"रात"
आपलोगों को मैंने पहले अध्याय
में गाँव के बारे सारी बातें बताया की गाँव में लोगो की हालत कैसी है I
गाँव की
स्थिती ख़राब होने की बजह से ग्राम पंचायत ने अपने लोगो के साथ बैठक की गाँव की
मुसीबत दूर किया जाये I गाँव में घोषण की गयी,की दो दिन बाद चौक में ग्राम पंचायत
की बैठक है,सभी गाँव वाले को आना अनिवार्य है,गाँव के हित के लिया ग्राम पंचायत सभी गाँव वालो से बात करेगे I गाँव वाले ये बात सुन कर बड़े
चकित हुए I उन्होंने अपने सभी मित्रो से बात करने की कोशिश की और दो दिन की समय था,इसी बहाने एक दुसरे की हाल चाल भी पता चल जायेगा I गाँव के लोग आपस में बाते करते
है की आखिर ग्राम पंचायत ने चौक में बैठक क्यों बुलाई I इस बात की उन्हें बड़ी उत्सुकता
थी I क्या बात हो सकती है इसी बात को सोच सोच कर परेशान हो रहे थे I समय निकलता जा रहा था I
आखिर वो दिन आ गया जिसका सब को इंतजार था
गाँव के चौराह में लोगो की भीड़ जमा होने लगी,लोग
घर से भागे,भागे आने लगे सभी के मन में सिर्फ एक ही बात घूम
रहा था,की आखिर प्रधानजी ने क्यों बुलाया गाँव वालो को क्या
होने वाला है क्या खबर है,ये सोच सोच सोच के सब परेशान थे I तभी दूर से दिखा की प्रधानजी कुछ लोगो के साथ चले आ रहे है,गाँव के लोगो की उत्सुकता और बढ़ने लगा I चौराहे पर टेबल कुर्सी लगी थी,सामने दरी बिछी थी सभी
गांववाले वहां बैठे हुए थे जो लोग खड़े थे वो भी बैठ गए I
पंचायत की बैठक शुरु हुई,प्रधानजी बोले हम पंचायतो
की राय है की इस गाँव को थोड़ा आर्थिक मदद करे और गाँव की कुछ व्यवस्था ठीक की जाये,और गाँव में एक सरकारी चिकित्सालय खोला जाये I जिसमे एक नर्स और एक डॉक्टर हो I आप लोगो
की राय चाहिए,गाँव वाले एक दुसरे को देखने लगे फिर सभी ने
हाँ कहा जी हम चाहते है की गाँव में एक सरकारी चिकित्सालय हो जिसमे डॉक्टर और नर्स हो I पंचायत ने सभी गाँव वालो को धन्यवाद कहा और बोले परसों सोमवार को ये पत्र
लेकर हम लोग शहर जायेगे महीने दो महीने में चिकित्सालय बन जायेगा ये कहकर ग्राम
पंचायत की बैठक खत्म हुई I लोग अपने अपने घर की ओर
जाने लगे,आपस में गाँववाले बातें करते हुए जा रहे है की
पंचायत ने गाँव के लिए बहुत अच्छा काम कर रहे है I हमारे लिए बहुत अच्छा होगा की अब हमलोगों को चार किलोमीटर दूर नहीं जाना
पड़ेगा इलाज के लिए गाँव वाले बहुत खुश थे I लोग
जहाँ भी जाते यही बात होती की गाँव में चिकित्सालय बन रहे है I
समय बीतता जा रहा था,लोग एक एक दिन गिन रहे थे वो दिन कब आएगा I एक महीना बीत गया,दूसरा महीना शरू हो गया I तभी किसी ने कहा की गाँव में सरकारी लोग आये है,शहर
से चिकित्सालय बनाने के लिए I सभी भागे चोंक की तरफ भागे वहाँ जा के देखा तो
हा सचमुच शहर से कुछ लोग आये हुए है और जगह की मुयाना कर रहे I फिर सरकारी लोग आपस में कुछ बात की
फिर प्रधानजी से बोला कल से यहाँ काम शुरू हो जायेगा I ये कह कर वे लोग चले गए I अब काम कल से
शुरू हो जायेगा गाँव वाले आपस में बात करने लगे,गाँव के लोग
बहुत खुश थे I सब अपने अपने घर को चले गए I गाँव में खुशी के माहौल थे,लोग बहुत खुश थे सुबह के दस बजे थे,गाँव में कुछ लोग आये,उनके साथ एक बड़ी ट्रक थी,जिसमे सीमेंट,बालू,ईट और कुछ लोहे के छड़ थे I कुछ पांच छे मजदूर थे,और एक सरकारी साहेब भी थे वे
