"रात" पार्ट ३..



"रात"पार्ट ३ ..


 मौसम ने ली करवट ..

       प्रधानजी ने दुसरे दिन सुबह को चिकित्सा अधिकारी को फ़ोन किये, सर घर तैयार हो गया हैं I आप डॉक्टर को भेज दीजिये I चिकित्सा अधिकारी ने कहा देखिये प्रधानजी हम लोग अच्छी डॉक्टर को भेज रहे हैं, मगर कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए I प्रधानंजी बोले कोई शिकायत नहीं आएगा सर I गाँव वाले बड़े भोले भाले और समझदार है I आप चिंता मत करो, चिकित्सा अधिकारी बोले ठीक है, कल एक महिला डॉक्टर को भेजा रहा हू, वो सुबह आ जाएँगी I ये बोल के चिकित्सा अधिकारी ने फ़ोन रख दिए I प्रधानंजी ने गाँव वालो को अपने घर बुलावा भेजा I सभी गाँव वाले प्रधानंजी के घर पहुचें I प्रधानंजी अपने झूले में बैठ कर हुक्का पी रहे थे I उन्होंने गाँव वाले को बोले आ गए सब लोग, हमारे गाँव में एक महिला डॉक्टर आ रही है कल चिकित्सा अधिकारी ने कहा की उनको किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए, कोई भी काम बोले तो काम कर देना I वो शहर से आ रही है, अच्छी डॉक्टर है आप लोग थोड़ा ध्यान रखना ठीक है सब लोग समाज गए, जी मालिक हम लोग उनको कोई दिक्कत नहीं होने देंगे I प्रधानजी बोले ठीक हैं, जाओ तुम लोग I सभी गाँव वाले वहां से चले गए I गाँव वाले आपस में बातें कर रहे है, की चलो आखिर हमारे गाँव में एक डॉक्टर तो आ गया अब ठीक है, अगर गाँव में किसी की तबीयत ख़राब होगी तो चिंता की बात नहीं है, इलाज भी होगा दवा भी मिल जायेगा I गाँव के हर घर के लोग बहुत खुश थे, सब लोग बस यही इंतजार थी की कब सुबह होगी I लोगों को रात में नींद नहीं आ रहा था I आखिर सुबह हो गयी, लोग बहुत ख़ुशी से सुबह जागे, नई सुबह की खुशुबू आने लगी I उन्होंने भगवन का नाम लिया और बाहर निकले.....   

      सुबह का वक़्त था, मौसम अच्छा था, चिड़िया चहक रही थी, सूर्य की सुबह की लालिमा दिख रही थी I गाँव के लोग अपने काम काज सुबह का कर के अपने अपने काम पर जा रहे थे I लोगों के मन में एक बात थी की शाम को जब लौटेंगे काम से तो डॉक्टर साहिबा से मुलाकात करेंगे I

      दोपहर के बारह बज रहे थे, तभी एक कार प्रधानजी के घर के सामने रुकी गाड़ी से एक महिला उतरी प्रधानजी समझ गए थे, की ये डॉक्टरनी साहिबा ही हो सकती है I वो आ के प्रधानजी को नमस्ते किये और बोली मुझे चिकित्सा अधिकारी ने भेजा हैं I प्रधानंजी बोले हा हा आपका स्वागत है, हमारे गाँव में पधारिये I फिर बहुत सारी बातें हुई खाना पीना हुआ I प्रधानजी बोले चलिए मैं आपको रहने की व्यवस्था करता हूँ I डॉक्टरनी साहेबा को ले के झोपड़ी के पास पहुचें I अच्छा यहाँ मेरे रहने की व्यवस्था की हैप्रधानंजी बोले हा जी डॉक्टरनी साहेबा गाँव के कुछ लोग भी वहाँ पहुंचें हुए थे I प्रधानंजी बोले किसी तरह की दिक्कत हो तो हमें ख़बर कीजियेगा I अब मैं चलता हूँ, कह कर वो चले गए I

