छोटी बेटी
दूसरा अध्याय..
छोटी बेटी शादी के कुछ ६ महीने बाद एक दिन अचानक से वो अपने पापा के घर आई पापा ने देख की बेटी बहुत दुखी और परेशान हैं और वो रो रही थी,पापा ने पूछा क्या हुआ बेटा तुम अचानक से यहाँ आई हो कोई फ़ोन कर देती तो मैं तुम्हे लेने आ जाता क्या हुआ बताओ तभी माँ दुसरे कमरे से दौड़ कर आई और बेटी को गले से लगा ली,माँ पूछी बेटा क्या हुआ हैं बताओ बेटी कुछ नहीं बोली और रोती हुई वो दुसरे कमरे की तरफ चली गयी,माँ भी उसके साथ भागी की क्या हुआ हैं माँ बोली बेटा बताओ तो क्या हुआ हैं फिर पिताजी भी आ गए बोले बताओ ना बेटा क्या हुआ हैं छोटी बेटी रोती हुए बोली पापा मैं ना बहुत दिनों से घर से बाहर निकल नहीं पाई जब से शादी हुई हैं तो माँ बोली इसमे रोने की क्या जरूरत हैं तुम अपने पति से बोल कर बाहर घूम आओ इसमें क्या दिक्कत हैं तभी वो आखों की आंसू पोंछते हुए बोली माँ उस घर में ना सभी लोग ही ऐसे हैं पापा बोले कैसे हैं ? बताओ !!कुछ समझ नहीं आ रहा हैं तुम क्या बोलना चाहती हो बताओ
बेटी बोली पापा जब सास ससुर काम के निकल जाते तो पति अपने काम पर जाने से पहले मुझे दरवाजे में ताला लगा कर चले जाते हैं और बोलते हैं की कोई आये तो बता देना की घर पर कोई नहीं हैं मैं बोली मुझे कोई जरुरी काम आ जाये या घर में कही आग लग जाये तो मैं कैसे बाहर निकलूंगी कोई भी स्थिती हो सकती हैं तो बोलते हैं कुछ नहीं होगा चुप से अंदर रहो शाम को हम लोग आयेंगे तो दरवाजा खोलेंगे तुम अभी अंदर ही रहो मैं स्कूल जा रहा हूँ ये कह कर वो चला जाता हैं हर रोज जब शाम को जब सास ससुर और वो आते हैं तो बोलते है घर में कुछ ख़ास मेहमान आ रहे उनके लिए कुछ अच्छा सा खाना बनाओ मुझे सारा दिन बंद कर के और रात में मेहमानों के लिए खाना बनाओ मुझे ये लोग बहुत परेशान कर रहे हैं माँ आपको एक और बात बताना चाहता हूँ मेरा पति मेरे साथ रहना नहीं चाहता हैं वो रात को भी मेरे साथ नहीं रहता पूछता हूं तो कहता हैं ऑफिस का काम कर रहा हूँ आप बताओ माँ वो एक शिक्षक हैं बच्चों को पढ़ाते हैं रात में कौन सा काम करते हैं मुझे तो समझ नहीं आ रहा हैं की क्या चल रहा हैं सारी बातें सुनने के बाद माँ पापा दोनों एक दम शांत और चुप हो गये पापा बोले ठीक हैं हम ससुरजी से बात करता हूँ बेटा तुम परेशान मत हो रोओ मत मैं कल सुबह ही ससुर से मिलने जाऊंगा दुसरे दिन पिताजी ससुर से मिलने गए,ससुर ने बड़े प्यार से बिठाये और बात की ससुर बोले देखो समधीजी इन बच्चों की आपस की लड़ाई में हम लोग क्यों पड़ते हैं नयी नयी शादी हुई हैं ठीक हो जायेंगे आप चिंता मत करो बेटी को भेज दो मैं बेटे को समझा दूंगा ये कह के ससुरजी दफ्फ्तर निकल गए,शाम को पिताजी ने बेटी को बुलाया और बोल बेटा मैंने ससुरजी से बात किया हूँ तुम कल सुबह ही ससुराल चली जाना और किसी बात से चिंता मत करना तुम्हारा पिताजी अभी जिन्दा हैं बेटी बहुत खुश हो गई और बोली ठीक हैं पिताजी कल मैं ससुराल चली जाउंगी,माँ बोली देखो मेरी बेटी कितनी अच्छी है दुसरे दिन छोटी बेटी तैयार हो कर ससुराल चली गयी सास ससुर बहुत खुश हुए की बहु आ गयी हैं अब हमारे घर की देख भाल करने की जरुरत नहीं हैं अब यही घर की देख भाल करेगी ये लोग निश्चिंत हो गए मगर