बूट पॉलिश

कुछ मजबूरी कुछ जरुरत 
 
                               "कोई कितना कमा सकता हैं जूता पॉलिश कर" 
       बबलू अपने घर के लिए ये सब कर रहा हैं" हमारे देश का नाम जब कोई विदेश में अपने ही लोग लेते हैं तो कितना अच्छा लगता हैं,लगता हैं की हम अपने गाँव की माटी को आवाज दे रहे हैं और तभी एक भीनी सी खुशबू भी महसूस करते हैं की क्या खुशबू है लगता हैं देश मुझे बुला रहा हैं। हमारे देश के लोग बहुत ही भोले भाले और बिना उलझे हुए लोगों का देश हैं,कोई किसी को ज्यादा शक की नजरों से और पूछने के हिसाब से नहीं देखता हैं,सिर्फ एक बात हैं आप किसी की बुराई मत करो वो भी किसी की बुराई नहीं करते हैं I
हमारे देश में नारियों का सम्मान कुछ जगहों पर बहुत कम होती जा रही हैं इससे देश की नारियां आगे नहीं बढ़ पा रही हैं जो जहां हैं वही पर घुट रही हैं I 

    हमारे देश के अधिकतर लोग अपने घर को चलाने के लिए और दो वक्त की रोटी के लिए काफी जद्दोह जहद कर रहे हैं,कुछ लोग नौकरी करते हुए भी कुछ अतिरिक्त कमाने के लिए पसीना बहा रहे हैं,की घर और परिवार दोनों को ठीक से चला सकूं किसी चीज की कमी ना होने पाए ये अधिकतर घरों के जिम्मेदार लोगों में होता हैं। हमारे देश में बहुत से ऐसे लोग हैं जो सिर्फ घर जाते हैं छे घंटे सोने के और अपने बीबी बच्चों से मिलने,इनका सारा दिन काम करने में ही निकल जाता हैं I 

आज देश में इतनी महंगाई बदती जा रही हैं कि एक नौकरी से आप सिर्फ दो वक़्त की रोटी ही खिला सकते हो अपने परिवार को अगर लोग अतिरिक्त काम ना करे तो वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और ना अच्छी परवरिश दे सकते हैं,एक परिवार में माता पिता भाई बहन और छोटे छोटे बच्चें घर में होते हैं और कभी कभी कुछ घरों में कमाने वाला एक ही होता हैं सारा परिवार उसी पर आश्रित होते हैं "अब आप ही बताये की कोई करे तो क्या करे" अपने परिवार को ठीक से चलाने के लिए कुछ तो करना पड़ेगा I लेकिन आस पड़ोस के लोग ये सब देख कर ये बात जरुर करते हैं की फलाना बहुत पैसे कमा रहा हैं मगर जो कुछ पैसे कमाने के लिए और क्यों कमा रहे हैं वही बता सकता हैं,जब आप उससे मिलोगे उससे बात करोगे I 

   एक छोटा बच्चा जिसे अभी पढ़ने की उम्र और बच्चों के साथ खेल कूद मजा मस्ती करने का समय हैं इस बच्चा का दिनचर्या आप देखोगे तो दंग रह जाओगे,क्योंकी ये बच्चा अपने घर को चलाने के लिए क्या कर रहा हैं ये ना तो आप को पता होगा,ना ही मुझे मैं काफी दिनों से एक बच्चे को रास्ते में देख रहा हूँ वो एक लकड़ी का बक्सा कंधा में लटका के घूमता रहता हैं मुझे बहुत ताजुब हुआ I मुझे लगा ये बक्सा किसी को शायद देने जा रहा हो,

