अस्पताल
डॉक्टरनी जी सुई दे दीजिये मेरे बीबी को..
यह कहानी करीब ४० साल पुरानी एक सरकारी अस्पताल की हैं,यह बिहार के गंगा नदी के पास स्थित हैं यह अस्पताल एक चिकित्सा महाविधालय भी हैं यह बहुत बड़े क्षेत्रफल में विकसित हैं और यह भारत के चिकित्सा विद्यालयों में एक हैं इसकी चर्चा देश के हर कोने में हैं ये काफी चर्चित अस्पताल हैं इस अस्पताल में सबसे ज्यादा मरीज देखे जाते हैं इसमे हर इलाज के अलग अलग विभाग हैं I इस अस्पताल में करीब दो हजार से लेकर तकरीबन तीन हजार मरीजों के बिस्तरों वाला अस्पताल हैं I
लोग इस अस्पताल के बारे में कुछ अनसुनी कहानीयां बताते हूँ सुन के हैरान हो जाएंगे I रमेश की बहन नर्सिंग की कोर्स कर रही थी काफी पढ़ी लिखी लड़की थी मेट्रिक में अच्छा नंबर से पास की थी कॉलेज में भी अच्छी नंबर लायी थी उसके घर वाले ने बहुत कहा की कोई और कोर्स कर लो मगर वो बोली नहीं मुझे नर्सिंग की ही पढ़ाई करनी हैं बहुत हट्टी थी एक बार जो सोच लेती वही करके मानती,घर वाले भी क्या करते चलो ठीक हैं जो उसको पसंद हैं करने दो I ये बात हैं आज से ४० साल पहले की उस समय नर्सिंग की कोर्स बहुत कम होती थी मतलब ना के बराबर मगर सरकारी में नौकरी करनी हैं तो पढ़ाई की प्रमाणपत्र तो चाहिए I पहले तो आप किसी भी अस्पताल में दाखिला हो जाओ फिर एक महीना नर्स के साथ काम करो थोड़ा सीख लो फिर कोई नर्सिंग डिग्री की जरुर नहीं पड़ती I मगर (कल्याणी) को सरकारी अस्पताल में काम करनी हैं I
काफी समय बीत गया (कल्याणी) नर्सिंग की कोर्स कर रही थी और घर की भी देख भाल कर रही थी कुछ दिनों बाद उसकी शादी हुई,गाँव में थोड़ी जल्दी शादी हो जाती हैं मगर पढ़ाई नहीं छोड़ी पति भी अच्छा था बोला नर्सिंग की कोर्स कर रही हो इसे पूरा करो,करीब दो साल बाद परीक्षा हुआ वह पास हो गयी I फिर उनका ट्रेनिंग हुआ ट्रेनिंग भी कर ली अब उनकी प्रविष्टी धनबाद सरकारी अस्पताल में हुआ I यहाँ काफी दिनों तक नर्सिंग की काम करती रही समय बिताता गया,फिर प्रविष्टी पटना के हाजीपुर गाँव में सरकारी अस्पताल में हुआ लगातार काम करती रही I उनको एक सुंदर सी बेटी हुई उसका देख भाल करना उसका ध्यान रखना पति पत्नी बहुत परेशान होने लगे क्योंकी बच्ची छोटी होने की वजह से परेशान होने लगी I फिर पति पत्नी ने किसी तरह तबादला सरकारी अस्पताल में करवाया क्योंकी ये लोग उसी गांव के रहने वाले थे I इनकी ड्यूटी अस्पताल सुबह और रात की लगती थी ..
