"रात" पार्ट ४ ..

                                                                                

"रात" पार्ट ४ ..

    आप लोगों ने अब तक जो मेरी लिखी हुई,कहानी में पढ़ा हैंगाँव के बारे में अब कहानी में एक नया मोड़ आ गया है...

     दरवाजा खोली तो..वो चकित थी..

देखी एक लम्बा दस से बारह फुट का आदमी और देखने में बहुत ही सुन्दर और चेहरे पर चमक सफ़ेद पोशाक पहने हुये खड़ा था I

    वो आदमी क्या हुआ,डॉक्टरनी साहेब,बड़े प्यार से बोला I डॉक्टरनी ने बड़ी धीमी आवाज से बोली,कुछ नहीं I इतनी रात में आप आये हो  वो भी इतनी ख़राब मौसम में बारिश हो रही है I हाँ बतायें क्या हुआ,डॉक्टरनी बोली पहले आप अन्दर आ जाओ बारिश बहुत तेज हो रही है I

     वो बोला नहीं डॉक्टरनी जी मेरे पास समय नहीं है बैठने की..

    मैं बहुत जल्दी में आया हूँ ,आपको लेने आया हूँ आपकी बहुत जरुरत है,कोई जिंदगी और मौत से जूझ रही  है आप जल्दी चलो I डॉक्टरनी साहिबा बहुत परेशान हो गयी बाते सुन कर,बोली इतनी रात को कहाँ जाना है I

     कौन बीमार है..     

     क्या हुआ है..कुछ बतायेगे  I

   तभी वो आदमी सहमी आवाज में बोला..मेरी बीबी की तबियत बहुत ख़राब है,वो गर्भवती है और दर्द से कराह रही हैं,आप चलो...

कहाँ जाना है  ?

इतनी रात,वारिश हो रही है,और जायेंगे कैसे कोई साधन नहीं है जाने का

   वो आदमी बोला डॉक्टरनी साहेब आप परेशान ना हो,जीप गाड़ी ले के आया हूँ I

फिर डॉक्टरनी पूछी कहाँ रहते हो I बताओ..

     वो आदमी चुप डॉक्टरनी को देखता रहा,फिर बोला..आप चलो...

   अब डॉक्टरनी को डर लगने लगा, वो सोची कोई मुसीबत में है और मैं एक डॉक्टर हूँ,कैसें ना बोलू I किसी तरह अपने आप को सँभालते हुए बोली ठीक है चलती हूँ I डॉक्टरनी अंदर से बहुत घबराये और डरी हुई थी, भगवान को याद करते हुये बोली अपने मन को की जो होगा देखा जायेगा I अपने बैग उठाई और बोली चलो

      वो आदमी बोल..डॉक्टरनी जी बैग मैं पकड लेता हूँ, आप चलो...

    जैसे ही झोपड़ी से बाहर निकली तेज वारिश हो रही थी, अंधेरा छाया हुआ था,डर से डॉक्टरनी की हालत बहुत ख़राब थी I

  वो आदमी बोला आइये डॉक्टरनी जी बैठिये...घबराये नहीं कुछ नहीं होगा I

   डॉक्टरनी बहुत परेशान हो रही थी, मन ही मन बोल सोच रही थी,कि पता नहीं कहाँ ले जा रहा हैं, तभी गाड़ी चालू हुई बारिश में गाड़ी चली जा रही थी,अंधेरे को चीरता हुये दूर दूर तक कोई दिख नहीं रहा था I डॉक्टरनी बैठे बैठे सोच रही थी, काश ना जाता तो ज्याद अच्छा होता I तभी उसकी नज़र अचानक ड्राईवर की सीट पर गयी,वो भोच्चोका रह गई I उसने देखा की ड्राईवर अपनी सीट पर कभी दिखता है,कभी गायब हो जाता हैं माजरा कुछ समझ नहीं पाई I डर से उसकी हालत और ख़राब हो रही थी, अपने आप को सँभालते हुए बैठे रही I रात के अंधेरे में कुछ पता नहीं चल रहा था की गाड़ी आखिर जा कहाँ जा रही हैं I तभी अचानक गाड़ी जंगल की ओर मोड़ दी I डॉक्टरनी ने बड़ी हिम्मत जुटा के पूछ ली हम जंगल की ओर क्यों जा रहे हैं I

