लाइट् कैमरा एक्शन
करीब 200 साल अंग्रेजो की गुलामी करने के बाद 15अगस्त 1947को भारत को आज़ादी मिली I इससे पहले अंग्रेजो ने 1747 से लेकर 1947तक भारत को ईस्ट इंडिया कम्पनी के नाम से और कंट्रोल ब्रिटेन किया करते थे I देश के स्वतंत्रता सेनानीयों की साहस और हिम्मत की वजह से अंग्रेजो को घुटने टेकने पड़े और हमें आज़ादी मिली I काफी लोगों ने बलिदान दे कर देश को आजादी दिलाई I
आज़ादी मिलने के दौर और गुलामी के दौर में अंग्रेजो ने रेडियो प्रसारण की शुरुआत हुई I मीडिया के प्रसार को आगे बढ़ने और बढ़ावा देने के लिए इसकी गुणवता को जबरदस्त बढ़ोतरी हुई I इसी बीच टीवी का भी आगमन हुआ,मुद्रित मीडिया निजी क्षेत्रो के हाथों में और रेडिओ,टीवी सरकार ने अपने हाथों में लगाम लिये I 1959 में शिक्षात्मक उद्देशों के लिए दूरदर्शन की शुरुआत हुई I समाचार पत्र में भारत विश्व का सबसे बड़ा देश हैं,उपग्रह चैनलों में हमारा देश भारत के 690 चैनल हैं I जिसमें 80 न्यूज़ समाचार चैनल हैं I समाचार पत्रों की बहुत बोलबाला थी,न्यूज़ चैनल बहुत कम होने की वजह से लोग ज्यादा समाचार पत्र पढ़ा करते थे और दूरदर्शन में दिन भर में एक या दो घंटे की खबर चलती थी और लोग समाचार पत्रों से देशभर की खबर जान पाते थे I इसी तरह देश विकास करता गया I मीडिया की तादात भी बढ़ता गया समाचार पत्र भी बढ़ने लगे,अब लोगों को मिनटों में देश की हर खबर मिल जाती हैं ये तो थी मीडिया की बात I
अब हम करते हैं मीडिया में काम करने वाले उन कर्मचारी की जो बिना थके बिना खाए पीये खबर को कवरेज करते हैं ना दिन ना रात ना वारिश और ना धुप बस काम किये जा रहे हैं, वो व्यक्ति जो कभी कैमरा के सामने आगे नहीं आते, हमेशा वो कैमरा के पीछे ही रहते हैं और सारी जिंदगी काम करते रहते हैं ये कभी भी ये नहीं कहते की मैं थक गया हूँ, जो कैमरा के आगे से आदेश मिलता नि:संकौच उस काम को बहुत ही खुबसूरती से निखार के देने की हमेशा पूरी कोशिश रहती हैं, कभी कभी इनको दफ्तर से बातें भी सुननी पड़ती हैं मगर ये कुछ ज्यादा जवाव नहीं देते हैं, बस यही कहते ठीक हैं मैं ठीक कर के देता हूँ और फिर ये अपने काम में लग जाते हैं और अपने काम को अंजाम देने में लग जाते हैं I ये हमेशा यही सोचते रहते हैं की मैं अपने काम को कितना अच्छा कर के दे सकता हूँ मगर काम तो अच्छा कर के देते हैं कोई ये नही कहते की वाह क्या सुंदर कवरेज कर के दिए हो भाई ये सुनने के लिए ये हमेशा ललायित रहते हैं I कभी कभी ये किसी कवरेज में सुबह से व्यस्त हो जाते हैं और एक ही जगह खड़े खड़े कवरेज करते रहते हैं तो इनको कोई ये नहीं पूछते की क्या आप ने खाना खाये या पानी पीये I ये घर से खाना ले के आते हैं मगर कभी कभी इनकी ड्यूटी सुबह की लगती हैं तो ये घर से भोजन ले के नहीं चल पाते हैं तो और सारा दिन भूखे प्यासे काम करना पड़ता हैं मगर सामने वाले कुछ व्यक्ति जो चैनल से होते हैं वो अपने छायाकार को खाना ला के देते हैं या बोल देते,दादा आप कुछ खा लो सुबह से काम कर रहे हो और कुछ चैनलों की तो बात ही ना करो उनको देखने वाला कोई नहीं हैं I किसी भी बड़े छोटे न्यूज़ समाचार चेंनल में या कोई बड़ा