उपहार
"आपका प्यार सच्चा और पवित्र हैं "
भारतवर्ष एक बहुत बड़ा देश हैं यहाँ भिन्न भिन्न तरह के लोग रहते है और अपनी जीवन जीने के लिए बहुत कुछ कर रहे है आइये आपको एक सच्ची कहानी सुनाता हूँ शायद आपको पसंद आये..
सुबह ६ बजे अलार्म बजें चाय,नास्ता पानी कर
के घर से "वाहे गुरूजी" के नाम लेके निकल गये, स्कूटर पर किक पे किक मारे जा रहे
हैं.उस समय के सबसे जाने माने स्कूटर vespa जो शायद नाम
आपको मालूम होगा.रोज मरे की सफ़र हो गयी शुरू काम कुछ खास नहीं हैं.बस खिलोनों की बिज़नस हैं,कभी हमलोग खिलोनें बन जाते कभी लोगों के हाथ में हम
खिलोनें पकड़ा देते.चले जाते भीड़ भाड़ में और कभी रत्नाल के गलियों में कहीं शोर तो
कहीं सन्नाटा ऐसा ही बिज़नस का हाल.कभी
मुनाफा तो कभी घाटा सफ़र जारी हैं.जहाँ एक ही नारा “रुकना नहीं थमना नहीं आगे बढ़ते
जाना”
फिर एक दिन किसी के बातों बातों में एक
मन्नत मिल गया.जहाँ खुद की कंपनी उस का नाम और उसमें मेहनत.. मेहनत का फल तो हमेशा
मीठा होता और उसी फल के नाम से रख लिया अपने कम्पनी का नाम Strawberry अब इस Strawberry को हम खुद खायें
या बेचें ये बात की बात हैं.लेकिन जो कला हम किसी से ना सीखें कभी बस अपने आप ही
निखर के आये हैं,उस सफ़र का नाम मैं जरुर रखना चाहूँगा “Strawberry Hub” महीने की तीन सौ रूपये
के भाड़े में एक गैराज मिला वहाँ पे बच्चों के छोटे मोटे Flash Cards एक आध Sensory band कुछ Hang zone Activity इस तरह बच्चों के शिक्षा के केंद्र बिन्दुं रखते
हुये,अपने गिराज में एक Workshop खड़ा किया अब उसी
सामानों के साथ भिन्नं भिन्नं स्कूलों में घुमते थे.अपने रामप्यारी के साथ (Vespa स्कूटर) कहीं आशा के दीप जलें तो कहीं
निराशा,पर मूल मंत्र तो हमें पता ही था की “रुकना नहीं थकना नहीं आगे बढ़ते जाना“
एक
दिन एक स्कूल में सामने बैठीं हुई मैडम के पास गये उनसे विनती किये की हमारे पास
कुछ बच्चों के शिक्षा को ध्यान में रखते हुये कुछ चीजों को प्रदर्शित करना हैं अगर
आप उसका अनुमति दिला दे तो..
इतने दिनों में इतने सालों में किसी पे
इतना भरोसा नहीं हुआ इनके अन्दर एक अदभुत सकारात्मक उर्जा थी मुझे लग ही रहा
था.यहाँ मेरी बिजनस जमेगी और वाके में जम गया.एक मोटी आर्डर मिल गया मुझे,साथ ही
साथ एक सखी,उस समय फ़ोन का मतलब PCO मेरे पास एक किराने वाले का PCO नंबर था वही से हमारी
बिज़नस और लव-स्टोरी चालू हो गयी.