      वो आदमी कुछ नहीं बोला, फिर डॉक्टरनी पूछी हम जंगल की ओर क्यों जा रहे I 

       वो आदमी बोला वहाँ मेरा घर हैं,

डॉक्टरनी बोली वहाँ तो कोई घर नहीं है और जंगल में कोई रहता नही है I

       वो आदमी बोला हम रहते है अपने परिवार के साथ घबराओ नहीं आप को कुछ नही होगा I  

     वह गाड़ी जंगल के अंदर चली जा रही थी, तकरीबन एक किलोमीटर जाने के बाद गाड़ी एक छोटा सा मैदान के पास रुका I चारो तरफ अंधेरा था कुछ दिख नहीं रहा था,मगर डॉक्ट नी को अनुमान हो गया था की वो जंगल के कितने अंदर आई हैं I

       तभी वो आदमी बोला डॉक्टरनी जी आप गाड़ी से नीचे उतरिये...

डॉक्टरनी डरे डरे से नीचे उतरी और बोली तुम्हारा घर कहाँ है, कही तो दिख नहीं रहा हैं I

      वो आदमी बोला वो देखो डॉक्टरनी जी सामने झोपड़ी दिख रही हैं,वह मेरा घर हैं, आप चलो...

डॉक्टरनी मन ही मन सोच रही हैं उस अंधेरे झोपड़ी में कौन रहता होगा,चलो जब इतनी दूर आ गए है तो चलते हैं I वो आदमी आगे आगे और डॉक्टरनी पीछे पीछे चलने लगी तभी डॉक्टरनी बोली झोपड़ी में कोई रोशनी क्यों नहीं है,कितना अंधेरा है कुछ दिख नहीं रहा हैं, वो आदमी कुछ नही बोला चलता जा रहा था I  

       कुछ दूर चलने के बाद वो आदमी बोला डरो मत, आप चलो...

       झोपड़ी में रौशनी हैं I

डॉक्टरनी बोली मुझे तो कहीं रोशनी दिख नहीं रही हैं, कैसी बात कर रहे हो,अंधेरे में पता नही कहाँ ले जा रहे हो मैं यहाँ से घर कैसे जाउंगी पता नहीं I

       वो आदमी बोला डॉक्टरनी जी आप बहुत डरती हो, मैंने बोला ना कुछ नहीं होगा,

         आप घबराओ नहीं, फिर भी डर रही हो...ये बोल के वो चुप हो गया..

झोपड़ी के अंदर पहुँचने पर डॉक्टरनी बोली कहाँ हैं,रोशनी.. चारो तरफ तो अंधेरा ही हैं I

        तभी वो आदमी बोला डॉक्टरनी जी आओ इधर,, बोला नीचे देखो..

डॉक्टरनी जब नीचे देखी तो नीचे उतरने के लिए सीढ़ी बनी थी और बहुत रोशनी आ रही थी और खुशबु भी बहुत अच्छी आ रही थी वो आदमी आगे था,और डॉक्टरनी पीछे थी I

               वो आदमी बोला डॉक्टरनी जी आ जाओ नीचे मेरे साथ....

डॉक्टरनी उसके साथ नीचे की और चलने लगी,करीब दस से बारह सीढ़िया उतरने पर देखा, और डॉक्टरनी की आंख खुली की खुली रह गयी I उसका शरीर जैसे सुन हो गया हो, वहाँ की नज़ारा देख कर कुछ बोल नहीं पा रही थी डॉक्टरनी ने देखा की एक बड़ी सी होल,राजा महाराजा की महल की तरह सजी थी और खुबसूरत लड़किया चेहरे पर रुमाल लगा के चारो तरफ खड़ी थी I नज़ारा देख कर ऐसा लग रहा था,कि जन्नत में वो पहुँच गयी है, ये देख कर डॉक्टरनी की हालत बहुत ख़राब होने लगी, वह कुछ बोलती की तभी                                           

  वो आदमी बोला डॉक्टर साहिबा घबराओ नहीं, आपको कुछ नहीं होगा..इधर आओ आप...मेरी बीबी दुसरे कमरे में हैं I

