ईमानदारी
ईमानदारी की मिशाल
व्यक्ति के र्तकव्य को पालन करने के लिए पूरी निष्ठा,निष्पक्षता,पारर्देशिता और सत्यानिष्ठा चोरी धोखा इन सभी चीजों से दूर रहना और अपने कर्त्तव्य का हमेशा जेहन में रखना हर किसी के बस की बात नहीं हैं और इन सभी चीजों से परे होना बहुत कम लोगों में होता हैं ऐसे बहुत ही कम इंसानों में होता हैं इनसे परमात्मा भी बहुत खुश होते हैं और इनकी सहायता भी करते हैं इनको बहुत सारी यातनाओ से गुजरना पड़ता हैं तब जा के वो एक ईमानदार इन्सान में गिनती होती हैं I ईमानदार इन्सान को इस दुनिया में जीना मुश्किल नहीं थोड़ा मुश्किल जीना कह सकते हैं I ये सर तो उठा के जीते हैं लोग इनकी तारीफ भी करते हैं मान सम्मान भी बहुत मिलते हैं लेकिन ये सारी जिन्दगी दुःख और परिवार को सँभालने में कब ये अपनी जिन्दगी के वो पल खो देते है, उन्हें पता ही नहीं चलता हैं आज हमारे देश में ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपनी जिंदगी ईमानदारी से काट रहे हैं और वो किसी को अपनी ईमानदारी की सबूत देने की जरुरत नहीं समझाते हैं बस वो अपना काम किये जा रहे हैं I
ये हैं श्रध्दानन्दजी
जैसा इनका नाम हैं वैसा ही इनको देखने में लगता हैं और ये काम भी बड़े श्रद्धा से करते हैं बड़े बुजुर्ग कहते हैं ना की नाम में ही सब कुछ छिपा होता हैं व्यक्ति कैसा हैं I श्रध्दानन्दजी बहुत ही दयालु पूजापाठ और भागवान को दिल से मानने वाले व्यक्ति I मुख लगभग ११ साल पहले गुजर गई थी, तब से अकेले हो गये पत्नी के ना रहने से ये आज भी बहुत अकेला महसूस करते हैं अकेलापन आज भी हैं I क्योंकी एक उम्र के बाद सहारे की जरूरत होती हैं वो सहारा इनके पास नहीं हैं I
श्रध्दानन्दजी बिहार के बलिया जिले के रहने वाले हैं यहाँ घाघरा नदी बहती हैं जो गंगा नदी में जा के मिलती हैं यहाँ महर्षि भृगुं का प्रसिद्ध मंदिर हैं जो बहुत विख्यात हैं यह नगरी बहुत ही सुंदर और सुंदर भोजपुरी भाषा यहाँ बोली जाती हैं I श्रध्दानन्दजी के चार बच्चे हैं इनमें दो लड़का दो लड़की है, लड़कियों की शादी में श्रध्दानन्दजी के सारी बजट ख़राब हो गया इधर उधर से कर्ज ले के दोनों बेटियों की शादी तो कर दी लेकिन कर्ज में डूब गए I गत्ते की दुकान में काम कर के कोई कितना कमा सकता हैं फिर उन्होंने इससे कर्ज ले के उसको दिए फिर उससे कर्ज ले किसी और को दिए इस तरह से इनका कर्ज बढता गया I फिर किसी तरह दोनों बेटों की शादी की और इस तरह एक गत्ते की दुकान में काम कर के सभी बच्चों की शादी कर दिये I श्रध्दानन्दजी एक ईमानदार आदमी हैं जो आज भी कर्ज चुका रहे हैं I
किसी तरह दो बेटे के परिवार और पत्नी के साथ जीवन जी रहे हैं, लेकिन कर्ज ज्यादा होने की वजह से परेशान होने लगे I फिर कुछ दिनों के बाद पत्नी की देहांत हो गया I श्रध्दानन्दजी अकेले हो गये अब उनका गुजारा नौकरी से नहीं हो पा रहा था फिर इन्होनें (तीन पहिये वाली गाड़ी) ऑटो भाड़े पर चलाना शुरू किये,रोज तीन सौ पचास रुपया भाड़ा देते और ये १२ से १४ घंटे रोज ऑटो चला रहे हैं और जो भी कमाते वो कर्जदार को दे रहे हैं I अब इनका एक ही लक्ष्य है कर्ज ख़त्म करना..