लोग अपना काम शुरु करने के आदेश मांगे साहेब से उन्होंने अनुमति दे दी I मजदूरों ने अपना काम शुरू कर दिये,दोपहर के समय तक
आधा काम हो गया था,मतलब कमरा तैयार हो गया सिर्फ छत का काम
रह गया था,मजदूरों का दोपहर के खाने का समय हो गया I मजदूर खाना खाने चले गए,फिर करीब तीन बजे फिर काम
शुरू हुआ ऐसे करते करते शाम हो गया I मजदूरो ने
साहेब से कहा आज का काम हो गया I साहेब बोले कल सुबह समय पर आ जाना I मजदूरों ने कहा ठीक है सर,ये बोल के मजदूर चले गए I गाँव वाले आपस में बात कर रहे थे की आखिर कब तक तैयार होगा चिकित्सालय,कब डॉक्टर और नर्स आएगे I ये सोच सोच के गाँव वाले व्याकुल हो रहे थे I दुसरे दिन फिर काम शुरू हुआ,ऐसे काम करते करते चार
पांच दिन बीत गए I आखिर चिकित्सालय बन के तैयार हो गया इसमे एक बड़ा सा कमरा और बाहर बरामदा
था जो काफी बड़ा था I सीमेंट के बैठने के कुर्सी बने थे I कमरे बड़े थे,उसमे एक बार में दो चार मरीज को भर्ती कर सकते थे I शाम को बड़े साहेव आये देखने को
चिकित्सालय का काम पूरा हुआ या नहीं,उन्होंने देखा और बोला
जल्दी जल्दी चिकित्सालय का जो काम बाकि है उसे पूरा करो ये कह कर साहेब चले गए I फिर अगले दिन चिकित्सालय का काम
पूरा हुआ I चम-चमाता चिकित्सालय तैयार हो गया I
चिकित्सालय के बाहर कुछ लोगो की भीड़ लगी थी,कुछ लोग कह रहे थे,की प्रधानजी ने खबर भेजा है की कल
शाम को चिकित्सालय का उद्घाटन होगा I सभी गाँव वाले को निमंत्रण है,आने की,हाँ अगर किसी के घर में कोई बीमार है तो उसे
भी साथ ले के आये,उनका इलाज भी हो जायेगा I गाँव वाले बहुत खुश हो गए,चलो कल अपनी घर वाली को साथ ले आएंगे,बहुत दिनों से
बीमार है और कोई कह रहा हम अपने लड़के को ले के आयेगे,कल उसका
इलाज भी हो जायेगा और चिकित्सालय भी देख लेंगे I गाँव में जैसे कोई त्यौहार हो
रहा हो लोग इतना खुश थे,लोग आपस में बाते करते है की चलो अब
ठीक है I गाँव में एक चिकित्सालय तो बन गया है,अब किसी को
गाँव से बाहर जाना नहीं पड़ेगा I गाँव की सारी चिंता दूर हुई दवा और
इलाज के लिय शहर नही जाना पड़ेगा I ग्रामपंचायत ने बहुत ही सरहानी काम
किये है,प्रधानजी का बहुत बहुत धन्यवाद
गाँव के चौंक में देखने लायक भीड़ लगी थी I चिकित्सालय पूरी तरह से सजी थी I प्रधानजी ने उद्घाटन किये नारियल फोड़ कर,सभी गाँव के
लोगो को लड्डू खिलाये I बोले जाओ अब डॉक्टर से इलाज
करवाओ I लोग अपने परिजनों को साथ ले के आये थे,इलाज के लिए I सभी अपने परिवार के साथ चिकित्सालय में बैठे थे,सब
अपनी अपनी बारी का इन्ताजर कर रहे थे I चिकित्सालय में एक डॉक्टर,नर्स और एक कम्पाउण्डर थे,जो मरीजो को देख रहे थे I माहौल बहुत अच्छा था चिकित्सालय से लोग बहुत खुश थे I तभी अचानक प्रधानजी आ गये,और बोलने लगे गाँव वालो अब
ठीक है ना,गाँव में चिकित्सालय खुल गया,तुम लोग खुश हो ना,गाँव के सभी
लोगो ने हाथ जोड़ के खड़े हो गए और बोले जी माई बाप अब ठीक है,हम लोग बहुत खुश है I प्रधानजी बोले कोई दिक्कत हो तो बताना,ठीक है और वो
चले गए I शाम तक गाँव के काफी लोगो ने अपने घर
के लोगो का इलाज करवा लिये थे I इस तरह रात हो गए,लोग अपने अपने घर को चले गये I
"रात" पार्ट २..
