संदेश

अप्रैल, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बेबस बचपन

चित्र
                                                                                                   हमारा भारत देश बहुत विशाल हैं,हमारे देश की जनसंख्या आज के तारीख में विश्व में दुसरे स्थान पर हैं और चीन पहले स्थान में हैं I जिस देश की जनसंख्या ज्यादा होगी वहाँ भूखमरी भी ज्यादा होगी I जिससे बेरोजगारी भी बढ़ेगी लोग अपने पेट भरने के लिये कुछ भी काम करेंगे I देश की आबादी के हिसाब से सभी चीजों की मांग भी बढ़ेगी,मगर आपको हमको सभी को आत्म निर्भर बनना पड़ेगा I    देश बचेगा नहीं तो पहले की तरह गुलाम बनने में समय नहीं लगेगा,क्योंकी भारत पर सभी देशों की निगाह है I  हमारे देश में गरीबों की संख्या सबसे ज्यादा हैं किसी ज़माने में भारत की आर्थिक स्थिति चीन से बहुत अच्छी थी ४० साल पहले चीन भारत से काफी गरीब देश था मगर अब चीन को मैकेंजी की रिपोर्ट...

अस्पताल

चित्र
                  डॉक्टरनी जी सुई दे दीजिये मेरे बीबी को..       यह  कहानी  करीब ४० साल पुरानी एक सरकारी अस्पताल की हैं,यह बिहार के गंगा नदी के पास स्थित हैं यह अस्पताल एक चिकित्सा महाविधालय भी हैं यह बहुत बड़े क्षेत्रफल में विकसित हैं और यह भारत के चिकित्सा विद्यालयों में एक हैं इसकी चर्चा देश के हर कोने में हैं ये काफी चर्चित अस्पताल हैं इस अस्पताल में सबसे ज्यादा मरीज देखे जाते हैं इसमे हर इलाज के अलग अलग विभाग हैं I इस अस्पताल में करीब दो हजार से लेकर तकरीबन तीन हजार मरीजों के बिस्तरों वाला अस्पताल हैं I      लोग इस अस्पताल के बारे में कुछ अनसुनी कहानीयां बताते हूँ सुन के हैरान हो जाएंगे I रमेश की बहन नर्सिंग की कोर्स कर रही थी काफी पढ़ी लिखी लड़की थी मेट्रिक में अच्छा नंबर से पास की थी कॉलेज में भी अच्छी नंबर लायी थी उसके घर वाले ने बहुत कहा की कोई और कोर्स कर लो मगर वो बोली नहीं मुझे नर्सिंग की ही पढ़ाई करनी हैं बहुत हट्टी थी एक बार जो सोच लेती वही करके मानती,घर वाले भी क्या करते चलो ठी...

अपडेट

चित्र
                                “ये ब्लॉग मेरे प्रिये पाठको के लिए हैं जो मेरे ब्लॉग को रोज पढ़ते हैं”        हमारा देश कृषि प्रधान देश हैं यहाँ हिन्दू,मुस्लिम,सिख,इसाई सभी जाति के लोग रहते हैं और सभी की भाषा भी अलग अलग तरह की हैं । आज से कुछ ६० साल पहले भारत में गाँव हो या शहर कितना अच्छा लगता था चारो तरफ हरियाली पेड़ पौधे चिड़ियों की चक-चकाहट और वातावरण कितना अच्छा था मिटटी की खुशबू आती थी उस समय लोग एक दुसरे से मिलते थे तो मुस्कुरा कर जैसे वह एक ही परिवार के हो जब रास्ते से निकलते थे लोगों को कोई फ़िक्र नहीं थी की पैसा ज्यादा कमाना हैं जो जिस काम में लगे हैं उसे उसी काम में मन लगता था और बहुत खुश भी रहते थे उन्हें बस आज कितना   कमाये ये जानते थे कोई भी त्यौहार हो या कोई उत्सव बड़े हर्षो उल्लास से मानते थे सभी लो गों में भाई चारा थी कौन हिन्दू है कौन मुस्लिम , सिख,इसाई वह ये नहीं देखते थे बस पर्व और त्यौहार का आनंद उठाते थे लोगों में ये झिझक नहीं थी की फलाने के पास इनता पैसा कहाँ से आ...