा को बहुत मानते हैं इनकी आस्था बाबा पर बहुत थी कोई भी काम करने से पहले शिर्डी साईं बाबा से आशीर्वाद ले के करते थे और बाबा भी इनकी बात सुनते और कोई विपति आने से पहले इन्हे आगाह कर देते थे ये छोटा सा परिवार बाबा को बहुत मानते हैं इस परिवार में मियां बीबी और एक बहुत सुंदर सी इनकी एक बिटिया हैं बिटिया भी बाबा को दादू बोलते थे I मम्मी दादू से मिलने शिर्डी कब हमलोग जायेंगे माँ बोलती, बेटा पापा पैसे की इंतजाम कर रहे हैं फिर हम लोग जायेंगे ऐसे कह कर बिटिया को सातवाना देते थे बिटिया भी चुप हो जाती...

One Cup of Tea

चित्र
                              देश में सभी वर्ग के लोग चाय पीते हैं बड़े ही चुस्की और मजे से,चाय यह नहीं देखती की कौन बड़ा कौन छोटा,कौन अमीर कौन गरीब ये सभी  जगह घुमती हैं  सभी के होठों से लगती हैं चाय वही हैं मगर पद के मुताबिक प्याला "कप"  अलग अलग हो जाता हैं I "Cups gets separated according to positions" क्या एक गरीब  BONE CHAINA Cup में चाय पी सकता हैं ..         चाय का नाम सुनते ही मन में एक ताजगी सी आती हैं और क्यों ना आये चाय चीज ही ऐसी हैं की सुनने के बाद ये पीने का मन करता हैं कब चाय मिले उसमें भी मन में एक ही ख्याल आता हैं की वो चाय कड़क और स्वादिस्ट और सुनहरा खुशबू हो मतलब की चाय का नाम सुनते ही मन चहक जाता हैं अगर ठंड में मिल जाये तो क्या बात हैं सोने पे सुहागा इस चाय से मस्तिष्क को ताजगी मिलती हैं और यह बहुत तेजी से काम करने लगती हैं चाय पीने के बाद सारी थकावट दूर हो जाती हैं कभी कभी तो ऐसा लगता हैं की अगर सुबह चाय ना मिले तो सारा दिन ख़राब हो जाता हैं क्यो...

तनख्वाह

चित्र
                                                                                                                                                                                                                                                                             "हमेशा इस बात को ध्यान रखना है की  कोई भी काम करने स...

छोटी बेटी

दूसरा अध्याय..           छोटी बेटी शादी के कुछ ६ महीने बाद एक दिन अचानक से वो अपने पापा के घर आई पापा ने देख की बेटी बहुत दुखी और परेशान हैं और वो रो रही थी , पापा ने पूछा क्या हुआ बेटा तुम अचानक से यहाँ आई हो कोई फ़ोन कर देती तो मैं तुम्हे लेने आ जाता क्या हुआ बताओ तभी माँ दुसरे कमरे से दौड़ कर आई और बेटी को गले से लगा ली , माँ पूछी बेटा क्या हुआ हैं बताओ बेटी कुछ नहीं   बोली   और रोती हुई वो दुसरे कमरे की तरफ चली गयी , माँ भी उसके साथ भागी की क्या हुआ हैं माँ बोली बेटा बताओ तो क्या हुआ हैं   फिर पिताजी भी आ गए बोले   बताओ ना बेटा क्या हुआ हैं छोटी बेटी रोती हुए बोली पापा मैं ना बहुत दिनों से घर से बाहर निकल नहीं पाई जब से शादी हुई हैं  तो माँ बोली इसमे रोने की क्या जरूरत हैं तुम अपने पति से बोल कर बाहर घूम आओ इसमें क्या दिक्कत हैं तभी वो आखों की आंसू पोंछते हुए बोली माँ उस घर में ना सभी लोग ही ऐसे हैं पापा बोले कैसे हैं  ?  बताओ !!कुछ समझ नहीं आ रहा हैं तुम क्या बोलना   चाहती हो बताओ         ...

छोटी बेटी

पहला अध्याय..      आ ज से आठ साल पहले की बात हैं,एक परिवार में कुल ६ लोग थे माँ  पिताजी और उनके चार संतान जिसमे चारों लड़कियाँ थी एक भी बेटा नहीं था I लेकिन उनके पिताजी को बहुत ही लालसा था एक लड़के की मगर भगवान् की यही कृपा थी की उनको एक भी बेटा नहीं दिया,परन्तु पिताजी कभी भी इन चारों को लड़की नहीं समझते थे,वे हमेशा यही कहते की ये चारों मेरे बेटे हैं,छोटी बेटी माँ पाप को बहुत चाहती थी  और हमेशा उनके बारे में सोचते रहती थी,माँ पाप बहुत ही लार प्यार से बच्चों की परवरिश कर रहे थे और घर में कमाने वाला सिर्फ उनके पिताजी ही थे सारे परिवार की देखभाल और सभी लड़कियों की खर्चा पानी पढ़ाई लिखाई और परिवार की राशन खाने की सारी व्यवस्था पिताजी ही कर रहे थे क्योंकी उनके घर मैं और कोई था नहीं इसलिए सारा परिवार का दायित्व उनपर था पिताजी एक प्लांट में काम करते थे बहुत ज्यादा तनख्वा नही था उसी छोटी सी नौकरी से उन्होंने सारे परिवार को बहुत ही जत्न से पाल पोश रहे थे Iइसमे सबसे बड़ी बेटी हमेशा माँ पाप की चिंता बहुत करती थी हा लेकिन एक और बेटी थी जो हमेशा यही सोचते रहती की कब मैं बड़ी ह...