रोटी
"रोटी की रोना भी अजीब हैं जिसको सबसे ज्यादा जरूरत हैं उसे ही नहीं मिलती "
हमारा देश कृषि प्रधान देश हैं हमारे यहाँ सभी जाति के लोग रहते हैं सभी की भाषा भी अलग अलग तरह की हैं सभी के पहनावा भी अलग अलग हैं कितना सुंदर लगता हैं जब सभी को अलग अलग पोशाक में देखते हैं I लेकिन कृषि प्रधान देश होने के बावजूद भी लाखों लोगों को खाने को पर्याप्त अनाज नहीं मिल पाता हैं और उसकी वजह से लाखों लोग भूखे रह जाते हैं ये सारे अनाज जमाखोर या तो जमा कर के रखते है और अनाज की मूल्य जब बाजार में बढ़ जाती हैं तब ये जमाखोर अनाज को बाजार में बेचते हैं इसकी बजह से अधिकतर अनाज गोदामों में या तो सड़ जाते हैं या ऊँची दामो में बाजार से खरीदना पढ़ता हैं और ऊँची दाम में कुछ लोग खरीद नहीं पाते,वो हैं गरीब ये हैं हमारे देश के अनाज की हाल.
इसी अनाज से रोटी बनती हैं,रोटी की बात सुनते ही .
मन में ख्याल आता हैं,वह क्या हैं ?
रोटी का नाम सुनते ही कई तरह के रोटी की फोटो हमारे दिमाग में आता हैं अगर कोई मांगता हैं तो होटल से,रेहरी से या घर से तो लगता हैं की कोई खाने के लिए बैठा हैं या किसी के लिए रोटी ले जाना हैं वह रोटी का इंतजार कर रहा हैं भूखा हैं,
मगर रोटी के कई रूप हैं “रोटी अगर कोई गरीब खा रहा हैं तो उसका महत्व दुसरे के लिए कम हो जाता हैं,और मगर किसी अमीर पैसें वाले रोटी खा रहा हैं तो उसके लिए महत्व ज्यादा हो जाता हैं” आप उस रोटी को देख कर यही कहेंगे की ये रोटी किसी अच्छे गेहूं या अच्छे आटे से बनी हैं I क्योंकी वह रोटी किसके हाथ में,एक अमीर पैसें वाले के हाथ में वो रोटी खा रहा हैं मगर वही रोटी अगर किसी गरीब को खाते या हाथ में देखते हैं तो मन में यही आता हैं की वह गरीब बहुत भूखा हैं उसको सबसे ज्यादा जरुरत हैं रोटी की..हमलोगों की फिदरत ही कुछ ऐसी हो गयी हैं की हम किसी भी चीज वस्तु का मूल्यांकन तुरंत कर देते हैं एक मिनट का भी समय नहीं देते उस पर प्रतिक्रिया तुरंत कर देते हैं गरीब रोटी खा रहा तो हमलोग सोचेंगे की ये कही से मांग कर लाया या किसी ने उसे दिया होगा या कचरे से उठा कर लाया होगा,मगर रोटी की भी किस्मत देखिये कभी सड़को के किनारे गिरा हुआ मिलेगा या किसी गाय को खिला रहा होगा या किसी कुत्ते को खिला रहा हैं और वह भी ज़बरदस्ती अगर वह नहीं खाता हैं तो उस जानवर के सामने फेंक कर लोग चले जाते हैं I मगर जिसको रोटी की बहुत ज्यादा जरूरत हैं उसे नहीं मिलता पाता हैं और वही जानता या बता सकता हैं की रोटी की असली कीमत किसके लिए क्या हैं I चलिए आपलोगों को एक सच्ची कहानी सुनाता हूँ आज से १० साल पहले की घटना हैं एक बार मैं किसी काम से सरकारी दफ्तर में गया हुआ था बहुत दिनों से मेरा काम लटका पड़ा था एक दस्तावेज निकलवाना था और उसके बिना मैं नौकरी में आवेदन नहीं कर पा रहा था ये काम मेरे लिए बहुत जरुरी था काफी दिनों से सोच रहा था की आज जाऊंगा कल जाऊंगा ऐसे करते करते बहुत दिनों से काम लटका पड़ा था और जब भी जाता थातो कभी बड़ा बाबु छुट्टी में तो कभी दफ्तर बंद रहता था I मेरा काम इतना जरुरी हो गया था की वह दिन मेरे लिए एक सबक बन गया मैं सुबह सुबह निकल पड़ा सरकारी दफ्तर की ओर जल्द बाजी में पैसे ले जाना भूल गया था,