एक दिन की बात हैं इनकी ड्यूटी रात की शिफ्ट वाली लगी उस दिन सुबह से ही मौसम बहुत ख़राब था हल्की हल्की वारिस हो रही थी इनकी ड्यूटी रात १० बजे से लेकर सुबह ६ बजे तक की थी I रात में खाना खा कर पति मोटर साइकिल से अस्पताल छोड़ने पहुंचे तो कल्याणी बोली पति से तुम मुझे ना मेरे ड्यूटी रूम तक छोड़ दो बहुत अंधेरा हैं पति बोला ठीक हैं चलो छोड़ देता हूँ इनकी ड्यूटी डिलीवेरी वार्ड में थी वो वार्ड था तीसरी मंजिल पर और रास्ते में बहुत सारे विभाग आते हैं I जब अस्पताल के अंदर की ओर चले तो किसी वार्ड में एक मरीज तो किसी वार्ड में दो चार मरीज तो किसी में एक भी नहीं और जैसे जैसे सीढ़ियों से तीसरे मंजिल की और जा रहे थे किसी मंजिल में पानी के टैंक लिक होने की वजह से पानी गिराने की आवाज़ बहुत तेज हो रही थी पति अंदर से बहुत डरा हुआ था और मन ही सोच रहा था की मैं तो इसे छोड़ दूंगा मगर मैं कैसे नीचे तक पहुचूँगा ये सोच कर बहुत घबरा रहा था पति किसी तरह कल्याणी को उसके वार्ड में छोड़ कर कल्याणी से बोला अब मैं जाता हूँ रात बहुत हो रही हैं तुम अपना ध्यान रखना तभी कल्याणी बोली सुनो जाते वक्त कोई आवाज़ दे पीछे से तो रुकना नहीं और पीछे मुड़ कर देखना नहीं इस अस्पताल में आये दिन मरीजों की मौत होते रहते हैं तुम सीधा घर जाओ और ६ बजे सुबह आ जाना मुझे लेने के लिये I पति किसी तरह हनुमानजी का नाम ले के निकल पड़ा पीछे से बहुत तरह की आवाज़ आ रही थी मगर वो रुका नहीं और अस्पताल से बाहर आ कर सांस ली फिर मोटर साइकिल स्टार्ट कर घर के लिए रवाना हो गया I
जब वो अपने ड्यूटी रूम में गयी तो वहाँ कोई भी नहीं था वो अकेली बैठी रही,ड्यूटी रूम वो दो वार्डों के बीच में था बायीं ओर फेमिलीप्लानिंग वार्ड और दायीं ओर डिलीवरी वार्ड था मतलब नर्स दोनों तरफ की मरीजो को देख सकता है कुछ देर बाद एक नर्स आई और बोली मेरी ड्यूटी ख़त्म हो गयी आप चार्ज ले लो मौसम ठीक नहीं हैं मैं जल्दी निकलूंगी,ठीक हैं आप दे दो बताओ दोनों वार्ड के बारे में वो बायीं वाली वार्ड में कोई मरीज नहीं हैं वो वार्ड खाली है मैं ताला लगा दिया हूँ चाभी खिड़की के पास रख दिया हूँ अगर कोई इमरजेंसी मरीज आये तो खोल देना हैं दायीं वाली डिलीवरी वार्ड में सभी मरीजों को मैंने दवा दे दिया हूँ रात में कुछ जरूरत हो तो देना हाँ आज एक मरीज की मौत हो गयी उसके परिजन बहुत हंगामा किये थे फिर वो चार्ज दे कर चली गयी I रूम से ही वार्ड में जाना होता हैं आपको पता ही होगा सरकारी अस्पताल कैसा होता हैं टुटा फुट जहाँ तहाँ से पानी टपकाना एक कमरे में नर्स और सफाईवाली को साथ रहना पड़ता हैं तभी सफाईवाली आंटी आई और बोली दीदी आप आ गई हो चलो बिस्तर लगाती हूँ आज एक ही वार्ड में मरीज हैं सुकून हैं दीदी आओ थोड़ी देर सो जाओ ना जाने कब मरीज के आदमी को क्या जरूरत पड़ जाये I
रात २.३० बजे..
दोनों सो गये नींद काफी गहरी थी तभी अचानक से रात २-३० बजे कोई दरवाजा खटका रहा था धीरे धीरे और खिड़की के पास खड़ा बोल रहा था,डॉक्टरनीजी उठों मेरे मरीज को दवाई दे दो और ये बार बार एक ही बात बोलता जा रहा था डॉक्टरनीजी उठों मेरे मरीज को दवाई दे दो तभी अचानक से सफाईवाली आंटी की नींद खुली और बोली क्या हुआ हैं तुम्हारे मरीज को,मगर कोई आवाज़ नहीं आई तो सफाईवाली ने धीरे से नर्स दीदी को उठाने की कोशिश करने लगी..