बेटे ने अभी तक अपनी बीबी से मिलने नहीं आया वो बहुत परेशान होने लगी तभी वो आया और बोला आ गयी अपने पिताजी के घर से भिखारी कही की ये बात सुनते ही छोटी बेटी बोली थोड़ा मुहँ को लगाम दो हम भिखारी नहीं हैं हमारे पिताजी ने चार बहनों की शादी दी हैं आज तक किसी के भी घर से कोई शिकायत नही आई हैं तुम एक ऐसे इन्सान हो जो की अपनी बीबी को छोड़ कर पता नहीं किसके साथ रह रहे हो आज तुमको बताना पड़ेगा की मुझमे क्या कमी हैं इसके बाद हो गयी तू तू मैं मैं सास ससुर ये सब देख कर बोले हम काम पर जा रहे तुम लोग आपस में मत लड़ो छोटी बेटी कुछ नहीं खाई अपने कमरे में जा कर बैठ गयी और रोने लगी फिर वो लड़का (पति) आया और खूब सारी गलत गलत बातें उसके परिवार के बारे में बोलने लगा मगर वो कुछ बोली नहीं सिर्फ रोये जा रही थी फिर पति ने घर का दरवाजा बाहर से ताला लगा के स्कूल चला गया..
रात को जब सब लोग घर पर आ गए तो छोटी बेटी बेटी (बहु) ने ससुरजी से सारा सुबह की बात बताई इस पर ससुरजी ने बोला तुम्हे अगर इस घर में रहना हैं तो ऐसे ही रहना होगा बात मानने होंगे,नहीं तो हमेशा के लिए अपने पिताजी के पास चली जाओ इस बात से छोटी बेटी को लगा की कोई नहीं है इस घर में उसके लिए लेकिन वो अपने मन को सँभालते हुए सब दुःख पी गयी फिर बोली ठीक है पिताजी (ससुरजी) रात को कोई उसके साथ ना खाना खाते ना कोई बात साझा करते ऐसे ही समय बितता गया,६ महीना इसी लड़ाई झगडा में बीत गया लेकिन एक दिन भी उससे ठीक से बात नही हुई एक दिन तो झगड़ा बहुत ज्यादा हो गया हाता पाई तक नौवत आ गयी रात में सुबह को वो उठी और अपना बेग में सभी सामान डाल कर घर से निकल गयी ये देख कर सास ससुर बोले अपने लड़के को उसे रोको नहीं तो पड़ोसी को क्या बोलेंगे की नई नई शादी हुई हैं बहु घर से चली गयी लड़का भाग कर उसके पीछे भागा,मगर वो निकल चुकी थी लड़का ने अपनी मोटर साइकिल से भाग कर छोटी बेटी (बहू)की घर से थोड़ी दुरी पर उसे रोकने की कोशिश की बोला चलो घर छोटी बेटी बोली मुझे नही रहना तुम्हारे साथ इस बात से लड़का बोला रास्ते में बेईज्यती मत करो लोग देख रहे हैं फिर बोला चलो मेरे साथ घर छोटी बेटी बोली मुझे नहीं जाना इस बात से लड़के ने छोटी बेटी को लोगों के सामने थप्पर मार दिया छोटी बेटी गुस्से से पागल हो गयी फिर वो लड़का उसको खींचने लगा वो बोली हाथ छोड़ो मेरा मुझे नही जाना अगर तुम मुझे इस तरह सड़क पर मरोगे तो मैं पुलिस को बुलाउंगी वो बोला बुलाओ पुलिस को फिर थोड़ी देर बाद पुलिस आई पुलिस ने सारी बात सुनने के बाद बोला आपके ऊपर ये लड़की क़ानूनी करवाई करवा सकती हैं आपने इसके ऊपर हाथ उठाये हो और आप को कम से कम ६ महीने की सजा हो सकती है अगर ये लड़की रिपोर्ट करे की आप ने इसे सड़क में थप्पर मारा हैं अब आप सोच लो क्या करना हैं पुलिस ने छोटी बेटी से घबराओ मत पुछा बेटा आप एक बयान दो लिखित में फिर देखो मैं इसका क्या हाल करता हूँ सरकारी नौकरी तो हाथ से जाएगी और जेल की सजा भी मिलेगी छोटी बेटी बहुत सोच समझ कर बोली आप मुझे इस से तलाक दिलवा दो मुझे इसके साथ नहीं रहना ये मुझे बहुत मारता पीटता और मेरे पिताजी को भिखारी बोलता हैं पुलिस ऑफिसर ने कहा ठीक हैं आप दोनों मेरे साथ पुलिस थाना चलो..