डॉक्टरनी जब कमरे में पहुंची तो वहाँ की नज़ारा देख कर चकित और आंखे खुली की खुली रह गयी I वो देखी एक लम्बे से बिस्तर में एक दस से बारह फूट की बहुत ही खूबसूरत महिला सो रही थी,और कहार रही थी,जैसे उसको कोई तकलीफ हो रही है उसके चारो तरफ देखभाल करने के लिए सुंदर सुंदर कन्याएं खड़ी थी, उसकी खिदमत के लिए खुशबू भी बहुत अच्छी आ रही थी I डॉक्टरनी ने चारो तरफ अपनी नज़र घुमा के सब कुछ देख रही थी तभी....

    वो बोला डॉक्टर साहिबा मेरी बीबी को देखो,वो तड़प रही हैं, दर्द से ?

      डॉक्टरनी बोली आप लोग थोड़ा हटो मैं देख लूँ,वो औरत इतनी लम्बी थी की मत पूछोडॉक्टरनी उसके पास जा कर बोली क्या हुआ, दर्द ज्यादा हो रहा है क्या ? वो मुस्कुरा के इशारे से बोली हा दर्द ज्यादा हो रही है.डॉक्टर ने अपने बैग से आला निकली और अपने कानो में लगा ली और जाँच करने लगी, जब डॉक्टरनी ने उसके छाती में आवाज़ सुनने के लिए आला लगायी तो आवाज़ सुन के वो घबरा गयी,और कुछ सोचने लगी,डॉक्टरनी को खूब पसीना आ रहा था, वो उस आदमी की ओर देखी वो आदमी मुस्करा रहा था I 

      तभी अचानक से वो औरत बहुत जोर जोर से सांसे लेने लगी,और चिल्लाने लगी, डॉक्टरनी बहुत घबरा गयी,कुछ समझ नहीं पा रही थी की क्या करे ? वो आदमी बोला डॉक्टरनी जी मेरी बीबी को बचा लो कृपया करो और हाथ जोड़ के खड़ा हो गया, डॉक्टरनी ने हिम्मत जुटा के बोली गरम पानी लाओ अभी तुरंत और सभी लोग यहाँ से जाओ और अपने बैग से एक इंजेक्शन निकली और उस औरत को दे दी और भगवान का नाम ले के उसकी पेट को जोर जोर से नीचे की तरफ धकेलने लगी.कोशिश करते करते औरत ने एक बहुत ही खुबसूरत बच्चे को दी, बच्चे की रोने की आवाज़ चारो तरफ गूंज रही थी, जैसे लग रहा था की मानो कोई फ़रिश्ता जन्म लिया हो सभी लोग खुश थेडॉक्टरनी ये सब नजारा देख कर बहुत चकित थी, और मन मन ही बोल रही थी हे भगवान आज आपने मुझे बचा लिया और एक लम्बी साँस ली, डॉक्टरनी ने बच्चे को गोद में ली और टकाटक  देखते रही, बच्चे को उस आदमी के गोद में दे दी वो बहुत खुश हुआ I 

      वो आदमी बहुत ख़ुशी से बोला डॉक्टरनी साहिबा आज आपने जो ख़ुशी दी हमलोग को,

      “हम जिंदगी भर नहीं भूलेगें सदा याद रखेगें हमलोग” आपको...

इस तरह से ख़ुशी को जाहिर किया, और वो आदमी ने बोला..

   डॉक्टरनी साहिबा हम कुछ देना चाहते आपको, वो आदमी ने इशारा किया.तभी कुछ लड़कीया तोहफा ले कर आई हीरा, चांदी, सोना बहुत सारे अशर्फीया और कीमती कपड़े.डॉक्टरनी बोली मुझे कुछ नहीं चाहिए मुझे घर जाना हैं.

    वो आदमी बोला नहीं कुछ तो लेना पड़ेगा डॉक्टरनी साहिबा खाली हाथ आपको जाने नहीं देंगे.

ये सुन के डॉक्टरनी बहुत घबरा गयी,बोली नहीं मुझे घर जाना हैं,फिर वो आदमी बोला ले लो कुछ भी..       

