कुर्सी
हमारे देश में कुर्सी कब आई और इसको क्यों बनाया गया था कुर्सी की अहमियत कितनी हैं इसमे बैठने वाला अपने आप को कैसा महसूस करता है ये तो वही बता सकता हैं जो उस कुर्सी में बैठा हैं चाहे वह नेता हो या अभिनेता या एक बच्चा वो खुद ही बोलेगा की यह कुर्सी उसके लिए कितना अहमियत रखता हैंऔर वह उस कुर्सी को क्यों नहीं छोड़ना चाहता हैं I
कुर्सी किसी ने शुरुआत में बनाया नहीं था मिस्र के लोगो ने 2680 ईसा पूर्व जब कब्रों की खुदाई की तो उन्हें एक अजीब सी एक्स आकार की कोई चीज मिली उस समय लोगों को कुछ समझ नहीं आया की यह हैं क्या चीज,फिर कुछ समय बाद रोमन साम्राज्य के कुछ अलग अलग हिस्सों में जहाँ भी कब्र थे वहाँ खुदाई हुई तो वहाँ से भी इसी तरह की एक्स आकर की चीज मिली फिर साफ़ सुथरा कर के लोगों ने बैठने के काम में लगाया उन्हें बहुत आरामदायक लगा और अपने उपयोग में लगाने लगे ये एक्स आकर की चीज बाद में कुर्सी के नाम से प्रसिद्ध हो गया आप कह सकते हैं की कुर्सी का अविष्कार प्राचीन मिस्र के लोगों ने किया था I
"एडवर्ड प्रथम" के लिए जो कुर्सी बनी थी वो सबसे प्रसिद्ध और बहुत पुरानी और बहुत ही आरामदायक इसे आप अंग्रेजी कुर्सी भी कह सकते हैं इसे वास्तुशिल्प और ओक लकड़ी और सोने से बनाये जाती थी I
माइकल थोनेट जर्मन आस्ट्रेलियाई फर्नीचर निर्माता वियना कुर्सी के अविष्कार 1830 के दशक में इनकी कुर्सी विश्वविख्यात निर्माता के रूप में विख्यात हैं इन्होनें ने ही शिल्प को ऊधांग में बदला
थॉमस ई.वॉटेन ने सेंट्रीपेटना स्प्रिंग आर्मचेयर की अविष्कार किया I
जॉन क्रैम ने फोल्डिंग कुर्सी का अविष्कार 1855 किया था I
कुर्सी कई तरह के होते हैं,घुमने वाली उच्च गुणवता वाला कुर्सी,आरामदायक रोलिंग कुर्सी,प्लास्टिक की कुर्सी,PM की कुर्सी,CM की कुर्सी कितने तरह की कुर्सीयाँ हैं लिखते लिखते और बताते बताते थक जायेंगें I मगर कुर्सी तो कुर्सी हैं चाहे लकड़ी की हो या प्लास्टिक की बैठने के ही काम आते हैं कुर्सी को लोग जान से लगा के रखते हैं राजनितिक पार्टी तो कुर्सी को छोड़ना ही नहीं चाहते चाहे कुछ भी हो जाये I
कुर्सी ले लो...