       शाम हो गयी थी डॉक्टरनी साहेब ने अपने घर को ठीक ठाक से सजा लिए थे I तभी गाँव के कुछ लोग वहाँ आये और बोले नमस्ते डॉक्टरनी जी कैसी हो, वो बोली ठीक है आप लोग कैसे हो I गाँव वाले बोले हम लोग सब ठीक है और बताये गाँव में सब ठीक है गाँव वाले बोले  हा जी सब ठीक है I आप आ गयी है अब हमारे गाँव में कोई भी बीमार नहीं रहेगा गाँव में चिकित्सालय भी बन गया और आप भी आ गयी है, अब सब ठीक होगा गाँव में, डॉक्टरनी बोली अगर किसी तरह की परेशानी या दिक्कत हो तो मुझे बताना मैं या तो घर में मिलूंगी या फिर चिकित्सालय में मिलूंगी I अब आप लोग जाओ अपने घर रात बहुत हो गयी हैं I

      सुबह हुई चिकित्सालय में काफी भीड़ लगी थी, लोग अपना इलाज के लिए आये हुए थे I लोग बहुत खुश थे, अब गाँव में एक अच्छी डॉक्टर है,अब कोई बीमार नहीं रहेगा गाँव वाले आपस में बात कर रहे थे I समय बीतता गया लोगों की जीवन ठीक चल रहा था I गाँव में कोई उत्सव होता डॉक्टरनी साहेब भी रहती थी, मतलब कहने को की गाँव में ख़ुशी आ गयी, पहले जैसा गाँव नहीं था I               

अब कहानी में एक किरदार...

        गाँव का माहौल बहुत अच्छा था, चहल पहल थी लोग अपने काम काज ठीक से कर रहे थे I चिकित्सालय भी बहुत अच्छा चल रहा था I डॉक्टरनी  इतनी अच्छी है की गाँव वाले उन्हें बहुत प्यार करते थे क्योंकि वह सभी के सुख दुःख में काम आती थी व्यव्हार भी काफी अच्छी थी डॉक्टरनी जी की इसके वजह से गांव वाले उन्हें बहुत चाहते थे I गाँव में कोई भी बीमार नहीं होता, उनकी इलाज इतनी अच्छी थी I इस तरह समय बीत रहा थाI

        एक दिन सुबह अचानक से ही मौसम बहुत ख़राब हो गया I आसमान में काले काले बादल छाये हुए थे, वारिस भी हो रही थी, हवा भी चल रही थी बिजली कड़कने की आवाज़ भी कभी कभी आ रही थी I चिकित्सालय में वारिश की पानी टपक रहा था, लोग कम आ रहे थे I डॉक्टरनी चिकित्सालय का काम कर के अपने घर को निकली I किसी तरह अपने घर को पहुँचीं, वारिश की वजह थोड़ी देर हो गयी थी और खाना खा  के सो गयी I थकी हांरी सारा दिन का काम और मौसम ठंडा होने की वजह से डॉक्टरनी को जल्दी नींद आ गयी I

रात २ बजे..

रात करीब एक दो बजे की बात हैं,अचानक से कमरे की कुण्डी बाहर से कोई जोर जोर से बजा रहा था I डॉक्टरनी की नींद इतनी तेज थी,की उसे कुछ सुनाई नहीं दे रही थी I लेकिन कुण्डी कोई बाहर से जोर जोर से बजाये जा रहा था I आखिर डॉक्टरनी साहेब की नींद खुली और हरबरा के बोली,

                    कौन हैं.. कोई जबाव नही आया...

                    फिर बोली कौन हैं, इतनी रात को..

डॉक्टरनी सोच रही हैं की कौन हो सकता हैं, इतनी रात को वो भी इतनी ख़राब मौसम में डॉक्टरनी साहेब ने

                    फिर बोली कौन है भाई..

तभी बाहर से एक बड़ी प्यारी और सहमी सी आवाज़ आई डॉक्टरनी जी मैं हूँ I

                    डॉक्टरनी बोली खोलती हूँ.. रुको जरा..

वो उठ कर दरवाजा खोलने गयी हाथ में लालटेन ले के I डॉक्टरनी ने जब दरवाजा खोला तो सामने वाले को देख कर चकित रह गयी और देखते ही रही I


"रात" पार्ट ४ जल्द..

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