  वो आदमी बोला ठीक है,आप ये शाल ले लो, कभी भी कोई तकलीफ,परेशानी हो तो..इस शाल को अपने उपर डाल कर जो भी मांगोगी,वो मिलेगा...

     ये कह कर वो आदमी ने शाल डॉक्टरनी को दे दिया और बोला चलिये.. 

     मैं आपको घर छोड़ देता हूँ...

     झोंपड़ी से बाहर निकले तो बाहर बहुत तेज बारिश और बिजली कड़कने की आवाज़ आ रही थी और अंधेरा काफी था, मानो आज ही सारी बारिश हो जाएगी.

    वो आदमी बोला चलिए डॉक्टरनी साहिबा जीप में बैठिये, जीप चलने लगी..

     डॉक्टरनी बहुत कोशिश कर रही थी,अंधेरे में कुछ पहचाने की वो जंगल में कहाँ आई है,फिर वही ड्राईवर की सीट कभी वो आदमी दिखता है, कभी गायब हो जाता हैं.आखिर डॉक्टरनी अपने घर पहुँच गयी, वो आदमी डॉक्टरनी को बोला आपकी बहुत बहुत धन्यवाद, अच्छा अब मैं चलता हूँ,ये कह कर वो आदमी चला गया.डॉक्टरनी घर आ कर साँस ली I यही करीब साढ़े तीन बज रहे थे, ऐसे सोचते सोचते डॉक्टरनी को कब नींद आ गयी पता नहीं चला...

    सुबह के दस बज रहे थे, बारिश बंद हो गयी थी, अस्पताल में भीड़ थी.गाँव के लोग डॉक्टरनी जी की इंतजार कर रहे थे,तभी किसी ने कहा हरिया जाओ डॉक्टरनी जी के घर इतना देर क्यों हो रही है आने में पता लगाओ I तभी दरवाजा की कुण्डी की आवाज डॉक्टरनी को सुनाई दी,हडबडा कर उठी और बोली कौन हैं,बाहर से आवाज़ आई डॉक्टरनी जी मैं हरिया हूँ, आप आज अभी तक अस्पताल नहीं पहुंची,डॉक्टर नी बोली मैं आ रही ही तुम जाओ.वो सोचने लगी रात में क्या हुआ था,क्या मैंने कोई सपना देखा था, ये सोचते सोचते वो जल्दी जल्दी तैयार हो कर अस्पताल पहुँच गयी I अस्पताल में और दिनों से ज्यादा भीड़ थी एक एक कर सभी मरीज को देखी.शाम के चार बज चुके थे.डॉक्टरनी घर ना जा के वो जंगल की तरफ निकली, उसे ये पता लगाना था,की रात को जहाँ गयी थी सच में वहाँ कोई झोपड़ी या घर है या नहीं,रास्ते में ये सोच कर परेशांन हो रही थी कि वो रात में कहाँ गई थी I करीब एक घंटा हो चूका था चलते चलते आखिर वो जंगल पहुँची और पहचाने की कोशिश  करने लगी की वो जीप कहाँ रुकी थी,ये सोचते सोचते वो जंगल के बहुत अन्दर पहुँच गयी I तभी उसे एक झोपड़ी दिखी.डॉक्टरनी ने नीचे जमींन देखी तो चकित हो गयी देखी की जीप के टायर के निशान थे, डॉक्टरनी मन ही मन बोली रात में मैं यही आई थी चलो उस झोपड़ी में कोई हैं तो पूछता हूँ I झोपड़ी के अंदर एक दाढ़ी वाले बाबा बैठे हुए थे, डॉक्टरनी कुछ बोलती...

उससे पहले बाबा बोले तुम जिसकी खोज कर रही हो.. 

     “वह यही जगह है”

    ये सुनते ही डॉक्टरनी चकित हो गयी,हिम्मत जुटा के बोली बाबा आप कौन हो,वो बोले...

     मैं वही आदमी हूँ जो तुम्हे रात को यहाँ ले आये थे..ये सुनते ही डॉक्टरनी कांप गयी और बोली ठीक हैं मैं चलती हूँ.बाबा बोले रुको इधर आओ...डॉक्टरनी जी...बोलिए बाबा..