श्रध्दानन्दजी का परिवार अभी ठीक में हमेशा चमक जब भी किसी से बात करते बड़े प्यार और मुस्कुरा के करते हैं मन में कोई झिझकपन नहीं हैं इनकी उम्र यही लगभग ६२ साल के होंगे काम करने की बहुत ललक कभी कोई काम में बड़ा छोटा नहीं समझते बड़े लगन से वो काम करते मेहनत से घबराते नहीं I इनकी काम काज ठीक ठाक चल रहा था वही रोज सुबह पांच बजे उठाना और बच्चों के साथ नास्ता पानी कर के पोता पोती को स्कूल छोड़ कर अपने ऑटो की घरघराहट की आवाज़ से चालू कर सड़क पर निकल गये सवारी के लिए कभी रेलवे स्टेशन, कभी बस स्टॉप और कभी कभी कोर्ट के गेट पर खड़े हो गये और सवारी का इंतजार करने लगे I
१० अक्टूबर २०२३ मंगलवार १२ बजे की बात हैं, श्रध्दानन्दजी रोज की तरह कोर्ट के बाहर अपनी ऑटो खड़ी कर सवारी का इंतजार कर रहे थे कोर्ट में काफी भीड़ थी तभी एक युवक आया बोला चाचा चलोगे ? चाचा कहाँ ? युवक बोला फलाना जगह जाना हैं पहली सवारी थी श्रध्दानन्दजी बोले चलो बैठ जाओ युवक ने अपना थैला सीट के पीछे रख दिया I श्रध्दानन्दजी गाड़ी स्टार्ट की और चल दिए कुछ दूर जाने के बाद श्रध्दानन्दजी ने पूछे कहाँ के रहने वाले हो ? युवक ने कहा चाचा मैं बिहार में पटना का रहने वाला हूँ I चाचा बोले कहाँ काम करते हो ? युवक बोला मैं उस कम्पनी में काम करता हूं I अच्छा.. चाचा बोले मैं भी बिहार का रहने वाला हूँ I काफी देर तक दोनों में काफी बातचीत हुई, ऑटो रुकी.. चाचा बोले लो आ गये, युवक ने कहा कितना देना हैं I चाचा बोले ७० रूपये दे दो फिर युवक ने पैसे दिए और चलते बने युवक जब अपने दफ्तर पहुंचा और अपने काम में लग गया I करीब एक घंटे बाद उसको थैले का याद आया वो एक दम से सन्न हो गया की थैला तो ऑटो में छुट गया और उस थैले में १.५० लाख की सामान थी अब क्या करे वो पागलों की तरह रोड की तरफ भागा मगर ऑटोवाला चाचा वहाँ से जा चूका था I युवक काफी दूर तक ऑटोवाले को ढूंडता रहा मगर ऑटोवाला चाचा कही नहीं मिला अंत में थक हार कर दफ्तर आ गया और रोने लगा और भगवान से विनती करने लगा किसी तरह वो सामान मिल जाये नहीं तो नौकरी चली जाएगी I
"कहते हैं अगर आप पूरी सिद्दत से भगवान को प्रार्थना करते हैं तो सारी कायानात जुट जाती हैं"
करीब ३ बजे युवक ने हिम्मत जुटा के वरिष्ट अधिकारी को सूचित करने गया की दफ्तर का महत्वपूर्ण सामान गुम हो गया I मन में यही सोच रहा था की,आज मेरी आखरी दिन हैं इस दफ्तर में नौकरी तो गयी I वरिष्ट अधिकारी दो तीन लोगों के साथ कोई मीटिंग कर रहे थे,युवक ने कहा सर आपसे कुछ बात करनी हैं वो बोले हा-हा बताओ क्या बात हैं बड़ी दबी आवाज़ में बोला सर वो थैला अभी कोर्ट से आते वक्त ऑटो में छुट गया और बहुत ढूंडा मगर ऑटो वाला कही नहीं मिला फिर उन्होंने सारी बात सुनी और बोले ये तुम्हारी जिम्मेदारी थी सामान का ध्यान रखना ऑटो से उतरते वक़्त अपने सामान तो देख लेना था,थैले में वो मशीन कितने का था युवक बोला सर १.५० लाख की ये सुनते ही अधिकारी गुस्से से बोले मैं कुछ नहीं सुनूंगा मुझे वो सामान वापिस चाहिए मैं बसुलूँगा तुमसे.. जवाब तुम दोगे I फिर अधिकारी अपने ऊपर वाले लोगों को फ़ोन किये बात करने के बाद वो बोले लो बात करो बात की वो बोले जिम्मेदारी तुम्हारी हैं देखो क्या करोगे, युवक वहाँ से चला गया I अपने केबिन में आ कर भगवान् की प्रार्थना करने लगा I
