सावधान (बच्चों को टैबलेट या कैप्सूल देने से)

हमारा भारत एक विशाल देश हैं यहाँ हर जाति धर्म के लोग रहते हैं सभी की भाषा भी अलग अलग हैं यहाँ के लोग रोज कमाते हैं और उसी कमाई से अपने बच्चों का भरण-पोषण और घर को चला रहे हैं I घर के बड़े बुजुर्ग दिन भर काम करते हैं,तो जा के एक वक़्त का खाना जुगार कर पाते हैं I लेकिन रहते हैं बहुत ही सुकुन से,ना किसी से लड़ाई-झगड़ा और ना किसी के काम में दखल-अंदाजी करते हैं I इस प्रकार सभी वर्ग के लोग अपनी अपनी हैसियत से कमाते हैं I 

एक जानकारी आप लोगों को बताना चाहता हूँ..

एक बार की बात हैं तमिलनाडु के पास पील्लाकुप्प्यम नाम का एक गाँव हैं वहाँ एक परिवार था वह परिवार बहुत ही छोटा पति पत्नी और पांच साल का बच्चा था I एक दिन उनके बच्चें को बुखार आया उन्होंने इधर उधर की देशी उपचार किये ताकि बुखार उतर जाये, लेकिन बुखार नहीं उतरा पति पत्नी घबरा गए और बच्चें को गाँव के सरकारी अस्पताल ले गये,वहाँ डॉक्टर ने बच्चे को देखा और कुछ दवाएं लिखी I बच्चें को सरकारी अस्पताल से दिखा के आने के बाद उसी दिन रात में उन्होंने अपने बच्चें को दवा दी I

     लेकिन गोली निगलते समय वह गले में अटक गया और बच्चें को साँस लेने में तकलीफ होने लगा I माँ बाप बहुत परेशान हो गए की क्या करे रात का समय भी था, फिर उन्होंने बच्चें को उसी दिन रात को सरकारी अस्पताल लेकर गये बच्चा बेहोश हो चूका था I डॉक्टर ने बच्चे को देखा हार्ट-वीट चेक किया मगर कोई respond नहीं मिला डॉक्टर ने उनके परिजन को बोला बच्चा मर चूका हैं दम घुटने से..

      डॉक्टर ने बताया नहीं था की दवा की गोली कैसे खिलानी I उसके वजह से गोली गले में फँस गया और बच्चें का जान चला गया I बच्चें को कोई भी दवा टेबलेट या कैप्सूल देते समय अनेक बातों का ध्यान रखना बहुत जरुरी हैं I 

डॉक्टरों का कहना हैं कि छह साल से कम उम्र के बच्चों को टेबलेट या कैप्सूल कभी भी सीधे मुहँ से निगलने के लिए नहीं देना चाहिए I बच्चें तो माता पिता के डर से टेबलेट या कैप्सूल को निगल लेंगें, परन्तु गले में फ़सने की संभावना होती हैं I इसी प्रकार 65 से ऊपर वाले बुजुर्ग को भी सीधे टेबलेट या कैप्सूल निगलने के लिए देना नहीं चाहिए एक तो बुजुर्ग हैं उन्हें सर्दी-जुकाम या खांसी हमेशा रहती हैं I इससे हमेशा बुजुर्ग कोई भी गोली लेने से इंकार करते हैं I क्योंकी उन्हें पता होता हैं की खांसी आएगी तो गोली गले से नीचे उतारेगी नहीं गले में ही फँस जाएगी I इसलिए अधिकतर बुजुर्ग गोली लेने से मना करते हैं I कुछ को तो गोली लेने से उल्टी भी आ जाती हैं और साँस लेने में परेशानी जैसी समस्या होती हैं I 

"अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स" के मुताबिक 5 साल से छोटे बच्चों के गले में खाना या कोई भी छोटी चीज फंसने से दम घुट सकता हैं और अगर साँस की नाली में कुछ फँस गया तो फेफड़े में आक्सीजन पहुँचना रुक सकता हैं I हमारे दिमाग को अगर चार मिनट् से ज्यादा समय तक आक्सीजन ना मिले तो हमारा दिमाग को बहुत दिक्कतों से गुजरना पड़ता हैं और उस स्थिति में मौत भी हो सकती हैं I डॉक्टरों का कहना हैं की कुछ दवाओं का सिरप नहीं मिलता हैं I उसकी वजह से टेबलेट या कैप्सूल लेना पड़ता हैं I आमतौर पर 6 साल के बच्चों को टेबलेट या कैप्सूल देना ठीक नहीं हैं, माता पिता को दवा को पीसकर पानी का घोल बना कर देना चाहिए I डॉक्टर के मुताबिक आमतौर मुंह में थोड़ा पानी ले कर उसके टेबलेट निगलना सबसे बेहतर तरीका हैं I लेकिन छोटे बच्चों को ऐसा करने में मुस्किल होता हैं या तो बच्चा उलटी कर देगा या गले में फँस जायेगा I बच्चों के दम घुटने और जान जाने के खतरे से बचाने के लिए सबसे अच्छा तरीका हैं दवा को पीस कर पानी में घोल बना के बुजुर्ग और बच्चों को पिला सकते हैं "विश्व स्वास्थ्य संगटन" भी यही सलाह देते हैं I दवा की गोली का आकार,रूप और कड़वा स्वाद भी निगलने में बहुत मुश्किल पैदा करता हैं I 

कृपा बच्चों पर ध्यान दे... 

अगर कोई भी दवा टेबलेट या कैप्सूल के रूप में हैं तो बेहतर यही होगा की दवा को पीस कर पानी का घोल बना कर दिया जाये I कभी भी बच्चों के नाक को हाथों से बंद कर दवा ना दे,इससे साँस लेने या दवा निगलने में बहुत दिक्कत हो सकती हैं I


Blog : Badal Goswami 


                                                               ...osr...   



       

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