मोबाइल से दूर रखें

समय रहते सब ठीक करें..

      हमारा देश कितना सुंदर है चारों तरफ हरियाली नदी नहर झरने सुंदर सुंदर पेड़ पौधे सुंदर सुंदर जानवर सारे प्राकृतिक के चीज भरपूर हैं इसलिए भारत सबसे अलग देश हैं इसकी ख्याति दूर दूर तक फैली हुए हैं हमारे देश में बाहर से लोग घुमने और यहाँ की मनोरम दृश देखने आते हैं बाहर के पर्यटक खुश हो कर जाते हैं और दुवारा आयेंगे कह कर जाते हैं इसको बनाने वाले ने भी बहुत शिद्दत से बनाया होगा आप अगर सारे देश का भ्रमण करेंगे तो आपको हमारे देश से अच्छा और कोई देश नहीं लगेगा लेकिन अगर आप भ्रमण नहीं करोगे तो आप यही बोलोगे विदेश कितना अच्छा है 

      हमारे देश से अच्छा हैं हमारे देश के लोग भी बहुत अच्छा हैं सीधे साधे आप उन्हें जैसे ढालना चाहोगे वह वैसे ही ढल जायेंगे बहुत ही सीधे हैं भारत के लोग,इन्हें सिर्फ अपने काम से मतलब रहता हैं दो वक़्त की रोटी मिल जाये उसके लिए वह खेती काम धन्धे बहुत कुछ करने को तात्पर्य हो जाते हैं और गाँव से शहर और शहर से विदेश तक चले जाते हैं और अपने परिवार को बहुत खुश रखते हैं जैसे जैसे देश तरक्की कर रहा हैं वैसे वैसे लोग भी तरक्की कर रहे हैं पहले रेडियो और अख़बार के माध्यम से लोगों को बहुत सी जानकारी मिलती थी फिर टेलीविजन का समय आया लोग टेलीविजन के माध्यम से दूर दूर की ख़बरें मनोरंजन की चीजों से वाकिफ हुए कहने का मतलब देश रुका नहीं आगे बढ़ते गये और साथ ही लोग भी आगे बढ़ते गये,जैसे जैसे देश तरक्की की राह पर बढ़ते गये वैसे वैसे लोगों की जरुरत भी बढ़ता गया I आज लोगों की जरूरतें अनन्त इसकी कोई सीमा नहीं हैं आज इसकी जरुरत हो कल उसकी जरुरत मतलब जरूरत बढ़ती ही गयी,कभी जरूरत घटी नहीं ये बढ़ती ही जा रही हैं और इसी तरह देश भी आगे बढ़ता गया फिर डिजिटल का जमाना आया इस डिजिटल ज़माने में इतने इलेक्ट्रोनिक सामान आये की मत पूछिए एक दम भरमार हो गया मोबाइल,लैपटॉप,टेबलेट,घड़ी,कंप्यूटर आदि कई तरह की चीजें छा गयी I अब देश के हर एक के व्यक्ति के हाथ में कोई ना कोई गेजेट हैं,लोगों के पास एक से एक मोबाइल फ़ोन हैं जो काफी महंगी और लाजबाव देखने में हैं ये गेजेट,इतना टेक्नॉलोजी से लेस हैं की लोग घर बैठे ही सब काम कर रहे हैं और अच्छा पैसा कमा भी रहे हैं I 

आज से लगभग पचास साल पहले जब मोबाइल का जमाना आया तो बहुत ही कम लोगों के पास फ़ोन मोबाइल होता था एक्का दुक्का लोगों के पास मोबाइल फ़ोन होते थे वो भी बड़ा और लम्बा सा मोबाइल होता था और जिसके पास मोबाइल होता वह बहुत धनी लोग होते थे ऐसा आज से पचास साल पहले लोग समझते थे I 

      ३ अप्रैल १९७३ को पहला मोबाइल लांच हुआ था और इसका इंजीनियर मर्लिन कूपर और फ़ोन बनाने वाली कंपनी का नाम मोटोरोला था एन फ़ोन का वजन १.१०० किलोग्राम था I 