छोटी बेटी के साथ ये सब रास्ते में हुआ बात आग की तरह फैल गया उनके पिताजी को भी मालूम हो गया वो भी भागे भागे थाना पहुँच गये सास ससुर भी भागे भागे थाना पहुँच गये छोटी बेटी ने जब अपने पिताजी को देख तो भाग कर उनसे लिपट गयी और रोने लगी पिताजी बोले बेटा क्या हुआ हैं बताओ..
सारी घटना सुनने के बाद पिताजी बोले ठीक हैं तलाक होगी तलाक की सारी करवाई होने के बाद पुलिस ने एक ही बात लड़के और उसके पिताजी से बोले “तुम लोगों को इस लड़की ने बचा लिया,नहीं तो आज तुम सारे सलाखों के पीछे होते इसकी एक बयान से तुम्हारी जिंदगी ख़राब हो जाती और तुम कहते हो भिखारी हैं इसके पिताजी,ऐसी लड़की किस्मत बालो को ही मिलती हैं” जाओ बच गये आज फिर कभी किसी लड़की से ऐसे मत करना पता नहीं वो कैसी होगी जाते जाते छोटी बेटी के पिताजी ने बोले हमलोग भिखारी नहीं हैं मैं अपनी बेटी को पाल सकता हूँ मेरी बेटी जब इतना कुछ होने के बाद भी वो तुम्हारा साथ दिया,ये हमेशा याद रखना..
चलो बेटा ये कह कर छोटी बेटी पिताजी के साथ चले दिए और वो लड़का और उसके माँ बाप उसे देखते रह गये...
भगावन से विनती
छोटी बेटी अपने पिताजी के साथ बहुत ख़ुशी ख़ुशी घर पहुंची और सबसे पहले भगवान को शुक्रिया अदा की और भगवान से बोली भगवान अब किसी से शादी करवाना जो मेरी पसंद की हो और जो मुझे बहुत प्यार करे !!
छोटी बेटी ने फिर से अपनी पढ़ाई शुरू की और मन लगा के पढ़ना चालू की अच्छे कॉलेज में दाखिला ली और खूब मन लगा के अपनी ऍम.ए. की परीक्षा दी उसमे अब्बल भी हुई और साथ ही साथ बच्चों को घर में और बाहर पढ़ना शुरू की पैसे भी कुछ कमाने लगी माँ पिताजी की भी सहायता पैसों से करने लगी,फिर कुछ दिनों के बाद उनकी नौकरी लगी एक बोर्डिंग स्कूल में और यह स्कूल घर से ४० किलोमीटर में थी लेकिन बेचारी करती क्या लोग बहुत तरह की बातें करते अगर वो घर पर रहती लोग कहते शादी हुई पता नहीं पति को क्यों छोड़ दी ना ना तरह के सवाल करते ये सुन सुन के वो बहुत परेशान होने से अच्छा कही दूर नौकरी करना ज्यादा अच्छा था माँ पिताजी भी लोगों की ताना सुन सुन के पक गए थे,इसलिए छोटी बेटी ने बोर्डिंग स्कूल में पढ़ना ज्यादा जरुरी समझी वो बोर्डिंग स्कूल में जाती तो हप्ते में दो दिन की छुट्टी होती थी वो हप्तें में दो दिन घर आती और फिर बोर्डिंग स्कूल चली जाती लोग पूछते तो बोलती है मैं बहुत खुश हूँ इस काम से इस तरह वो अपने आप को संभालती चली गयी अपने जिंदगी ...