   बाबा बोले तुम कल यही आई थी,और ये बात कभी भी मरते दम तक किसी को मत बताना,अगर तुम किसी को बताई तो वो दिन तुम्हारा आखरी दिन होगा I ये बात हमेशा अपने दिमाग में रखना और आप तो एक बहुत अच्छी डॉक्टर हो “आपका उपकार  हम कभी नहीं भुलेगे”

   ठीक है मैं चलती हूँ,ये बोल कर डॉक्टरनी तेज कदमो से चलने लगी I किसी तरह भागते भागते जंगल से बाहर निकलीदिन ढल चूका था, डॉक्टरनी घर पहुंची.इसी तरह दिन बीतता गया,गाँव की सेवा करती रही.कई साल कई महीने बीतते गये.एक दिन अचानक से डॉक्टरनी के पास एक तार आया ”उसमे लिखा था की माँ की तबियत बहुत ख़राब है, आप जल्दी आओ माँ बहुत बीमार है अस्पताल में भर्ती करना होगा”

डॉक्टरनी ने प्रधानजी को एक चिट्टी दे के गाँव से चली गयी अपने माँ को देखने.

    गाँव वालो  को जब पता चला की डॉक्टरनी यहाँ से चली गयी तो सब परेशांन हो गये I प्रधानजी के पास गये बोले हमारे गाँव में कोई डॉक्टर नहीं हैं,आप कोई व्यवस्था कर दीजिये.प्रधानंजी बोले ठीक हैं मैं चिकित्सा अधिकारी को चिट्टी भेजता हूँ.इसी तरह कई महीना बीत चूका था I अचानक से गाँव में एक डॉक्टरनी आई. प्रधानंजी ने उनको उसी झोंपड़ी में रहने की व्यवस्था कर दी, डॉक्टरनी वही रहने लगी.

    उधर पुरानी डॉक्टरनी अपने घर पहुंची, उनकी माँ की हालत बहुत ख़राब थी माँ को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा.माँ की हालत दिन प्रतिदिन और बिगड़ता गया,डॉक्टर ने कहा अब आपकी माँ को सिर्फ भगवान ही बचा सकता है 

“प्रार्थना कीजिये”      

   डॉक्टरनी बहुत रोने लगी,अब क्या करूँ माँ को कैसे बचाऊ तभी उसे “शाल” की याद आई जो वो आदमी ने जंगल में दी थी, “शाल” निकली और अपने उपर ओढ़ ली अब ये सोचने लगी माँ को बचा सकती हूँ क्या इस “शाल” से हिम्मत झुटा के डॉक्टरनी ने आंख बंद और हाथ जोड़ कर बोली मेरी माँ को ठीक कर दो और आंख बंद कर बैठी रही.तभी माँ की आवाज़ आई..  

   “बेटा तुम आ गयी हो” ये सुनते ही डॉक्टरनी चमक कर उठी, माँ को देख कर आँखों में आंसू आ गया,बोली माँ कैसी हो, माँ बोली मैं तो एकदम ठीक हूँ.. तुम कैसी हो बेटा, मैं ठीक हूँ माँ...

   डॉक्टरनी ने उस आदमी का हाथ जोड़ कर धन्यवाद किया जिसने उसे “शाल” दिया था, और मन ही मन मुस्कुरा रही थी...


"रात" पार्ट ५...समाप्त..

  नया मोड़ आया...

      अचानक से गाँव में बिजली की कड़कने की आवाज़ और भयानक तेज बारिश शुरू हो गयी, गांववाले बहुत परेशान हो गये, की अचानक से इतनी तेज बारिश और बिजली कड़कने की आवाज़ क्यों हो रही हैं.चारो तरफ अंधेरा और बारिश झमाझमा हो रही थी लोग परेशान हो कर अपने अपने घर में दुबक गये...   

वही बरसात की रात...