छोटा कंपनी में 8 घंटे की शिफ्ट होती है मगर इनकी ड्यूटी 12 से 16 घंटे से कम नहीं होता हैं और छायाकार काफी उपकरण ले के चलते हैं, इसकी वजह से वह बहुत थक जाते हैं I आप कुछ भी कर लो चैनल वाले आप को फंसा के रखते हैं क्यों की इनके पास लोगों की बहुत कमी रहती हैं और भुगतना छायाकार को पड़ता हैं I क्योंकी इनको अपने घर चलाना हैं और ये पिसते रहते हैं क्या करे नौकरी छोड़ नहीं सकते और तुरंत नौकरी मिल नहीं सकता ये हैं मज़बूरी छायाकारों I
light camera action
अभी कुछ दिन पहले कुछ छायाकारों से मेरी बातचित हुई वो इतना दुखी थे की पूछिए मत इनकी बात सुन कर मैं बहुत दुखी हुआ I एक बहुत बड़े चैनल में ये काम करते थे, एक दिन दफ्तर में अचानक से मीटिंग की घोषणा हुई चैनल के बहुत सारे छायाकार को बुलाहट हुई कोई दो दिन की टूर से आया था तो कोई चार दिन और कोई महीने भर की टूर से आये थे कोई घर पर टूर से आने के बाद आराम कर रहे थे एक दम अचानक मीटिंग से की बात सुन कर कोई खुश हुए तो कोई घबरा गए I क्योंकी जो कड़ी मेहनत करते है वे तो तरक्की ही सोचेंगे और यही सोचा की.. लगता हैं वेतन वृद्धि होगी ये सोच कर बहुत खुश हुए I जब मीटिंग में छायाकार पहंचे तो देख कर घबरा गए क्योंकी कुछ गिने चुने छायाकार की ही मीटिंग में आये थे I किसी ने हिम्मत जुटा कर अपने सीनियर से पूछा सर और छायाकार नहीं आये सीनियर ने कहा एचआर ने इतने ही लोगों को मीटिंग में बुलाया हैं I ये सुन कर सब घबरा गए I मीटिंग शुरू हुई एचआर ने सभी को एक लिखित पेपर दिया,पेपर में लिखा था की आप खुद से इस्तीफा दे और अगर आप इस्तीफा नहीं देंगे,तो चैनल आप को हटा देंगे I ये पढ़ने के बाद छायाकार के आँखों से आंसू रोने लगे कुर्सी में सर को झुका कर रो रहे थे,कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थे बस रो रहे थे और मन ही मन यही सोच रहे थे की हमने काम के चक्कर में बेटी की जन्मदिन को कितनी बार छोड़ दफ्तर में काम में आ गये, बारिश में भींग कर,तो कभी बीमार थे छुट्टी नहीं मिली काम करने आ गए 12,14 घंटा काम किया I आज ये सिला मिला I सबसे बड़ी बात अब मेरी इतनी उम्र हो गई की कही नौकरी नहीं मिलेगा नाना प्रकार की सोच और परिवार और बच्चों को कैसे पढ़ाएंगे कहाँ से पैसे लायेंगे स्कूल की फीस घर का राशन कहाँ से आएगा बेटी की शादी कैसे करेंगे ये सोच कर लग रहा था,की कही हार्ट-अटैक ना आ जाये I जितने भी छायाकार थे सभी के आँखों में आंसू थे कितनो ने बोला सर हमसे कोई गलती हो गयी है तो हमें माफ़ कर दीजिये I मगर नौकरी से मत हटाये हमारी सारी जिंदगी इसी चैनल में काम करते करते १५ साल हो गये,अभी तत्काल में हमें कही नौकरी नहीं मिलेगी,काफी मिन्नते करने के बाद भी एचआर नहीं माने बोले आप सिग्नेचर कीजिये और तीन महीने की तनखाह ले के जाये,अब आपकी इस चैनल में कोई जरुरत नहीं हैं I किसी ने हाल ही में बेटे को कॉलेज में दाखिला करवाया तो किसी ने बेटी को स्कूल में डाला तो किसी के घर में मम्मी पापा बीमार है तो कोई लोन में घर ख़रीदा और तो कोई खुद ही बीमार काम कर रहा था I छायाकारों को रुला के निकाल दिया गया I
फ़ायदा हुआ 25 साल काम कर के...