बेटियां बाप की दुलारी
मगर पिताजी कही ना कही बहुत परेशान रहते थे की सभी बेटियों की शादी अच्छे घरों में हुई बेचारी को मैंने अपने पसंद के परिवार के यहाँ शादी करवाई मगर वो परिवार ठीक नहीं निकला ये बात खाये जा रहे थे कुछ दिनों के बाद पिताजी की सेवानिवृत हो गये नौकरी से अब और भी परेशान होने लगे,फिर इन्होनें छोटी बेटी के लिए फिर से रिश्ते ढूढनें लगे और रिश्तेदारों फ़ोन चिट्टी से बताने लगे की कोई अच्छा सा लड़का हो तो बताना छोटी बेटी की शादी करनी हैं मगर जब रिश्तेदारों को ये पता लगता की उसकी पहले शादी हो चुकी हैं तो लोग इंकार करने लगे लेकिन पिता को ही मालूम हैं की मेरी एक गलती की वजह से मेरी बेटी की आज ये हालत हैं ये सोच सोच के पिताजी थोड़े बीमार होने लगे,फिर एक दिन छोटी बेटी स्कूल की छुट्टी में घर आई देखी की पिताजी थोड़ा परेशान हैं तो वो पिताजी से बोली पिताजी क्या हुआ हैं आपको बताओ पिताजी बोले कुछ नहीं,माँ से पूछी माँ पिताजी क्यों परेशान हैं माँ बोली वो तुम्हें ले के बहुत परेशान हैं बेटी बोली मैंने ऐसा क्या किया जो पिताजी परेशान हैं माँ बोली वो तुम्हारी शादी को ले के बहुत परेशान हैं माँ मैं एकदम ठीक हूँ मुझे शादी नहीं करनी माँ बोली बेटा कितने दिन तक अकेले रहोगी हमें अगर कुछ हो जाये तो तुम अकेले कितने दिन तक रहोगी और सब बेटियों की परिवार हैं वो सभी खुश हैं छोटी बेटी बोली माँ अब क्या करे मेरी किस्मत ही ऐसी हैं,
समय ऐसे ही बितता जा रहा था एक दिन पिताजी बोले बेटा क्यों ना हम लोग कुछ दिनों के लिए बाहर से घूम आये थोड़ा तुम्हारा भी मन ठीक हो जायेगा और हम भी हरिद्वार,बनारस और दिल्ली घूम लेंगे पता नहीं कितने दिन और जिन्दा रहेंगे कुछ पता नहीं,बेटी बोली ठीक है पिताजी मैं कुछ दिनों के लिए स्कूल से छुट्टी ले लेती हूँ फिर सब साथ चलते हैं पिताजी बोले ठीक हैं मैं टिकट की व्यवस्था करता हूँ तुम छुट्टी ले लो बेटी बोली ठीक हैं पिताजी..
ट्रेन की टिकट हुई सभी लोग माँ पिताजी और बेटी सभी लोग घुमने निकल गये करीब दो सप्ताह तक हरिद्वार,बनारस और दिल्ली तीनो राज्य में खूब घुमे मजे किये माँ पिताजी बहुत खुश हुये और फिर ये लोग वापिस अपने गाँव आ गये बेटी की भी मन ताजा और खुश हो गये फिर वही छोटी बेटी की स्कूल आना जाना शुरू हो गये वही सप्ताह में दो दिन के लिए घर आती फिर स्कूल चली जाती ऐसे ही जिंदगी की गाड़ी चल रही थी..