कुछ सालों के बाद हमारे
माताजी और पिताजी ने वाहे गुरूजी के आशीर्वाद से चार हाथ एक कर दिये.साल भर में
श्रुति आई फिर दो के बाद शिल्की आई दोनों बेटियों को जन्म दे के वो अपनी परछाईं को
छोड़ कर परलोक चली गयी.इस सदमे से उभरने के लिए काफी समय बिता.उन मासूम बच्चियों के
मासूम सवालों से परेशान ना होकर आगे बढ़ते जाना था,वाहे गुरूजी के कृपा से अपनी जिम्मेदारी
और फ़र्ज़ इस दोनों के कशमकश में जी रहे थे,अब श्रुति की पांच साल के जन्म दिन मनाने
के समय आ गये,उसने जन्मदिन में ऐसे तोहफा मांग लिया,मैं हैरान परेशान हो गया.मगर सफ़र
अभी जारी हैं वही ६ बजे सुबह उठना अपने चाय के साथ बच्चों के नास्ता स्कूल भेंजना
और ये नयी जिम्मेवारी जुड़ गये.
इस जीवन के उतार चढ़ाव में बिज़नस का भी थोड़ा ऊपर नीचे हुआ,कर्ज भी हो गया,दुनियादारी में फिर एक Phone Call आया Hello Strawberry Hub हमारे स्कूल के लिए कुछ सामान की जरुरत हैं
कितने Discount में सामान दे सकते हैं
और Catlock भेंज दीजिये.
”पता नहीं उस आवाज में
अजीब कशिश थी”
Catlock की सारी Details तो मैं Phone के जरिये भी भेंज सकता था,लेकिन पता नहीं क्यों सारी Catlock और Details उनसे रूबरू होकर दूँ,उठा लिया अपना Portfolio Bag और उनके दिए हुए समय पर हाजिर हो गया. Reception में आधे घंटे इंतजार करना पड़ा फिर बुलाहट हुआ. may i coming ma’am मैडमजी कुछ काम में व्वस्थ थी,मगर मेरी आवाज़ सुनते ही मेरी उपर नज़र दी,बड़ी तहज़ीबके साथ अंदर आने की आज्ञा दिये. मैं मैडम जी के सामने कुर्सी खीच के बैठ गये सारी चीजों का व्याख्या दी समझाते हुये बार बार उन्हीं के उपर नज़र जा रहा था. स्वेता के जाने के बाद एक बात तो बोलना भूल ही गया..मेरी स्वर्गवासी पत्नी की नाम थी स्वेता. दस साल पहले ऐसी ही किसी स्कूल में दस साल पहले मिली थी.जो भी हो..मैडमजी को सारी Details समझा कर आर्डर ले कर वापस अपने ऑफिस आ रहा था,पता नहीं मेरी बेटी के जन्मदिन की न्योता देने की इच्छा हुआ, फिर मैं वापस गया इतराते हुए उनको न्योता दिया, उन्होंने आने की मंजूरी दे दी उसी वक़्त ! जो की आशा तो नहीं थी की वो आयेगी की नहीं, बस दिल में एक उम्मीद लेकर अपने ऑफिस वापस आ गया.
अभी अपना गैराज से एक ऑफिस लिया रोहिणी
में और उसी ऑफिस के बगल में अपना घर हैं आसान होता घर और ऑफिस को तालमेल बना के
रहने में . आज तो घर जल्दी जाना तैयारी भी बाकि हैं बहुत सी, चार बज रहे हैं अब
निकलना हैं दुकान बढ़ाकर घर के तरफ रवाना हो गये. घर जाकर बच्चियों को तैयार करके Society के बच्चों को बुला कर घर
को सजाकर सारी तैयारीयों के साथ बस एक इंतजार में हूँ जो मुकम्मल होगा की नहीं पता
नहीं.