अब कहानी का असली मोड़
सुबह हुई,गाँव के सभी लोग अपने अपने काम पर जाने को तैयार हो रहे थे I रास्ते में जाते वक़्त गाँव वाले ने देखा की चिकित्सालय के बाहर सन्नाटा था,कुछ लोगो ने आपस में बात करने लगे चलो देख के आते है,चिकित्सालय में कोई है या नहीं I गांव वाले ने देखा की डॉक्टर और नर्स नहीं है,सिर्फ कम्पाउण्डर बैठा है, उन्होंने कम्पाउण्डर से पूछा की डॉक्टर साहिबा कहाँ है,कम्पाउण्डर ने कहा वो लोग तो रात में ही चले गए और अभी तक नहीं आये है I गाँव वाले ने कहा कोई बात नहीं आ जायेगे,शहर से आते है ना थोड़ा समय लगेगा I ये कह के लोग अपने काम पर जाने लगे I शाम हो गयी सभी गाँव के लोग काम से वापस जाने लगे,तो कुछ लोग आपस में बात करने लगे चलो देख के आते है डॉक्टर साहिबा आये की नहीं I चिकित्सालय के अन्दर देखा की कोई नहीं हैं,चिकित्सालय खाली पड़ा है I सब लोग परेशान हो गये तभी किसी ने कहा चलो चल के प्रधानजी को बताते है की चिकित्सालय में कोई नहीं हैं I
प्रधानजी के पास गाँव वाले पहुचें I प्रधानजी बोले क्या हुआ,गाँव वाले बोले माई बाप चिकित्सालय में कोई भी नहीं है,चिकित्सालय सुनसान पड़ा है I प्रधानजी बोले नहीं ऐसा नहीं हो सकता I तुम लोग जाओ मैं बात करता हूँ,चिकित्सा अधिकारी से,ये बोल के प्रधानजी अंदर चले गए I गाँव के लोग भी अपने अपने घर की ओर निकल पड़े I लोग यही सोच रहे थे की आखिर क्या बात हो गया की चिकित्सालय से डॉक्टर और नर्स चले गये,और दुसरे दिन भी आये नहीं I अभी अभी नया नया चिकित्सालय बना हैं I गाँव के लोगो में चिकित्सालय की उत्साह तो थी,मगर कही ना कही नाराजगी भी थी I
सुबह हुई गाँव के लोग अपने अपने काम पर लग गए I कोई खेत में जा रहे है तो कोई मवेशियों को चारा दे रहे थे I इस प्रकार दोपहर हो गये,गाँव में सन्नाटा पसरा हुआ था जो कुछ लोग थे गाँव में वो परेशान थे की चिकित्सालय तो खुल गया I लेकिन दो दिन से कोई डॉक्टर और नर्स नहीं आ रहे है I इस प्रकार शाम हो गया लोग काम से वापिस आने लगे,सभी चिकित्सालय की ओर जा रहे थे,की देखूं तो क्या हो रहा हैं I तभी किसी ने कहा की प्रधानजी आ रहे हैं,लोग चुप हो गए और एक दुसरे की शक्ल देखने लगे I प्रधानजी बोले घबराने की कोई जरूरत नहीं है,हमने चिकित्सा अधिकारी को फोने से सारी बात बता दी है,वो जल्दी ही कोई व्यवस्था कर देंगे I ये कह कर प्रधानजी चले गए I गाँव वाले अपने अपने घर को चले गए I उस रात में बिजली कड़कने की आवाज़ आ रही थी I लोग अपने अपने घर में दुबके हुए थे,वारिश भी झमा झमा हो रही थी I सारे गाँव में सन्नाटा में पसरा हुआ था I