फिर अचानक से एक मोड़ आया
पिताजी को एक परिवार मिला जो बहुत ही गरीब और अच्छे घर से हैं लड़के के माता पिता बहुत पहले ही गुजर गए थे लड़का नौकरी करता हैं अपनी बहन के साथ रहता हैं मतलब ठीक ठाक कमा लेता हैं पिताजी ने उसके घर वालो से बातचीत किये फिर दोनों परिवार में देखा देखि हुई लड़के को लड़की बहुत पसंद आया उसने हा भर दी की मुझे इस लड़की से शादी करनी है बात पक्की हो गयी शादी दोनों घर वालो ने मिल कर दी,पिताजी भी बहुत खुश हो गए की चलो बेटी की घर बस गया,फिर कुछ दिनों बाद लड़का लड़की को ले के अपने शहर आ गये लड़का दफ्त्टर चला जाता लड़की घर में अकेले बोर सी होने लगी क्योंकी वो एक दम से अपना स्कूल छोड़ कर आ गयी थी उसको यहाँ मन नहीं लग रही थी काम करने वाली लड़की को अगर घर में बैठा दिया जाये तो क्या होगा परेशान होगी नये शहर में फिर काम ढूढने में काफी वक़्त लगता हैं मगर क्या करती बेचारी चुप घर में बैठी रहती धीरे धीरे दोनों के भी अनबन शुरु होने लगा लड़का बहुत ज्यादा कमाता नहीं था उसकी वजह से लड़की की कोई ख्याश पूरी नहीं कर पाता,इस बात से अक्सर लड़ाई झगड़ा होते रहता हैं फिर बहुत कोशिश से अपने ही मोहल्ला में एक स्कूल में नौकरी करने लगी थोड़ा मन अच्छा लगने लगा क्योंकी वो हमेशा बच्चों के बीच रहती थी,पिताजी की फ़ोन आता कैसी हो बेटा मैं ठीक हूँ पिताजी ये कह कर फ़ोन रख देती क्या बोलेगी की ठीक नहीं हूँ कुछ दिनों के बाद स्कूल छोड़ना पड़ा क्योंकी डॉक्टर ने कहा आप आराम करो बच्चे के लिए ठीक होगा हो गयी पढ़ाई ख़त्म फिर घर में बैठ गयी,कुछ दिनों के बाद उनको एक सुंदर सी बेटी पैदा हुई घर में खुशियाँ आ गयी दोनों बेटी की परवरिश में लग गये,दोनों की लड़ाई झगड़ा कुछ हद तक ख़त्म हो गयी थी फिर मम्मी पापा आये बच्ची को आशीर्वाद दे के कुछ दिनों बाद वे लोग गाँव चले गये..
अब बेटी ७ साल की हो गयी किसी तरह बेटी को खुद दोनों ने अपने ख़ुशी को त्याग कर बड़ा किया अब छोटी बेटी फिर से अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है कुछ करना चाहती हैं अपनी बेटी के लिए वो वक़्त आया वो फिर से काम शुरू की एक अच्छे स्कूल से नौकरी की ऑफर आया और ख़ुशी ख़ुशी नौकरी में शामिल हो गयी इस तरह से बेचारी फिर से अपने काम में लग गयी अब उसका सिर्फ एक ही लक्ष्य हैं कि बूढ़े माँ बाप की ध्यान रखूं,बेटी को अच्छे से पढ़ाई लिखाई कराऊँ और एक अच्छा इन्सान बनाऊ,भगवान से बस यही कामना करती हैं I आज जो उसकी जीने की लालशा ख़त्म सी हो गयी अब वह भरपूर जीना चाहती हैं अपनी बेटी के लिए और वो अपनी बेटी को हर ख़ुशी देना चाहती हैं जो कभी उसे नहीं मिली थी
"किस्मत भी अजीब चीज हैं देती हैं मगर बहुत रुला के,मगर देती जरुर हैं " अब दोनों पति पत्नी बहुत ख़ुशी से रहने लगे,दोनों का ध्यान अब सारा दिन बेटी पर ही लगी रहती हैं I
कहाँ थी वो,कहाँ गयी,कहाँ आई,और कहाँ आ कर रुकी ये सभी किस्मत की ही खेल हैं जो "श्रध्दा और सबुरी" रखी उसकी जीत निश्चित हैं,और ये जीत भगवान तय करते हैं I
Blog : Badal Goswami
...OSR...
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