छायाकारों को ऐसे ही चैनल में दखिला नहीं मिलते काफी मुश्किल और काफी साक्षात्कार देनी पड़ती हैं तब जा के छायाकार को नौकरी मिलती हैं अलावा अगर आपकी अच्छी पहचान हैं तो बिना साक्षात्कार के भी नौकरी मिल जाती हैं I छायाकार बहुत ही शिक्षित और अच्छे पढ़े लिखे होते हैं ये जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन के कोर्स कर के चैनल में आते हैं,कोई एक साल का तो कोई तीन साल की कोर्स कर के चैनल में शामिल होते हैं और साक्षात्कार भी बहुत कठिन होता हैं मगर निकलने के समय एक झटके में बिना कारण बिना नोटिस के बाहर कर देते हैं I छायाकारों को अगर पहले ही जानकारी मिल जाये की आप को कभी भी नौकरी से निकल देंगे,तो ये जितना समय जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन के कोर्स में देते हैं वो कोई दूसरी क्षेत्र चुन लेते I कुछ छायाकार अपने ही पैर में कुल्हारी मार देते हैं जैसे मीडिया को देखते है की क्या शानदार गाड़ी,कैमरा,सुंदर पत्रकार व्यवस्था बेगेरा को देख ये छायाकार बनाना चाहते और बन भी जाते हैं मगर जब चैनल इन्हें निकलते हैं तो ये संभल नहीं पाते हैं I पहले लोग दूरदर्शन देख कर प्रेरित होते थे और मीडिया में जाना चाहते थे और उस समय मीडिया की बहुत इज्जत भी थी I मगर अब वो इज्जत नहीं हैं,क्योंकी मीडिया बिक चुकी हैं और उसका खामियाजा छायाकारों और पत्रकारों को झेलना पड़ रहा हैं I ये कुछ चाह कर के भी नहीं कर सकते I अगर ये बोलेंगे तो बिना नोटिस हटा दिया जायेगा और फिर चैनल का रोना "चैनल घाटे" में चल रहा हैं इसलिए क्रॉस कट्टिंग कर रहे हैं I ये हैं आज के निजी न्यूज़ चैनलों का हाल...
हमारे देश में इस तरह की घटनाएँ आम सी हो गयी आये दिन कोई ना कोई चैनल या कम्पनी अपने लोगों को बिना नोटिस दिए निकल रहे हैं I ये बहुत गलत हैं ऐसा नहीं करना चाहिए, बहुत से ऐसे परिवार हैं जो इस मीडिया की नौकरी से हटाने के बाद वो दर दर की ठोकरे खा रहे हैं I जिसकी थोड़ी पहचान हैं उसकी नौकरी हो जाती हैं और जिसकी पहचान नहीं हैं वो दुसरे काम कम पैसे में करने को मजबूर हैं I इस तरह देश तरक्की कैसे करेगा, लोग अगर भूखे रहेंगे I सरकार को चाहिए इन निजी चैनलों और कम्पनीयों के लिए कुछ इस तरह से नियम बनाये जिससे की वो अपनी मनमानी ना कर सके और कर्मचारीयों को अचानक से बिना नोटिस के निकाला ना जा सके,इस पर सरकार को थोड़ा ध्यान देना चाहिए I
Light camera Action...सिर्फ नाम के हैं .
Blog : Badal Goswami
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