७ बज रहे हैं Society के सारे बच्चें आ गये Cake के ऊपर ५ साल की Candle लगाकर जला दिये वो रौशनी दुगनी हो गयी जब
मैडमजी अपनी धीमी क़दमों के साथ घर में प्रवेश किये, ऐसा लग रहा था मानों स्वेता आ
गयी हैं ! श्रुति भागकर एकदम से जा कर लिपट गयी, सिल्की कुछ समझ नहीं पायी वह मेरे
बगल में खड़ी रह गयी. मैं भी चकित हो गया अपने होंश को सँभालते हुये आगे जा कर उन्हें स्वागत किया, पार्टी बढ़िया रही, मैडमजी
को खाना खिला कर घर भेंजे और उनकी शुक्रिया अदा भी किये, इतनी व्यस्त रहने के
वाबजूद उन्होंने अपना कीमती समय निकाल कर इस निमंत्रम को मान्यता दी.
पांच दिन बाद उनकी Order लेकर उनके स्कूल गये लेकिन वो स्कूल में नहीं थी उनकी Assistant ने बताया आज मैडमजी के घर में कुछ समस्या होने के हेतु आज स्कूल मैं अनुपस्थि हैं, यह सुन कर मन विचलित हुआ और पता नहीं ऐसी क्या बेचेनी हुई की बिना सोचे समझे उनके घर की ओर खाना हो गये. जा के देखा Rishav का Accident हो गया, मैडमजी के दो बच्चें हैं एक बेटा Rishav और एक बेटी Dona श्रुति शिल्की से ये दो बच्चें दो-तीन साल के बड़े होगे. मैडमजी काफी परेशान दिख रही थी बेटे का Accident साइकिल से गिरने से हो गया था. मुझे देख कर कुछ आश्चर्ये हुआ की मैं कैसे आया. इसी तरह हमारे और मैडमजी के दुःख दर्द मिलते जुलते कभी हम उनके सुनते कभी वह हमारी सुनते पता नहीं दोनों के दुःख दर्द बाटते बाटते कब हम दोनों एक दुसरे के करीब आ गये और एक निर्णय लेने के समय आ गये थे, पर मुझ में इतनी हिम्मत नहीं हुआ की मैं अपने सिद्धांत को उनपे थोप दूँ पर कहावत हैं “उनके मर्जी के आगे किसी के भी नहीं चलते हैं” ऐसे ही एक दिन हमदोनों की बातचीत में मैडमजी एक प्रस्ताव रख दी और मैं सोच रहा था क्या ये सपना हैं या हकीकत.जो बात मैं दिल लेकर बैचैन था आज वही बात मैडमजी ने छेड़ दी उनकी सीधा सपाट सोच हैं. हम दोनों अगर मिल जाये तो मेरे बच्चों को एक पिता और आपके बच्चों को एक माँ मिल जायेगी, इससे अच्छा और कोई प्रस्ताव नहीं हो सकता. मैडमजी शुरु से ही सीधी बात करने की उनकी प्रविर्ती हैं. इसलिए मैं सिर्फ यही बात किया की आप Rishav और Dona से बात कर लीजिये. फिर उन्होंने कहा बिना बात किये इतनी बड़ी सिद्धांत नहीं ले सकते हैं अगर आप चाहे तो श्रुति शिल्की से एक बार बात कर ले. जी मैडमजी आप से एक बात करना भूल गया था या बोल सकते हैं की अपनी बात वयां नहीं कर पाया. श्रुति अपने पहले जन्मदिन में एक उपहार मांग ली थी की पापा आज मेरे लिए “माँ” ले आना और उस पांचवी जन्मदिन में, आपने उसे माँ उपहार दिया था उस दिन से वह आज तक माँ ही मानती हैं...
"अगर आपका प्यार सच्चा और पवित्र हैं,आप उसके प्यार में तड़पते हैं तो वह रूह बनकर किसी ना किसी रूप में आपके पास जरुर आयेगी"
!! कहते हैं प्यार कभी मरता नहीं !!
Blog : Badal Goswami ...osr...

Aap ki Story bahut hi alag tarah ki hain
जवाब देंहटाएंहां सर थोड़ा हट के लिखना चाहता हूं मेरी कोशिश पूरी रहेगी।
हटाएंPadhne me bahut accha lgta hain
जवाब देंहटाएंधन्यवाद सर।
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