अगले दिन सुबह का समय था,कूछ लोग गाँव के चोंक की ओर जा रहे थे,तभी किसी ने पूछा भाई क्या हुआ तुम लोग कहाँ जा रहे हो I प्रधानजी ने चोंक पे सब गाँव वाले को बुलाया है,वही जा रहे है I चोंक पर प्रधानजी खड़े थे,उन्होंने कहा आप लोगो के गाँव में कोई डॉक्टर और नर्स नहीं आना चाहता है,क्योंकी यहाँ आने जाने और रहने की कोई साधन नहीं हैं I लेकिन आपलोग चाहते हो की कोई चिकित्सा के लिए रहे तो एक काम करना पढ़ेगा I आप लोग गाँव में एक कमरे की तलाश करो,जो की डॉक्टर या नर्स को रहने की व्यवस्था हो सके I तभी कोई आएगा,चिकित्सा अधिकारी ने कहा ये प्रधानजी बोले I सारे गाँव वाले चुप हो गए,कहाँ से लाये कमरा डॉक्टर साहेव के लिए I
इस तरह दो तीन दिन बीत गया,गाँव के लोगो को कुछ समझ नहीं आ रहा था I ऐसे करते करते दो चार दिन और बीत गया I कुछ लोग बीमार थे,गाँव में कोई उपचार के लिए डॉक्टर नहीं थे I चिकित्साल तो है,मगर डॉक्टर नहीं है,उद्घाटन के समय डॉक्टर,नर्स सभी थे,आज कोई इस गाँव में आना नहीं चाहते है I हमारी किस्मत ही ख़राब है अब भगवान ही मालिक I
अगले दिन सुबह गाँव वाले प्रधानंजी के पास गए I प्रधानंजी बोले क्या हुआ कुछ व्यवस्था हुआ I सब ने कहा मालिक तभी प्रधानंजी बोले एक जना बोलो सब को बोलने की जरुरत नहीं है,ये हरिया तू बोल का बोल रहा है I हरिया बोला मालिक गाँव के उत्तर में कुआँ के पास एक झोपड़ी है,सो बहुत दिन से खाली पड़ा है,उसको मरम्मत कर दे तो उसमे डॉक्टर साहेब रह सकते है I बगल में कुआँ भी है पानी की कोई दिक्कत नहीं होगा I प्रधानंजी बोले ठीक है,सुनो उस झोपड़ी को ठीक करो मुनीम से बोले प्रधानंजी I गाँव वाले अपने अपने घर की ओर निकल गए I आज की सुबह लगता है की कुछ अच्छा काम होगा,मौसम से पता लग रहा था I अब झोपड़ी का काम प्रधानंजी ने शुरू करावा दिए I कुछ मजदूर उस पुराने झोपड़ी को ठीक करने लगे I प्रधानंजी बोले शाम तक झोपडी बिलकुल नयी हो जाना चाहिए I जो भी सामान चाहिए मुंशी से बोल देना वो सब व्यवस्था कर देंगे I मजदूरों ने दिन भर काम कर के शाम को झोपड़ी तैयार कर दिए I प्रधानजी आये और बोले देख कर वाह बहुत अच्छा झोपड़ी तैयार किये हो शाबास अब डॉक्टर साहेब को रहने में कोई दिक्कत नही होगा I कल ही डॉक्टर को भेजने के लिए चिकित्सा अधिकारी को बोलता हूँ I गाँव वाले बहुत खुश हुए,प्रधानजी ने कितना अच्छा काम किये है I
"रात"पार्ट 3...