फिर एक दिन मैंने उससे पूछ ही लिया,जब इस बच्चे से बात करने के लिए उसके पास गया तो वो पहले तो मुझसे बात करना नहीं चाहा फिर मैंने ज़बरदस्ती बात की बोला बिस्कुट खाओगे तो उसने सीधे मुझे मना कर दिए और बोला नही मैं अपने घर से खाना खा के आया हूँ क्या खाये हो,बोला मम्मी ने रोटी बना के गयी थी वही खाया हूँ मुझे बहुत आश्चर्य हुआ फिर मैंने पूछा तुम्हारी मम्मी कहाँ हैं तो उसने बोला मम्मी पापा काम पे गए हैं कौन से काम करते हैं बोला वो मजदूरी करते हैं मुझे बहुत दुख हुआ,तुम्हारा नाम क्या हैं बोला बबलू कितने बजे मम्मी पापा काम पर जाते हैं बोला सुबह पांच बजे,क्योंकी सुबह सुबह जाने से काम देते हैं ठेकेदार, बिस्कुट खा लो तुम्हारे घर में और कौन कौन हैं बोला मम्मी पापा और मेरे से दो छोटे भाई बहन हैं पढाई नहीं करते हो बोला करता हूँ,दोपहर को २ बजे सरकारी स्कूल में पढ़ने जाता हूँ और शाम में ६ बजे घर वापिस आ जाता हूँ 

   रात बीत गई अब सुबह के पांच बज रहे थे माँ बाप काम पर निकलने से पहले अपने बच्चों के लिए रोटी बना कर रख गये और दोनों काम पर निकल गये I परिवार में माँ बाप और तीन बच्चें जिसमें सबसे छोटी बेटी जिसकी उम्र ६ से ७ साल और दूसरा लड़का ८ से ९ साल का होगा I लेकिन बबलू जो हैं वो सबसे बड़े भाई होने के नाते घर में वो दोनों भाई बहन को संभालता हैं मगर उसका भी एक कहानी हैं और बबलू की उम्र मात्र 12 साल हैं I 

माँ बाप के सुबह काम पर जाने के बाद वो सुबह नहा धो के दोनों भाई बहन को नास्ता जो उसकी माँ ने बनाये थे वो दोनों भाई बहन को सुखी रोटी और आचार खिला के और खुद भी खा के इन दोनों को अपने पड़ोसी के यहाँ मौसी के घर छोड़ कर खुद वही लकड़ी का बक्सा कन्धा में लटका के मोहल्ले में चाचा के लड़के के दुकान में जा कर उस लकड़ी के बक्सा में शू पॉलिश ब्लैक,रेड और सफ़ेद क्रीम और कुछ जूते में जीभ डालने वाला प्लास्टिक की पट्टी हाथ में ले कर निकल जाता हैं बाजार की तरफ I 

