"रात" पार्ट २..

                                                                      

"रात" पार्ट २.. 

       

अब कहानी का असली मोड़..

          सुबह हुईगाँव के सभी लोग अपने अपने काम पर जाने को तैयार हो रहे थे I रास्ते में जाते वक़्त गाँव वाले ने देखा की चिकित्सालय के बाहर सन्नाटा थाकुछ लोगो ने आपस में बात करने लगे चलो देख के आते है,चिकित्सालय में कोई है या नहीं I गांव वाले ने देखा की डॉक्टर और नर्स नहीं है,सिर्फ कम्पाउण्डर बैठा हैउन्होंने कम्पाउण्डर से पूछा की डॉक्टर साहिबा कहाँ हैकम्पाउण्डर ने कहा वो लोग तो रात में ही चले गए और अभी तक नहीं आये है I गाँव वाले ने कहा कोई बात नहीं आ जायेगेशहर से आते है ना थोड़ा समय लगेगा I ये कह के लोग अपने काम पर जाने लगे I शाम हो गयी सभी गाँव के लोग काम से वापस जाने लगेतो कुछ लोग आपस में बात करने लगे चलो देख के आते है डॉक्टर साहिबा आये की नहीं I चिकित्सालय के अन्दर देखा की कोई नहीं हैंचिकित्सालय खाली पड़ा है I सब लोग परेशान हो गये तभी किसी ने कहा चलो चल के प्रधानजी को बताते है की चिकित्सालय में कोई नहीं हैं I 

        प्रधानजी के पास गाँव वाले पहुचें प्रधानजी बोले क्या हुआगाँव वाले बोले माई बाप चिकित्सालय में कोई भी नहीं हैचिकित्सालय सुनसान पड़ा है I प्रधानजी बोले नहीं ऐसा नहीं हो सकता I तुम लोग जाओ मैं बात करता हूँचिकित्सा अधिकारी से,ये बोल के प्रधानजी अंदर चले गए I गाँव के लोग भी अपने अपने घर की ओर निकल पड़े लोग यही सोच रहे थे की आखिर क्या बात हो गया की चिकित्सालय से डॉक्टर और नर्स चले गयेऔर दुसरे दिन भी आये नहीं I अभी अभी नया नया चिकित्सालय बना हैं I गाँव के लोगो में चिकित्सालय की उत्साह तो थीमगर कही ना कही नाराजगी भी थी I    

        सुबह हुई गाँव के लोग अपने अपने काम पर लग गए I कोई खेत में जा रहे है तो कोई मवेशियों को चारा दे रहे थे I इस प्रकार दोपहर हो गयेगाँव में सन्नाटा पसरा हुआ था जो कुछ लोग थे गाँव में वो परेशान थे की चिकित्सालय तो खुल गया I लेकिन दो दिन से कोई डॉक्टर और नर्स नहीं आ रहे है I इस प्रकार शाम हो गया लोग काम से वापिस आने लगे,सभी चिकित्सालय की ओर जा रहे थेकी देखूं तो क्या हो रहा हैं I तभी किसी ने कहा की प्रधानजी आ रहे हैंलोग चुप हो गए और एक दुसरे की शक्ल देखने लगे I प्रधानजी बोले घबराने की कोई जरूरत नहीं हैहमने चिकित्सा अधिकारी को फोने से सारी बात बता दी हैवो जल्दी ही कोई व्यवस्था कर देंगे I ये कह कर प्रधानजी चले गए I गाँव वाले अपने अपने घर को चले गए I उस रात में बिजली कड़कने की आवाज़ आ रही थी I लोग अपने अपने घर में दुबके हुए थेवारिश भी झमा झमा हो रही थी I सारे गाँव में सन्नाटा में पसरा हुआ था I     

         अगले दिन सुबह का समय थाकूछ लोग गाँव के चोंक की ओर जा रहे थे,तभी किसी ने पूछा भाई क्या हुआ तुम लोग कहाँ जा रहे हो I प्रधानजी ने चोंक पे सब गाँव वाले को बुलाया है,वही जा रहे है I चोंक पर प्रधानजी खड़े थे,उन्होंने कहा आप लोगो के गाँव में कोई डॉक्टर और नर्स नहीं आना चाहता हैक्योंकी यहाँ आने जाने और रहने की कोई साधन नहीं हैं I लेकिन आपलोग चाहते हो की कोई चिकित्सा के लिए रहे तो एक काम करना पढ़ेगा I आप लोग गाँव में एक कमरे की तलाश करो,जो की डॉक्टर या नर्स को रहने की व्यवस्था हो सके I तभी कोई आएगाचिकित्सा अधिकारी ने कहा ये प्रधानजी बोले I सारे गाँव वाले चुप हो गए,कहाँ से लाये कमरा डॉक्टर साहेव के लिए I

        इस तरह दो तीन दिन बीत गया,गाँव के लोगो को कुछ समझ नहीं आ रहा था I ऐसे करते करते दो चार दिन और बीत गया I कुछ लोग बीमार थे,गाँव में कोई उपचार के लिए डॉक्टर नहीं थे I चिकित्साल तो हैमगर डॉक्टर नहीं हैउद्घाटन के समय डॉक्टर,नर्स सभी थे,आज कोई इस गाँव में आना नहीं चाहते है I हमारी किस्मत ही ख़राब है अब भगवान ही मालिक I 

         अगले दिन सुबह गाँव वाले प्रधानंजी के पास गए I प्रधानंजी बोले क्या हुआ कुछ व्यवस्था हुआ सब ने कहा मालिक तभी प्रधानंजी बोले एक जना बोलो सब को बोलने की जरुरत नहीं है,ये हरिया तू बोल का बोल रहा है I हरिया बोला मालिक गाँव के उत्तर में कुआँ के पास एक झोपड़ी हैसो बहुत दिन से खाली पड़ा हैउसको मरम्मत कर दे तो उसमे डॉक्टर साहेब रह सकते है I बगल में कुआँ भी है पानी की कोई दिक्कत नहीं होगा I प्रधानंजी बोले ठीक है,सुनो उस झोपड़ी को ठीक करो मुनीम से बोले प्रधानंजी I गाँव वाले अपने अपने घर की ओर निकल गए I आज की सुबह लगता है की कुछ अच्छा काम होगामौसम से पता लग रहा था I अब झोपड़ी का काम प्रधानजी ने शुरू करावा दिए I कुछ मजदूर उस पुराने झोपड़ी को ठीक करने लगे I प्रधानंजी बोले शाम तक झोपड़ी बिलकुल नयी हो जानी चाहिए I जो भी सामान चाहिए मुंशी से बोल देना वो सब व्यवस्था कर देंगे I मजदूरों ने दिन भर काम कर के शाम को झोपड़ी तैयार कर दिए I प्रधानजी आये और बोले देख कर वाह बहुत अच्छा झोपड़ी तैयार किये हो शाबास अब डॉक्टर साहेब को रहने में कोई दिक्कत नही होगी I कल ही डॉक्टर को भेजने के लिए चिकित्सा अधिकारी को बोलता हूँ I गाँव वाले बहुत खुश हुएप्रधानजी ने कितना अच्छा काम किये है I


 "रात"पार्ट 3 जल्द..


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