मौसम ने ली करवट ..
प्रधानंजी ने दुसरे दिन सुबह को चिकित्सा अधिकारी को फ़ोन किये,सर घर तैयार हो गया हैं I आप डॉक्टर को भेज दीजिये I चिकित्सा अधिकारी ने कहा देखिये प्रधानंजी हम लोग अच्छी डॉक्टर को भेज रहे हैं,मगर कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए I प्रधानंजी बोले कोई शिकायत नहीं आएगा सर I गाँव वाले बड़े भोले भाले और समझदार है I आप चिंता मत करो,चिकित्सा अधिकारी बोले ठीक है,कल एक महिला डॉक्टर को भेजा रहा हू, वो सुबह आ जाएँगी I ये बोल के चिकित्सा अधिकारी ने फ़ोन रख दिए I प्रधानंजी ने गाँव वालो को अपने घर बुलावा भेजा I सभी गाँव वाले प्रधानंजी के घर पहुचें I प्रधानंजी अपने झूले में बैठ कर हुक्का पी रहे थे I उन्होंने गाँव वाले को बोले आ गए सब लोग,हमारे गाँव में एक महिला डॉक्टर आ रही है कल चिकित्सा अधिकारी ने कहा की उनको किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए,कोई भी काम बोले तो काम कर देना I वो शहर से आ रही है,अच्छी डॉक्टर है आप लोग थोड़ा ध्यान रखना ठीक है सब लोग समाज गए,जी मालिक हम लोग उनको कोई दिक्कत नहीं होने देंगे I प्रधानंजी बोले ठीक हैं,जाओ तुम लोग I सभी गाँव वाले वहां से चले गए I गाँव वाले आपस में बाते कर रहे है,की चलो आखिर हमारे गाँव में एक डॉक्टर तो आ गया I अब सब ठीक है,अगर गाँव में किसी की तबीयत ख़राब होगी तो चिंता की बात नहीं है,इलाज भी होगा दवा भी मिल जायेगा I गाँव के हर घर के लोग बहुत खुश थे,सब लोग बस यही इंतजार थी की कब सुबह होगी I लोगो को रात में नींद नहीं आ रहा था I आखिर सुबह हो गयी नयी सुबह की खुशुबू आने लगी I लोग बहुत ख़ुशी से सुबह जागे I उन्होंने भगवन का नाम लिया और बाहर निकले.....
सुबह का वक़्त था,मौसम अच्छा था,चिड़िया चहक रही थी,सूर्य की सुबह की लालिमा दिख रही थी I गाँव के लोग अपने काम काज सुबह का कर के अपने अपने काम पर जा रहे थे I लोगो के मन में एक बात थी की शाम को जब लौटेंगे काम से तो डॉक्टर साहिबा से मुलाकात करेंगे I
दोपहर के बारह बज रहे थे,तभी एक कार प्रधानंजी के घर के सामने रुकी गाड़ी से एक महिला उतरी प्रधानंजी समझ गए थे,की ये डॉक्टरनी साहिबा ही हो सकती है I वो आ के प्रधानंजी को नमस्ते किये और बोली मुझे चिकित्सा अधिकारी ने भेजा हैं I प्रधानंजी बोले हा हा आपका स्वागत है,हमारे गाँव में पधारिये I फिर बहुत सारी बाते हुई खाना पीना हुआ I प्रधानंजी बोले चलिए मैं आपको रहने की व्यवस्था करता हूँ I डॉक्टरनी साहेबा को ले के झोपड़ी के पास पहुचें I अच्छा यहाँ मेरे रहने की व्यवस्था की है,प्रधानंजी बोले हा जी डॉक्टरनी साहेबा गाँव के कुछ लोग भी वहाँ पहुचे हुए थे I प्रधानंजी बोले किसी तरह की दिक्कत हो तो हमें ख़बर कीजियेगा I अब मैं चलता हूँ,कह कर वो चले गए I