सारे दफ्तर में बात फैल गयी की, दफ्तर का कीमती उपकरण गुम हो गया लोग एक दुसरे से बात करने लगे I इस तरह ४ बज चुके थे युवक ने अपने केबिन के सहपाठी से कहा सर चलो देख के आते हैं जहाँ पर ऑटोवाले चाचा ने मुझे छोड़ा था क्या पता वो कही आस पास मिल जाये,दफ्तर के बाहर जैसे ही निकले तभी माली चाचा ने कहा सर क्यों उदास हो I युवक ने कहा चाचा वो दफ्तर का एक उपकरण ऑटो में गुम हो गया I तभी माली चाचा ने कहा अरे इसमे परेशान होने की क्या जरुरत हैं वो ऑटोवाले ने आपके उपकरण सिकुरिटी गार्ड को दे गये हैं आप गार्ड से बात करो युवक ने कहा सच में चाचा I वो भाग कर गार्ड रूम पंहुचा गार्ड ने कहा सर आपकी कोई उपकरण दे गया ऑटोवाले ने जो ऑटो में छुट गया था दिखाओ फिर देख कर तस्सली हुई I युवक ने गार्ड से कहा तुम मुझसे क्यों नहीं मिलाये ऑटोवाले को, उनका कोई नंबर लिए हो गार्ड ने कहा सर हा लिये हैं, ये लो उनका नंबर उनका नाम श्रद्धानन्द हैं वो बता रहे थे की वो भाई साहेब का उपकरण छुट गया I वो जब ऑटो में बैठे थे तब आपस में हमलोग बातें कर रहे थे उन्होंने बताया की वो इस कम्पनी में काम करते हैं तो मैं उनका सामान देने आ गया I इस तरह युवक की नौकरी जाते जाते बच गयी इसे कहते हैं तक़दीर का खेल कभी अच्छा कर्म किये थे जो फल भी अच्छा मिला I
मगर एक बात युवक को खाये जा रहा था की वो एक बार ऑटोवाले चाचा श्रद्धानन्दजी से मिल नहीं सके I उसने गार्ड से नंबर लिया और बात की श्रद्धानन्दजी बोले ठीक हैं सर मैं सोमवार को आपसे ४.३० बजे मिलता हूँ I फिर श्रद्धानन्दजी आये, युवक ने उनसे बोला चाचा आप बहुत ईमानदार ऑटोवाले हो आप जैसा लोग बहुत कम मिलते हैं दुनिया में,आप ने तो मेरी नौकरी बचा ली श्रद्धानन्दजी बोले मैंने नहीं बचाया ये सब उपर वाले की खेल हैं ना आप बात करते ना आपको आपका सामना मिलता ये तो आपकी बरप्पन हैं जो आप उस समय मुझसे इतना घुल मिल कर बात किये I आप जिस जिले के हो मैं भी उसी जिले का हूँ इस तरह काफी बात हुई फिर चाचा को इनाम देने की कोशिश की I मगर लेने से मना कर दिए,मगर युवक ने कहा चाचा से बोले आप ये पैसे से अपने पोता पोती के लिए मिठाई लेते जाना बोलना तुम्हारे चाचा ने भेजे हैं फिर जा के वो पैसे लिए इसे कहते हैं "ईमानदारी"
इस दुनिया में बहुत कम लोग मिलते ईमानदार, आप किसी के चहरे से ये नहीं बोल सकते की ये ईमानदार हैं या नहीं I जब आप उनके साथ बात करोगे घुलोगे मिलोगे तब पता चलता हैं की मैं तो कुछ और ही सोच रहा था मगर ये तो कुछ और ही हैं ये बात "श्रध्दानन्दजी" के साथ था... "इसे कहते हैं "ईमानदारी"
Blog : Badal Goswami
...OSR...

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