      रात करीब एक दो बज़े की बात हैं,अचानक से दरवाजे की कुण्डी बाहर से कोई जोर जोर से बजा रहा था I डॉक्टरनी की नींद इतनी तेज थी,की उसे कुछ सुनाई नहीं दे रही थी I लेकिन कुण्डी कोई बाहर से जोर जोर से बजाये जा रहा था I मगर अन्दर से कोई आवाज़ नहीं आई,काफी देर से कुण्डी बाहर से लगातार बजाये जा रहा था I तभी अचानक से डॉक्टरनी की नींद खुली और चीख कर बोली “कौन है बाहर” और इतनी रात को क्या काम आ गया हैं,जो कुण्डी इतनी जोर जोर कर बजा रहे हो कोई आवाज़ नहीं आई बाहर से बस कुण्डी बजाये जा रहा था I फिर डॉक्टरनी ने चीख कर बोली “कौन है बाहर” जवाब दो..फिर बोली कौन हैं,इतनी रात को I डॉक्टरनी सोच रही हैं की कौन हो सकता हैं,इतनी रात को वो भी इतनी ख़राब मौसम में डॉक्टरनी साहेब ने फिर बोली    “कौन है बाहर”

      कुछ दे बाद शांत होने के बाद बाहर से एक बड़ी प्यारी और सहमी सी आवाज़ आई..

      “मैं हूँ”  डॉक्टरनी जी दरवाजा खोलो..

डॉक्टरनी बोली क्या काम हैं बताओ इतनी रात को क्या काम आ गया हैं..

      “वो आदमी फिर बोला डॉक्टरनी जी दरवाजा खोला”

डॉक्टरनी फिर बोली क्या काम हैं...बताओ इतनी रात को क्या काम आ गया

“वो आदमी बोला मेरी पत्नी की हालत बहुत ख़राब हैं वो दर्द से तड़प रही हैं”

      आप दरवाज़ा खोलो..”मेरे साथ चलो उसे देख लो”

डॉक्टरनी बोली इतनी बारिश में कैसे जाउंगी, बाहर बहुत अंधेरा है कल सुबह आना..

    वो आदमी बोला ऐसा मत करो डॉक्टरनी जी कृपया मेरे साथ चलो मैं जीप गाड़ी ले के आया हूँ..

     आपको कोई दिक्कत नहीं होगा और मैं आपको घर भी छोड़ दूंगा..

     कृपा चलो डॉक्टरनी जी...

डॉक्टरनी बोली अभी मैं नहीं जा सकती हूँ, तुम कल सुबह आना,बारिश में मैं कही भी नहीं जाउंगी “तुम जाओ “

    वो आदमी बहुत मिन्नतें किया मगर डॉक्टरनी ने दरवाजा नहीं खोली 

  वो आदमी बोला ठीक है “आप नहीं आओगी मेरे साथ देख लो बहुत पछताओगी”

डॉक्टरनी बोली जा जा कहाँ से आ जाते हैं रात को और बोल रहा हैं, पछताओगी..”जाओ यहाँ से”

   इस बहस में सुबह के साढ़े तीन बज गए, आखिर दरवाजा नहीं खुला..और फिर वो आदमी बोला जा रहा हूँ, मगर याद रखना मुझे..

         अगर जिन्दा रही तो..बोल के चला गया..

     सुबह हो चुकी थी, बारिश भी बंद हो गयी थी, सूरज पूरी तरह खिल चूका था,लोग अस्पताल में डॉक्टरनी का इंतजार कर रहे थे, मगर वो आई नहीं I गांववाले ने हरिया को बोला जाओ डॉक्टरनी को ले के आओ I हरिया गया और झोपड़ी का कुण्डी जोर जोर से बजाया मगर अंदर से कोई आवाज़ नहीं आई I हरिया ने लगातार कुण्डी जोर जोर से बजाया मगर दरवाजा नहीं खुला I गाँववालो की भीड़ जमा होने लगी, हरिया बोला दरवाजा तो अन्दर से नहीं खोल रही हैं I फिर सभी ने प्रधानजी को बुलाया और झोपड़ी का दरवाजा तोड़ दिया और जब अंदर का “दृश्य” देखा तो सब चकित हो गया डॉक्टरनी की शरीर देख कर सब यही बोले..

“ये कैसे हो गया”  

“ये कैसे हो गया”

“आप कही भी रहो,आपकी हमेशा किसी ना किसी को जरुरत है”

            इसलिए अपना फर्ज हमेशा ईमानदारी से निभाओ...  

                                                                         कहानी समाप्त  


blog : Badal Goswami

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