दीदी उठों देखो क्या हैं ये..
वो उठी और बोली क्या हुआ..
सफाईवाली आंटी बोली दीदी देखो खिड़की में..
कल्याणी बोली क्या हैं सफाईवाली आंटी बोली दीदी फेमिलीप्लानिंग वार्ड में तो ताला लगा है,मगर वार्ड में पूरी रौशनी हैं और पूरी वार्ड में मरीजों से भरा हैं और साथ में एक एक उसका आदमी भी हैं,कल्याणी बोली क्या बात करती हो ये वार्ड तो खाली हैं रुको मैं देखती हूँ वो बिस्तर से उठी और खिड़की के पास गयी देखी सच में मरीजों से भरा हैं और उसका आदमी भी साथ में हैं और दूसरी डिलीवरी वार्ड में सारे मरीज सो रहे थे और दरवाजा भी खुला हैं वो घबरा गयी,इधर सफाईवाली की हालत ख़राब डर से वो हनुमान चलिसा पढ़ने लगी मगर कल्याणी बहुत हिम्मत वाली लड़की हैं वो डर तो रही थी मगर हिम्मत से काम कर रही थी कल्याणी हिम्मत झुटा के खिड़की के पास जा कर बोली...
ये इधर आओ तुम्हारा मरीज का नाम क्या हैं ?
कुछ नहीं बोला सर झुका के बैठा रहा..
फिर बोली कब भर्ती हुई तम्हारी ?
सर झुका के बैठा था वो बोला अभी भर्ती हुआ हूँ ..
फिर हिम्मत झुटा के पूछी मरीज को क्या हुआ हैं ?
वो बोला कुछ बोल नहीं रही हैं आप अंदर आ कर सुई दे दो ठीक हो जाएगी..
तभी सफाईवाली बोली दीदी ताला मत खोलना ये तुम्हें बहका रहे हैं ये सब मरे हुए मरीज हैं इनकी आत्मा भटक रही हैं आप इससे ज्यादा बात मत करो नहीं तो ये आपको अपने बस में कर लेगा दीदी नीचे बैठो जल्दी, कल्याणी कुछ समझ नहीं सकी फिर सफाईवाली आंटी उसे जोड़ से नीचे की ओर खीचं कर बैठा दिया I दीदी ये हनुमान चलिसा पढ़ो और चुप रहो, दोनों बहुत घवराये हुए थे क्या करे कुछ समझ नहीं आ रहा था I तभी फिर से वही खाली वार्ड से वो काला सा आदमी खिड़की के पास आ के बोल रहा हैं I
डॉक्टरनी जी मेरे मरीज को सुई दे दो उसे बहुत दर्द हो रहा हैं डॉक्टरनीजी दरवाजा खोलो..
दरवाजा खोलो डॉक्टरनीजी वो दरवाजा बजा रहा था..
वो दरवाजा जिसमे ताला लगा हुआ था और कई दिनों से उस वार्ड में कोई मरीज की दाखिला नहीं हुआ सुनसान पड़ा था I दोनों की हालत बहुत ख़राब हो रही थी डर से,सोच रही की किसी तरह सुबह जल्दी हो और यहाँ से भागे
खाली वार्ड के वो काला सा आदमी खिड़की के पास खड़ा था और वही बात बार बार बोल रहा था I
दरवाजा खोलो डॉक्टरनीजी..दरवाजा खोलो डॉक्टरनीजी..दरवाजा खोलो डॉक्टरनीजी I
दोनों की हालत डर से बहुत ख़राब थी दोनों हनुमान चलिसा पढ़ रही थी कल्याणी और सफाईवाली को कब नींद की झपकी लग गयी और अचानक से बगल के डिलीवरी वार्ड से किसी ने आवाज़ लगाया डॉक्टरनीजी सुबह हो गयी हैं मेरे मरीज को दवा दे दो,दो तीन बार आवाज़ और दरवाजा बजाया I फिर थोड़ी देर बाद कल्याणी की आखं खुली और झट से उसने सफाईवाली को धीरे से आवाज़ लगायी आंटी उठो देखो आवाज़ लगा रहा हैं सफाईवाली उठी और देखी कौन से रूम से आवाज़ आ रही हैं देखी ये आवाज तो डिलीवरी वार्ड से आ रही हैं फिर नज़र दुसरे