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दिसंबर, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मास्क..

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                                             😍😍😊               " मास्क किसी के मुहं में लगा देखने से अब डर सा लगने लगा हैं ऐसा प्रतीत होता हैं की कोरोना वापिस आ गया है और चारो तरफ कोरोना वायरस नज़र आने लगता हैं "               वही आँखों में तस्वीरे आने लगता हैं की मरीजों को इलाज करते डॉक्टर पी पी किट पहने सामने खड़ा हो और कोई मरीज एम्बुलेंस में जा रहा हो कोई अपने परिवार के लिए ऑक्सीजन की सिलेंडर ले के भाग रहा हो लम्बी लम्बी लाइने दवाई के दुकानों में लगी रहती थी और अगर आपको खांसी जुकाम हो गया तो टेस्ट करवाने चले गए तो स्वस्थ आदमी यही सोचने लगता है की पता नहीं कौन सा टेस्ट करेंगे ये पी पी किट पहने हुए डॉक्टर स्वस्थ आदमी भी उस समय बीमार समझने लगता अपने आप को और सोचता की मुझे क्या हो गया भगवान मेरी टेस्ट नेगेटिव कर देना ये प्रार्थना करने लगते है वास्तविकता में घबराहट सभी को लगता था कोरोना के टेस्ट से चाहे व...

बस्ता

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                       किसी के पीठ में बस्ता किसी के कंधे में और  किसी के सर पर बस्ता बस्ता मतलब आप लोगों को क्या लगता हैं,कौन सी बस्ते के बारे हम बोल रहे है थोड़ा दिमाग लगायें की मैं क्या बोलना मतलब लिखना चाहता हूँ I आप सोच रहे है कि बस्ता मतलब स्कूल का बस्ता.. मतलब कुछ भी निकाल सकते हैं मगर यह बस्ता बहुत ही अलग तरह का है I यह जन्म से लेकर मृत्यु तक आपके साथ यह बस्ता चलता रहता हैं I मगर लोग कुछ और ही समझते हैं,वास्तविक में बस्ता हमारी जिंदगी में बहुत कुछ सीखा कर जाते हैं और यह हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करता रहता हैं और हम इस बस्ता को मृत्यु तक ढोते रहते हैं I तो आपको बताता हूँ आखिर किस बस्ते के बारे मैं कहना चाहता हूँ I बचपन में हम गाँव के पाठशाला जब जाते थे तो हाथ में ही किताब कॉपी हुआ करता था,कुछ बच्चे थैला में भी किताब कॉपी ले के आते थे,पहली से चार तक हाथ में ही किताब कॉपी ले जाया करते थे,परन्तु अब तो पहली कक्षा से ही बस्ता दे दी जाती है और इस बस्ते की वजन बहुत ज्यादा नहीं थी हाँ बस्ता उठाने में बहुत अच्छा ...

इंतजार

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                                                                                                                            मन ही मन यही सोचती मेरी क्या गलती है भगवान.. एक परिवार था परिवार बहुत ही सुंदर और बड़ा मगर कमाने  (नौकरी.)  वाली कहे तो घर को "सिर्फ एक महिला" चला रही थी इस परिवार में तीन भाई दो बहन एक बूढ़ी  माँ   बड़ी बेटी के दो बच्चे और दामाद थे I माँ बेटी दामाद के पास ही रहती थी सब ठीक चल रहा था मगर कहने के लिए ठीक चल रहा हैं घर के अन्दर कोई दुःखी भी थी,पर परिवार में किसी को कुछ पता नहीं था की वो अंदर ही अंदर घुंट रही थी वो किसको बोले कौन सुनता उनकी बात.. परिवार को किसी तरह बड़ी बहन चला रही थी मगर वो सुखी नहीं थी I सिर्फ काम किये जा रही थी और अंदर ही अंदर...