आप लोगों ने फिल्मों में देखा होगा बच्चें जूता पॉलिश करते है मगर ये एक हकीकत हैं 

  आप देखो अभी इस बच्चे की खेलने कूदने और पढ़ने की उम्र में काम करने के लिए निकल जाता हैं इसका भविष्य क्या होगा इसने तो अभी अपनी जिंदगी भी देखी नहीं की आगे इसका क्या होगा,क्या बनेगा चल दिया अपने राह पर ना जाने आगे क्या मिलेगा I इस बच्चे ने कभी ये नहीं सोचा की पढाई करने से क्या होता हैं क्यों की माँ बाप सारा जिन्दगी काम कर रहे हैं वो तो पैदा होने के बाद जब से होश संभाला होगा तो देखता होगा की माँ बाप तो सारा दिन काम में लगे रहते हैं मगर उसे ये नहीं मालूम की माँ बाप क्या काम करते हैं और जिस दिन जाना फिर उस दिन से वो और भी मजबूत हो गया की मेरी माँ और बाप इतना मजदूरी करते हैं हमारे परिवार को चलने के लिए दो वक़्त की रोटी के लिए,कितना मेहनत करना पड़ता हैं इन सब घर की स्थिति को देख कर उसने भी ठान लिया की मैं भी कुछ करूँगा और फिर लग गया काम करने कोई रोकने वाला नहीं था की ये काम मत करो पढाई करो I 
  बच्चे जो माँ बाप करते है उसी को देखकर उन्ही से सीखते हैं इसलिए कहते हैं बच्चे का संस्कार घर से ही शरू होता हैं जैसा माँ बाप करते हैं बच्चें भी वही करते हैं लेकिन माँ बाप क्या करते बच्चें को तो भूखा मार तो नहीं सकते हैं उन्हें जिन्दा रखने के किये कुछ तो करना पड़ेगा,आगे देखा जायेगा क्या होगा पहले बच्चे की भूख प्यास रहने की छत की व्यवस्था करनी जरुरी हैं ये सब सोच कर ही बबलू के माँ और बाप मजदूरी कर रहे हैं और काम तो कोई देगा नहीं गाँव से आने के बाद घर चलाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती हैं ये बहुत कम लोग कर पाते है I
मात्र 100 से 150 रूपये कमाने के लिए बचपन सड़कों पर गुजर रहा हैं...   
"इतनी छोटी उम्र में घर से बाहर जाना पैसे कमाना कितना कठिन हैं ये आप भी जानते हो हम भी जानते हैं,ना कोई पहचान की दुकान जिसमें कोई काम मिल सके,बस कमाना हैं कुछ घर के लिए,इनका भविष्य क्या हैं ये कोई नहीं जनता हैं"
   जब बबलू लकड़ी का बक्सा बजता हुआ बाजार की तरफ जाता हैं और लोगों से यही कहता भैया अपका जूता पॉलिश कर दूँ लोग देखते हैं छोटा सा बच्चा हैं अभी इसकी पढ़ने की उम्र हैं जूता पॉलिश कर रहा हैं लोग रास्ते में उससे पूछते स्कूल क्यों नहीं जाते हो मगर बबलू कुछ नहीं बोलता वो आगे चला जाता I लोगो को दया आ जाता हैं और कहते हैं ठीक हैं कर दो पॉलिश फिर बड़े प्यार से अपने छोटे छोटे हाथों से लकड़ी के बक्सा से पॉलिश निकलता और जूता पॉलिश करता,ये सब देख लोग बहुत भावुक हो जाते हैं कभी कभी कोई ज्यादा पैसे भी दे के जाते हैं कुछ लोग बोलते हैं खाना खायेगा और कुछ लोग तो ये भी बोलते हैं चल भाग यहाँ से पढ़ने लिखने के उम्र में जूता पॉलिश कर रहा हैं,मगर बबलू कुछ भी नहीं बोलता चुप रहता हैं फिर आगे चला जाता हैं,कभी किसी को कहता भैया आपके जूते में जीभ लगा दूँ इससे आपके जूते ठीक से आएगा मात्र २० रूपये दे देना I

इस तरह से वो सुबह के ८ से ९ बजे निकलता और दोपहर को घर लौट जाता हैं अब वो घर आ कर स्कूल जाता हैं की नहीं ये कोई नहीं बता सकता हैं मगर अभी से इस बच्चे की भविष्य क्या हैं कुछ पता नहीं सारा दिन सुबह से लेकर दोपहर तक इसी काम में घूमते रहना क्या कोई बच्चा स्कूल जाने के काबिल रहा जाता हैं ये सब देख और सुन के मन को बहुत पीरा होता हैं काश इस बच्चें के माँ बाप कुछ और काम  कर के बच्चों का पढाई लिखाई सही ढंग से करवा पाते तो कितना अच्छा होता I हम आप ज्यादा से ज्यादा उस गरीब माँ बाप के लिए क्या करते पैसे से सहायता करते नहीं तो स्कूल में बच्चे को दाखिला करवा देते और क्या करते I मगर फिर भी घर को चलाने के लिए माँ बाप को काम तो करना पड़ता ये हैं हमारे देश के गरीबों की हालात ये झुक जायेगे मगर किसी के आगे हाथ नहीं पसारेंगे और इज्जत से मजदूरी करके बच्चों की परवरिश बहुत से गरीब लोग कर रहे हैं और भगवान भी इनके साथ देते हैं I 
    ये हैं भारत के भविष्य ..जूतों पर पॉलिश कर रहे हैं...सब अपने अपने कर्म से खाते हैं और जीते हैं कोई किसी को कुछ नहीं देता,तक़दीर लिखने वाले वही सब कुछ देते हैं,चाहे वह गरीब हो या अमीर ,ऊपर वाले सब देख रहे हैं...

Blog : Badal Goswami
                                               ...OSR...


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