खाली वार्ड को देखी वो वार्ड में ताला लगा था और वार्ड पूरी तरह अँधेरा था I सफाईवाली ने अपनी कलाई की घड़ी को देखी और बोली दीदी उठो सुबह के ६ बज चुके हैं मरीज को दवा देनी हैं और सुबह की ड्यूटी वाली दीदी आने वाली हैं I कल्याणी उठी और डिलीवरी वार्ड के मरीज के लोगों से बात की और सभी मरीज को सुबह की दवा दी सब से हाल चाल पूछी आप लोग सब ठीक हो रात को नींद ठीक आई मरीज के लोगों ने बोला सिस्टर सब ठीक हैं और अच्छा से पत्नी सोयी कोई तकलीफ नहीं हुई I कल्याणी कुछ नहीं बोली वार्ड से अपने ड्यूटी रूम में आ गयी थोड़ी देर बाद सुबह की चार्ज लेने सिस्टर आई बोली गुड मोर्निंग कल्याणी सब ठीक हैं ना कोई दिक्कत तो नहीं हुई रात को मरीजों ने परेशान तो नहीं किया वो बोली नहीं सब ठीक हैं आप चार्ज ले लो इसके बाद सफाईवाली और कल्याणी अस्पताल से बाहर निकल गयी तभी सफाईवाली बोली दीदी आपने कामिनी को बताया नहीं रात में क्या हुआ था कल्याणी बोली कोई जरुरत नहीं बोलने से पता नहीं वो भी डर जाये तभी सफाईवाली बोली दीदी वो खाली वार्ड में ना सभी भुत थे अगर आप दरवाजा खोलते ना तो हम दोनों को वो आत्मा मार देती I ठीक हैं अब घर जाओ और रात को समय से ड्यूटी आ जाना फिर दोनों अपने अपने घर की ओर रवाना हो गये I
रात दूसरी घटना..
दुसरे दिन कल्याणी ड्यूटी के लिए तैयार हो रही थी तभी पति ने एक सवाल किया,अच्छा कल्याणी एक बात बताओ तुम्हें रात की ड्यूटी में डर नहीं लगता, चारों तरफ सन्नाटा कल्याणी बोली अरे तुम तो बहुत डरते हो Iअस्पताल हैं लोगों की मौत होते रहती हैं इतना डरने की जरुरत नहीं हैं चलो मुझे अस्पताल छोड़ दो पति बोला ठीक हैं चलो लेकिन कल्याणी अंदर ही अंदर बहुत डरी हुई थी और मन ही मन सोच रही थी की पता नहीं आज रात में क्या होगा I फिर वही पानी के टपकने की आवाज़ सन्नाटा और अंधेरा किसी तरह कल्याणी को ड्यूटी रूम तक पहुँचाने के बाद पति बोला कल्याणी कल गुरुवार हैं थोड़ा अस्पताल के पार्क से फूल लेते आना पूजा करनी हैं कल्याणी बोली ठीक हैं I कुछ देर बाद सफाईवाली आंटी आ गयी आते ही बोली दीदी कैसी हो कल्याणी बोली ठीक हूँ तुम कैसी हो मैं भी ठीक हूँ पता नहीं आज रात में क्या होगा कल्याणी बोली चुप रे कोई मरीज के आदमी सुनेगा ना तो मरीज को ले के दुसरे वार्ड में चला जायेगा I अच्छा सुनो मुझे ना सुबह को थोड़ा फूल चाहिए घर में पूजा हैं सुबह को जल्दी उठ कर पार्क से फूल तोड़ लेंगे जल्दी जगा देना सफाईवाली आंटी बोली अरे दीदी मैं तो खुद ही गहरी नींद में सोती हूँ,आप उठा देना कल्याणी बोली ठीक हैं चलो मरीज को इंजेक्शन और दवा दे आती हूँ सोने का वक़्त हो गया मरीज का सारा काम निपटने के बाद दोनों सो गए I