एक कुर्सी वाला सुबह सुबह अपने साइकिल में कुछ आठ दस को कुर्सियाँ बांध कर निकल जाते हैं बेचने के लिए और आवाज़ लगाते कुर्सी ले लो सस्ती और टिकाऊ कुर्सी कभी इस गली तो कभी उस गली कभी इस नुक्कर तो कभी चौक पर घूमते रहते हैं लोगों को कुर्सी की महत्व समझ नहीं आता हैं मगर कुर्सी बेचने वाले बहुत महत्व देते हैं कोई खरीदेगा तो उसमें आराम से बैठेगा नाना,नानी,दादा,दादी छोटे बच्चे या नौजवान सभी को आराम देते हैं I मगर यही कुर्सी जो एक साइकिल वाला या मोटर साइकिल वाला बेच रहा हैं उसका कोई महत्व नहीं हैं I
यही कुर्सी अगर राजनीतिक पार्टी में हो चाहे वह कुर्सी लकड़ी की या प्लास्टिक की इसके लिए काफी जद्दो जहद करते हैं बैठने के लिए और जो इस कुर्सी पर बैठेगा राज उसी की होगी चाहे PM की कुर्सी हो या CM की कुर्सी यहाँ पर कुर्सी का महत्व बिलकुल ऊपर चला जाता हैं उसे कोई छू नहीं सकता I मैंने कुर्सी बेचने वाले साहेब से बात की हाँ कुर्सी बेचने वाले को साहेब ही तो बोलेंगे क्योंकी वह किसी की भी किस्मत बदल सकता हैं कुर्सी की जो बात हैं,कुर्सी वाला बोला भईया सुबह से शाम तक काफी घुमने पर चार पांच कुर्सी बिकती हैं उसी से घर की रोजी रोटी चल रही हैं बहुत ज्यादा फ़ायदा नहीं हैं कुर्सी बेचना मज़बूरी हैं कोई काम धंधा नहीं मिलने के कारण कुर्सी बेच रहा हूँ हमलोग थोक में कुर्सी ले लेते हैं और सालों भर कुर्सी बेचते हैं ये घर में रखे रखे ख़राब भी नहीं होता हैं,थोड़ा साफ़ सुथरा कर के बेचने निकल जाते हैं,यही हमारी रोजो रोटी हैं इसी से घर चल रहा हैं घर में माँ बापू बीबी और दो बच्चे है सभी की खर्चा इसी कुर्सी से चल तरह हैं I
"देश भी कुर्सी से ही चल रहा हैं"
मगर लोगों को कुर्सी का महत्व समझ नहीं आ रहा हैं एक बार कुर्सी जिसके हाथ लग गयी फिर वह किसी की भी नहीं सुनाता वह अपनी मनमानी करता जाता हैं अभी कुर्सी की बहुत मारा मारी चल रहा हैं कुछ लोग अपनी कुर्सी बचाने के लिए कितने झूट लोगों से बोलते हैं वादा करते हैं मगर एक बर कुर्सी पर बैठ जाने के बाद फिर वह किसी की भी नहीं सुनते अपनी मनमानी करते हैं कुर्सी चीज ही ऐसी हैं की कही पाने की इच्छा रहती हैं तो कही कुर्सी छीनने की डर रहता हैं चाहे उसके लिए कुछ भी करना पड़े I लड़ाई कुर्सी की हैं जो कभी ख़त्म नहीं होगी यह चलता ही रहेगा हमेशा,यह हैं कुर्सी का खेल बच्चे बूढ़े नोजवान नेता अभिनेता सभी को कुर्सी बड़ी प्यारी लगती हैं आप देख रहे हो अभी देश में कुर्सी के लिए कितना पापड़ बेलना पड़ रहा हैं और तो और एक नेता दुसरे नेता की कुर्सी छिनने के लिए काफी हद तक जा रहे हैं हिन्दू मुस्लिम किसी भी धर्म को नहीं छोड़ रहे हैं कुर्सी के लिए इसको आगे करो कुर्सी के लिए उसको आगे करो इस कुर्सी ने लोगों को गतिहीन कर दिया हैं काम करना नहीं चाहते सिर्फ कुर्सी चाहिए अभी चुनाव का माहौल हैं सभी अपनी कुर्सी बचाने के लिए और कुर्सी पाने के लिए इसके आगे हाथ जोड़ रहे हैं तो कोई बड़े बड़े नेता सुप्रीमो के आगे पीछे कर रहे हैं बस एक बारी कुर्सी में बैठने के लायक हो जाये फिर देखो कैसे काम करते हैं I
!! कुर्सी तो कुर्सी हैं चाहे लकड़ी की हो या प्लास्टिक की !!
Blog : Badal Goswami
...OSR...

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