सिर्फ मोबाइल लेके चल दिये,जेब में कितने पैसे हैं मुझे मालूम नहीं था I आज कल तो डिजिटल का जमाना हो गया हैं I आपके पास मोबाइल हैं तो आपको जेब में पैसे रखने की जरुरत नहीं क्योंकी दुनिया अब डिजिटल हो गया हैं आप पैसे की लेन देन बड़ी आसानी से मोबाइल से कर सकते हैं मैं तो मोबाइल ले के चल दिये मगर उस समय सभी के पास डिजिटल की व्यवस्था नहीं थी I जब मैं उस सरकारी दफ्तर में गया अपना काम करवाने के लिए इधर उधर भटकना पड़ रहा था,कभी इस टेबल के बड़े बाबु के पास जाओ तो कभी उस टेबल पर इसी तरह सरकारी दफ्तर में चक्कर काट रहा था I आपलोगों को तो पता ही होगा की सरकारी काम में कितना समय लगता हैं,सरकारी काम करवाना इतना आसन नहीं था I अपना काम करवाते करवाते काफी समय हो गया था I शाम के ६ बज गए थे मैं बहुत परेशान हो गया था,एक तो सारा दिन भूखे प्यासे उस दफ्तर में चक्कर काट रहा था और शाम के ६ भी बज चुके थे मुझे भूख भी काफी तेज लग रहा था सोचा कुछ खाने को मिल जाये तो बहुत अच्छा होगा तभी मुझे ख्याल आया की पत्नी ने कहा था की चार रोटी बांध देता हूँ,भूख लगे तो खा लेना मगर मैं कहाँ उसकी बात सुनने वाला जल्द बाजी के चक्कर में खाना लेने से मना कर दिया था,उसी की सजा मिली मुझे लगता हैं I मेरे जेब में कितना पैसा हैं मुझे नहीं मालूम था,भूख इतनी तेज लगी हुई थी की उस दफ्तर में चपरासी के पास गया और उससे पुछा भाई यहाँ कोई केंटिन हैं जहाँ कुछ खाने को मिल जाये तो चपरासी ने कहा सबसे नीचे के बेसमेंट में एक केंटिन हैं देखो शायद कुछ मिल जाये खाने को,मैं भागा भागा बेसमेंट में पहुंचा I शाम के ६ बज रहे थे मैंने केंटिन के काउंटर में गया I एक सज्जन कुछ हिसाब किताब कर रहे थे,मैंने उनसे पूछा भैया कुछ खाने को मिलेगा पहले तो सुना नहीं फिर मेरी ओर देख कर बोला हाँ मिलेगा "रोटी दाल" खाना हैं मैंने बोला और कुछ नहीं मिलेगा सब्जी,दाल,चावल तो उन्होंने कहा केंटिन अभी बंद होने वाला हैं I यही बचा हैं,मैंने बोला ठीक हैं दाल रोटी दे दो फिर उन्होंने मेरी तरफ देख कर कहा एक नान रोटी २५ रूपये की हैं कितना रोटी देना हैं बताओ मैंने बोला एक मिनट फिर मैंने अपना जेब देखा तो जेब में २० रूपये पड़ा था,बहुत परेशान हुआ की अब क्या करूँ,पैसे तो पूरा नहीं हैं एक रोटी की भी,तभी वह काउंटर में बैठा सज्जन ने कहा चाहिए तो बताओ मैंने बोला भैया मेरे पास २० रूपये हैं पैसे लाना भूल गया जल्द बाजी में क्या २० रूपये में एक नाना रोटी दे सकते हैं तो उन्होंने मेरी ओर देख कर कहा ये कोई सब्जी की दुकान नहीं हैं जो २० रूपये की मांग रहे हो नहीं दे सकता,फिर मैं मायूस हो कर बगल हट गया और सोचने लगा I अगर घर से निकलते वक़्त जेब देख लिया होता तो शायद भूखा नहीं रहना पड़ता और पत्नी की बात भी नहीं मानी वो रोटी दे रही थी जल्द बाजी के चक्कर में आज भूखें रहना पड़ा I थोड़ी देर तक सोचता रहा फिर एक खाली कुर्सी में जा कर बैठ गया तभी देखा की दो व्यक्ति ने नान रोटी और दाल की आर्डर दिये थोड़ी देर बाद दाल रोटी उसके टेबल पर आ गया और खाने लगे तभी एक ने कहा यार ये दाल रोटी मुझसे नहीं खाया जायेगा तुम खाओ और बेटर को बोला ये ले जाओ और बिल ले के आओ,तभी मैंने देखा की उस टेबल में जो दो व्यक्ति बैठे थे वह नान रोटी छोड़ कर उठ गए और बेटर उस थाली में सारे जुठें डाल रहा था I जिसमें नान रोटी और दाल थी फिर मैंने उन दोनों व्यक्ति से कहा भाई साहेब ये रोटी क्यों छोड़ दी आपने खाये क्यों नहीं,इस पर वह गुस्से से बोला तू कौन हैं भाई और मैं खाऊ या ना खाऊ तू बोलने वाला कौन हैं मैंने बोला आपको अगर नहीं खाना था तो ना लेते मगर ऐसे थोड़ी प्लेट में छोड़ी जाती हैं,आपको नहीं खाना तो इस रोटी को पैक करवा कर किसी गरीब को दे सकते हैं कम से कम उस गरीब की तो पेट भरेगा I इस बात पर वह भाई साहेब मेरे पर बहुत गुस्सा करने लगा और बोले जाओ यहाँ से बड़े हितेशी बन रहे हैं गरीबों के लिये I
