मोरबी एक दुःखद (हादसा)
मोरबी गुजरात राज्य के जिले में स्थित एक नगर है इसे “मोरवी” के नाम से भी जाना जाता हैं,परन्तु अभी लोगो के जुबान पर “मोरबी” हैं टाइम्स नाउ नवभारत की रिपोर्ट के मुताबिक १५ फरवरी,१९४८ में यह सौराष्ट्र में मिला दिया गया और वर्त्तमान में यह एरिया गुजरात राज्य का हिस्सा हैं I गुजरात में मोरबी राज्य को एक अलग पहचान देने के उद्देश्य से बनाया गया था मोरबी मुख्यालय भी हैं जिले का,यह हमेशा आकर्षण का केंद्र रहा हैं गुजरात में एक विख्यात नगर है ”मोरबी”
मोरबी नगर (हैंगिंग ब्रिज,केवल ब्रिज,रस्सी
पुल और राम-लक्ष्मण झुला) के नाम से बहुत विख्यात हैं I इसे “मोरबी पुल” भी कहते हैं यह पुल ६४
किलोमीटर राजकोट की दूरी पर स्थित “मच्छु नदी” पर बना हुआ हैं जानकारों का कहना हैं,की इस पुल का निर्माण १८८७ में मोरबी शासको द्वारा कराया गया था I इसकी लम्बाई १.२५ मीटर और चौड़ाई २३३ मीटर हैंI यह
१४२ साल पुराना हैं,दरवारगढ़ महल और लखधीरजी इंजीनियरिंग कॉलेज को जोड़ने का काम
करता है I मोरबी का शानदार पुल खास कारीगरी के लिए प्रसिद्ध रहा
हैं I
१९७९ में आई बाढ़ के कारण मोरबी में
स्थित धरोहरो को काफी नुकसान और निर्जन हो गया था,फ़िलहाल अभी स्थिति ठीक हैं I लोग बहुत दूर दूर से आते है मोरबी
पुल को देखने खूब निहारते है और खूब मस्ती करते I मीडिया के खबर से इस पुल को देखने
के लिए २६अक्टूबर २०२२ को खोला गया था,
महज
कुछ दिनों बाद ही...
३०अक्टूबर २०२२ दिन रविवार शाम ६.३० बजे की यह काली शाम को कोई भूल नहीं सकता जो हादसा हुआ,सुन के शरीर कापं जाता हैं,क्योंकी इस दिन मोरबी पुल कुछ सेकण्ड में ही धराशायी हो गया था और कुछ ही पल में लोग नदी में शमा गए I किसी को मालूम नहीं था की यह पुल टूट जायेगा लोग मौज मस्ती और सेल्फी ले रहे थे अचानक से पुल में जितने भी लोग थे पल भर में नदी में समां गए I
चीखते चिल्लाते लोग जान बचाने के लिए
जद्दोजहद और काफी कोशिश की कुछ लोग पुल से लटके रहे किसी तरह जान बच जाये “बेहद
मार्मीक दृश्य” देख के रोना आता है,लोग कैसे अपनी जिंदगी बचाने के लिए काफी जद्दोजहद
कर रहे थे I तड़पते लोग चारो तरफ चीख पुकार मची
हुई थी,बच्चे,जवान,महिला और बुजुर्ग सभी तरह के लोग थे I किसी ने औलाद खो दी,किसी ने जीवन
साथी,किसी की कोख में ही औलाद की कब्र बन गयी किसी के अपने उसकी आँखों के सामने
डूब गया,किसी के सुहाग उजड़ गया तो किसी की कोख उजड़ गया I १८ से कम उम्र के लोग भी काफी
थे,मरने वालो में कई बच्चे भी शामिल थे I किसी को तैरना आता तो वह बच गये और जिसे तैरना नहीं आता वो मारे गये,दो दिन
तक नदी से निकलते रहे शव I इस धरोहर का नाश इस तरह होगा किसी को मालूम नहीं था,अब केवल
छिटा कशी हो रही हैं अधिकारी एक दुसरे के ऊपर दोष लगा रहे रहे हैं I इस १४२ साल पुरानी पुल के टूट जाने
से अधिकारी कुछ और ही कह रहे हैं,
भीड़ बढ़ने पर लोड को संभाल नहीं सकी और
मोरबी पुल टूट गया, बेकाबू भीड़ होने से पुल टूट गया, पुल का केबल बहुत पुराना हो
गया था भरी दवाब के कारण टूटा,कोई कह रहा हादसा भगवान की मर्जी I
सवाल बहुत सारी है ?
१) न्यूज़ खबर के मुताबिक जो कंपनी घड़ी बनाती है,घड़ी बनाने वाले
को पुल बनाने का ठेका..
२) अस्थायी मरम्मत करके पुल खोल देना..
अब
इसकी गिरफ़्तारी उसकी गिरफ़्तारी और जाँच हो रही हैं..
मगर.. ”जो मरे हैं वो वापस नहीं आयेंगा”
Blog : Badal Goswami
..OSR..
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