शाम हो गयी थी डॉक्टरनी साहेब ने अपने घर को ठीक ठाक से सजा लिए थे I तभी गाँव के कुछ लोग वहाँ आये और बोले नमस्ते डॉक्टरनी जी कैसी हो,वो बोली हम ठीक है आप लोग कैसे हो I गाँव वाले बोले हम लोग सब ठीक है I और बताये गाँव में सब ठीक है गाँव वाले बोले हा जी सब ठीक है I आप आ गयी है अब हमारे गाँव में कोई भी बीमार नहीं रहेगा गाँव में चिकित्सालय भी बन गया और आप भी आ गयी है,अब सब ठीक होगा गाँव में I डॉक्टरनी बोली अगर किसी तरह की परेशानी या दिक्कत हो तो मुझे बताना मैं या तो घर में मिलूंगी या फिर चिकित्सालय में मिलूंगी I अब आप लोग जाओ अपने घर रात बहुत हो गयी हैं I गाँव वाले चले गये I
सुबह हुई चिकित्सालय में काफी भीड़ लगी थी,लोग अपना इलाज के लिए आये हुए थे I लोग बहुत खुश थे,अब गाँव में एक अच्छी डॉक्टर है,अब कोई बीमार नहीं रहेगा गाँव वाले आपस में बात कर रहे थे I समय बीतता गया लोगों की जीवन ठीक चल रहा था I गाँव में कोई उत्सव होता डॉक्टरनी साहेब भी रहती थी,मतलब कहने को की गाँव में ख़ुशी आ गयी,पहले जैसा गाँव नहीं था I
अब कहानी में एक किरदार...
गाँव का माहौल बहुत अच्छा था,चहल पहल थी,लोग अपने काम काज ठीक से कर रहे थे I चिकित्सालय भी बहुत अच्छा चल रहा था I डॉक्टरनी इतनी अच्छी है की गाँव वाले उन्हें बहुत प्यार करते थे क्योंकी वह सभी के सुख दुःख में काम आती थी व्यव्हार भी काफी अच्छी थी डॉक्टरनी जी की इसके वजह से गांव वाले उन्हें बहुत चाहते थे I गाँव में कोई भी बीमार नहीं होता,उनकी इलाज इतनी अच्छी थी I इस तरह समय बीत रहा थाI
एक दिन सुबह अचानक से ही मौसम बहुत ख़राब हो गया I आसमान में काले काले बादल छाये हुए थे,वारिस भी हो रही थी,हवा भी चल रही थी,बिजली कड़कने की आवाज़ भी कभी कभी आ रही थी I चिकित्सालय में वारिश की पानी टपक रहा था,लोग कम आ रहे थे I डॉक्टरनी चिकित्सालय का काम कर के अपने घर को निकली I किसी तरह अपने घर को पहुँचीं,वारिश की वजह थोड़ी देर हो गयी थी और खाना खा के सो गयी I थकी हरी सारा दिन का काम और मौसम ठंडा होने की वजह से डॉक्टरनी को जल्दी नींद आ गयी I
रात..
रात करीब एक दो बजे की बात हैं,अचानक से कमरे की कुण्डी बाहर से कोई जोर जोर से बजा रहा था I डॉक्टरनी की नींद इतनी तेज थी,की उसे कुछ सुनाई नहीं दे रही थी I लेकिन कुण्डी कोई बाहर से जोर जोर से बजाये जा रहा था I आखिर डॉक्टरनी साहेब की नींद खुली और हरबढ़ा के बोली,
कौन हैं..कोई जबाव नही आया...
फिर बोली कौन हैं,इतनी रात को..
डॉक्टरनी सोच रही हैं की कौन हो सकता हैं,इतनी रात को वो भी इतनी ख़राब मौसम में डॉक्टरनी साहेब ने
फिर बोली कौन है भाई..
तभी बाहर से एक बड़ी प्यारी और सहमी सी आवाज़ आई डॉक्टरनी जी मैं हूँ I
डॉक्टरनी बोली खोलती हूँ..रुको जरा..