रात में अचानक ही कल्याणी की नींद खुल गयी और आंटी को उठाने लगी चलो फूल तोड़ने जाना हैं सारे फूल कोई और तोड़ लेगा,आंटी उठी बोली चलो दीदी दोनों अस्पताल के नीचे पार्क में पहुंचे ,कल्याणी बोली आंटी आप उधर से फूल तोड़ो मैं इधर से फूल तोड़ता हूँ जल्दी हो जायेगा आंटी बोली ठीक हैं दोनों दो तरफ से फूल तोड़ने लगे रात बहुत अँधेरी थी और पूरा अस्पताल में सन्नाटा छाया हुआ था I दोनों फूल तोड़ रहे थे कल्याणी अपने हाथ में एक प्लास्टिक की पन्नी में फूल तोड़ के रख रही थी तभी देखी की फूल की पन्नी थैला में कोई और फूल तोड़ कर उसके पन्नी में डाल रहा था वो ध्यान नहीं दी और फूल तोड़ने में व्यस्त थी कुछ देर बाद पन्नी में बहुत सारा फूल जमा हो गया तभी वो बोली आंटी कितना फूल तोड़ रही हो पन्नी भर गया हैं चलो अब I तभी आंटी बोली दीदी मैं तो इधर हूँ मेरे पास मेरी पन्नी हैं कल्याणी बोली तो यहाँ मेरे पन्नी में कौन फूल डाल रहा हैं आंटी पूरी बात नहीं सुनी कल्याणी ने हिम्मत झुटा के मन में सोची देखती हूँ कौन फूल डाल रहा हैं वो फूल तोड़ने के बहाने हाथ को ऊपर की ओर और नज़र निचे पन्नी पर थी देखा की फूल के पेड़ के अंदर से एक हाथ बाहर आया और पन्नी में फूल डाला और गायब हो गया यह नज़ारा देख कल्याणी ने धीरे से बोली आंटी जल्दी चलो यहाँ से आंटी बोली क्या हुआ कल्याणी बोली आप पहले यहाँ से चलो फिर कल्याणी गिरते परते अस्पताल की ओर भागी आंटी बोली बताओगी भी क्या हुआ कल्याणी बोली पहले ऊपर चलो ड्यूटी रूम में पहुँच कर कल्याणी बोली आंटी घड़ी मैं कितना समय हो रहा हैं बताओ,आंटी बोली एक मिनट रुको घड़ी निकाल कर देखी तो होश उड़ गई कल्याणी बोली क्या हुआ आंटी कितना समय हो रहा हैं तभी आंटी बहुत धीमी आवाज़ में बोली रात के ३ बज रहे हैं ये सुनते ही कल्याणी के होश उड़ गये और बोली हम २.३० बजे रात को फूल तोड़ने गये थे आंटी बोली क्या हुआ इतनी डरी क्यों हो फिर कल्याणी ने सारी बात बताई की उसके साथ क्या हुआ इतना सुनते ही आंटी बोली कल्याणी तुम्हें किसने जगाया कल्याणी बोली किसी ने मेरे कानों में बोला की फूल तोड़ने चलो बस मैं उठ कर आपको जगाया मगर घड़ी में समय नहीं देखा फिर क्या दोनों रात भर हनुमान जी की नाम ले के बिताया I फिर सुबह हुई दूसरी सिस्टर आई और बोली कल्याणी कैसी हो रात में कोई दिक्कत तो नहीं हुई,कल्याणी की वही जवाब नहीं कोई दिक्कत नहीं हुई सिस्टर बोली ठीक हैं आप चार्ज दे दो मुझे I फिर कल्याणी और सफाईवाली घर के लिए निकले तभी सफाईवाली आंटी बोली दीदी..
"ये तो हमारे पीछे ही पड़ गया हैं क्या करे हमलोग" कल्याणी का एक ही जवाब डरो नहीं वो हमें कुछ नहीं करेगा जिस दिन उनकी आत्मा को शांति मिल जायेगा,फिर कभी परेशान नहीं करेगा और अस्पताल में ये सब होते रहता हैं I
इस तरह कल्याणी काम कर रही हैं और रोज कोई ना कोई घटना हो रही हैं मगर कल्याणी डरने वाली लड़की नहीं हैं अपना काम बिंदास किये जा रही है,...
Blog : Badal Goswami
...OSR...

very good ,story mai dam hai.
जवाब देंहटाएंधन्यवाद सर..
जवाब देंहटाएं