ये सुन कर मैं कुछ बोला नहीं बेटर उस थाली में दो रोटी के उपर सारा टेबल की जूठा डाल कर ले जा रहा था,मैंने उसका एक फोटो ले लिया मुझे बहुत ख़राब और मन ही मन बक बक कर रहा था की मेरे पास ५ रूपये कम था तो रोटी नहीं मिली और यहाँ रोटी कैसे कचरे में जा रहा हैं I फिर उस सरकारी दफ्तर से सारा काम निपटा कर घर के लिए चल दिये रात हो गयी थी और मन में सिर्फ एक ही बात घूम रहा था की लोगों के पास पैसे हैं तो रोटी की कीमत भूल गये,कैसे लोग हैं इस संसार में जो रोटी की कीमत नहीं जानते घर जा कर मैंने पत्नी को सारी बात बताया तो वो बोली ठीक हुआ तुम्हारे साथ ऐसा ही होना चाहिए,पत्नी की बात नहीं मानी मुहं उठा के चल दिये सरकारी दफ्तर में काम करवाने I
रोटी की किस्मत
एक किसान गेहूं,बाजरा,ज्वार आदि जो भी उपजाते हैं उसके लिए उन्हें कितना खून पसीना बहाना पड़ता हैं दिन रात एक कर देते हैं अनाज उपजाने में तब जा कर मुहं के निवाला पैदा होता हैं I अब इस बात को लोगों को हम तो नहीं समझा सकते क्योंकी आज कल के लोगों के पास बहुत पैसे हैं और बहुत पढ़े लिखे भी,उनको समझाने जाओ तो चार बातें आपको बोलेंगे I
आज भी दुनिया के गरीब देशों में ८३ करोड़ लोग रोज भूख के मारे बिलखते सोते हैं,ये तो पुरे दुनिया का हाल हैं गरीबों को कोई नहीं पूछते की खाना खाये की नहीं इसी भूख के मारे कितने तो रात में ही अपनी जान से हाथ धो देते हैं I इनकी सुबह फिर कभी नहीं होती ये सडकों पर पैदा होते और सड़को पर ही अपनी जिंदगी ख़त्म कर देते हैं भूख से,क्योंकी इनको देखने वाले कोई नहीं है I सरकार भी कोई कदम नहीं उठाती की ये बेचारे को दो वक़्त की रोटी दे सके हाँ,कुछ अमीर लोग इनकी बहुत सहायता करते हैं इन्हें अपने पार्टी या घर के खाना पैक कर इन्हें देते हैं जो ये नहीं खा पाते,कहे तो बचा हुआ खाना और भूखें के लिए वह खाना अमृत के समान होता हैं क्या करे बेचारे गरीब आखिर ये हमारे तरह इन्सान हैं इनपर भी ध्यान देना चाहिए I
आपको पता हैं,हमारा देश भारत में रोज १९ करोड़ लोग रात में भूखें सोते हैं इनकी सुध बुध कोई नहीं लेने वाला रात का खाना इनके नसीब नहीं होता और ये भूखे सोने पर मजबूर होते हैं बस ये कल की सोच में जीते हैं की कल तो कुछ ठीक हो जायेगा I मगर इनका ये कल कभी नहीं आता मन को सिर्फ तस्सली देते रहते हैं और हम कहते हैं की दुनिया विकसित और विकासशील देश हो रहा हैं इसी विकासशील देश में करोड़ों टन खाधान्न बर्बाद होता हैं हर रोज I
रोटी एक गरीब के हाथ में हो तो इसका मतलब कुछ और होता हैं वह रोटी उस गरीब के भूख मिटाने और पेट भरने की सबसे जरुरी जरुरत हैं I यही रोटी एक पैसे वाले के हाथ में हो तो मतलब कुछ और या तो वह रोटी खायेगा या अपने प्लेट में ही छोड़ देगा जो कचरे में जायेगा या जानवर को मिलेगा I ये हम नहीं बोल सकते मगर गरीब को अगर पेट भर भी जायेगा तो वह वो बचा हुआ रोटी सुबह के लिए रख देगा वह फेकेंगा नहीं क्योंकी कल किसने देखा हैं शायद कल रोटी मिलेगा या नहीं..
"रोटी की किस्मत भी अजीब हैं जिसको सबसे ज्यादा जरूरत हैं उसे ही नहीं मिलती"
Blog : Badal Goswami
...osr...

very nicely written.
जवाब देंहटाएंhttps://www.shootingmitra.com/
जवाब देंहटाएंRoti ka Apne Ek Bahut Achha Arth Diya Hai.
जवाब देंहटाएंआप लोगों का धन्यवाद सर..सदा प्यार बनाए रखियेगा..
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