     हमारे देश में मोबाइल फ़ोन ३१ जुलाई १९९५ में शुरू हुआ था कंपनी का नाम नोकिया था,मोबाइल फ़ोन को आये ५० साल बीत चूका हैं और इसके आने से बहुत कुछ बदल भी गया हैं यह टेक्नोलोजी इतना आगे निकल गया की पूछों मत और इसको बढ़ावा बहुत बड़े बड़े कंपनी ने दिया और इसी के बदौलत आज देश दुनिया बहुत कुछ छोड़ आगे बढ़ चूका हैं I अब आप मोबाइल की ही बात ले ले आज हरेक १०० आदमी में से कम से कम ९९ लोगों के पास मोबाइल फ़ोन हैं और जो एक वह भी छोटी मोबाइल उपयोग कर रहा हैं मतलब मोबाइल सब के पास हैं किसी के पास कीमती तो किसी के पास सस्ती मोबाइल मगर हैं सब के पास,एक एक लोगों के पास तीन से चार मोबाइल ले के चलते हैं,क्योंकी उनका सारा काम मोबाइल से ही होता हैं लेकिन इसकी लत बहुत ही ख़राब हैं I 

    फ़ोन हमारे जीवन की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ कर रहा हैं संचार सम्बन्धी समस्या बहुत आयी हैं लोगों की बातचीत तो ख़त्म ही हो गया हैं सारा दिन मोबाइल में लगे रहते हैं मोबाइल के रेडियेशन से शरीर में नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा हैं,इससे डीएनए छतिग्रस्त हो रहा हैं ज्याद मोबाइल इस्तमाल करने से कई तरह की बीमारियाँ भी हो रही हैं I 

     आज कल जब बच्चे रोते हैं तो उनको चुप कराने के लिए कुछ ना कुछ देना पड़ता हैं माँ पाप बच्चों को मोबाइल या कोई इलेट्रोनिक गेजेट पकड़ा देते हैं इससे बच्चे तो शांत हो जाते हैं मगर वह कई घंटे स्कीन के सामने बिताने के बहुत बड़ी लत लगा लेते हैं इससे बच्चे की मानसिक विकास प्रभावित हो रही हैं बच्चे किसी के साथ घुलना मिलना नहीं चाहते हैं वह हमेशा डरा डरा रहता,क्योंकी उसके दिमाग में हमेशा जो मोबाइल में विडियो और चित्र देखते हैं वही घूमते रहता हैं वह हमेशा एकांत और खेल कूद में भाग नहीं लेना चाहते हैं बच्चे बहुत हल्ला करते हैं की मोबाइल दो तो खाना खाऊंगा नहीं तो भूखा रहूँगा बच्चों की जिद के आगे माँ पाप झुक जाते हैं और उसे मोबाइल दे देते हैं मगर ये गलत हैं कभी कभी आप देखोगे की घर के लोग अपने काम के चलते बच्चे को मोबाइल दे देते हैं और खुद कोई दूसरी काम करते रहते हैं आज कल के बच्चें समझ गए हैं की माँ पाप को कैसे मानना और जिद करने से मान जायेंगे और उसका फ़ायदा भी उठ रहे हैं I 

     अगर आप अपने बच्चें को मोबाइल की लत से बचाना चाहते हैं तो आज से ही माँ पाप को खुद अपनी गतिविधि बदलने पड़ेगी बच्चों को समझाये बच्चों से अच्छी अच्छी बातें करें उन्हें बाहर ले जाये उसके साथ खेलें उसको समय दे और सबसे बड़ी बात बच्चें क्या कहना चाहते हैं उनकी बात बहुत ही सुकून से सुने और अमल करें I 

    आज कल मोबाइल,टीवी,टेबलेट,कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक गेजेट से बच्चों को वर्चुअल आटिज्म का शिकार बना रहे हैं,

कृपा सावधान हो जाये..पहले ज़माने में मोबाइल,टीवी,टेबलेट और कंप्यूटर कुछ भी नहीं था उस समय बच्चों को सुलाने के लिए नाना नानी कहानियां सुनते थे माँ लोरियां गा के बच्चें को सुलाते थे बच्चे को माँ पाप समय देते थे जैसे जैसे देश प्रगति करते गये और डिजिटल होते गये सब की दिन चर्या और पुरानी सभी चीजें लोग भूलते जा रहे हैं ऐसा बिलकुल ही ना करें,बच्चों के आँखों में चश्मा,बच्चों को पढ़ाई में परेशानी,मोबाइल के लिए जिद करना,खाना ठीक से नहीं करना,स्कूल जाने से मना करना ये सारी मोबाइल की रेडियेशन के चलते उनका हेल्थ और जीवन ख़राब हो रहा हैं ..

समय रहते सब ठीक करें 

"नहीं तो माँ पाप को ही आगे भुगतना पड़ेगा इस मुसीबत से"


Blog : Badal Goswami

                     

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