वो उठ कर दरवाजा खोलने गयी हाथ में लालटेन ले के I डॉक्टरनी ने जब दरवाजा खोला तो सामने वाले को देख कर चकित रह गयी और देखते रही I
"रात" पार्ट ४ ..
आप लोगों ने अब तक जो मेरी लिखी हुई,कहानी में पढ़ा हैं,गाँव के बारे में अब कहानी में एक नया मोड़ आ गया है...
दरवाजा खोला तो..वो चकित थी..
देखी एक लम्बा दस से बारह फुट का आदमी और देखने में बहुत ही सुन्दर और चेहरे पर चमक सफ़ेद पोशाक पहने हुये खड़ा था I
वो आदमी क्या हुआ,डॉक्टरनी साहेब,बड़े प्यार से बोला I डॉक्टरनी ने बड़ी धीमी आवाज से बोली,कुछ नहीं I इतनी रात में आप आये हो वो भी इतनी ख़राब मौसम में बारिश हो रही है I हाँ बतायें क्या हुआ,डॉक्टरनी बोली पहले आप अन्दर आ जाओ बारिश बहुत तेज हो रही है I
वो बोला नहीं डॉक्टरनी जी मेरे पास समय नहीं है बैठने की..
मैं बहुत जल्दी में आया हूँ ,आपको लेने आया हूँ आपकी बहुत जरुरत है,कोई जिंदगी और मौत से जूझ रही है आप जल्दी चलो I डॉक्टरनी साहिबा बहुत परेशान हो गयी बाते सुन कर,बोली इतनी रात को कहाँ जाना है I
कौन बीमार है..
क्या हुआ है..कुछ बतायेगे I
तभी वो आदमी सहमी आवाज में बोला..मेरी बीबी की तबियत बहुत ख़राब है,वो गर्भवती है और दर्द से कराह रही हैं,आप चलो...कहाँ जाना है ?
इतनी रात,वारिश हो रही है,और जायेंगे कैसे कोई साधन नहीं है जाने का
वो आदमी बोला डॉक्टरनी साहेब आप परेशान ना हो,जीप गाड़ी ले के आया हूँ I
फिर डॉक्टरनी पूछी कहाँ रहते हो I बताओ कहाँ रहते हो..
वो आदमी चुप डॉक्टरनी को देखता रहा,फिर बोला..आप चलो...
अब डॉक्टरनी को डर लगने लगा,वो सोची कोई मुसीबत में है और मैं एक डॉक्टर हूँ,कैसें ना बोलू I किसी तरह अपने आप को सँभालते हुए बोली ठीक है चलती हूँ I डॉक्टरनी अंदर से बहुत घबराये और डरी हुई थी, भगवान को याद करते हुये बोली अपने मन को की जो होगा देखा जायेगा I अपने बैग उठाई और बोली चलो
वो आदमी बोल..डॉक्टरनी जी बैग मैं पकड लेता हूँ,आप चलो...
जैसे ही झोपड़ी से बाहर निकली तेज वारिश हो रही थी,अंधेरा छाया हुआ था,डर से डॉक्टरनी की हालत बहुत ख़राब थी I
वो आदमी बोला आइये डॉक्टरनी जी बैठिये...घबराये नहीं कुछ नहीं होगा I
डॉक्टरनी बहुत परेशान हो रही थी,मन ही मन बोल सोच रही थी,कि पता नहीं कहाँ ले जा रहा हैं,तभी गाड़ी चालू हुई I बारिश में गाड़ी चली जा रही थी,अंधेरे को चीरता हुये दूर दूर तक कोई दिख नहीं रहा था I डॉक्टरनी बैठे बैठे सोच रही थी,काश ना जाता तो ज्याद अच्छा होता I तभी उसकी नज़र अचानक ड्राईवर की सीट पर गयी,वो भोच्चोका रह गई I उसने देखा की ड्राईवर अपनी सीट पर कभी दिखता है,कभी गायब हो जाता हैं माजरा कुछ समझ नहीं पाई I डर से उसकी हालत और ख़राब हो रही थी,अपने आप को सँभालते हुए बैठे रही I रात के अंधेरे में कुछ पता नहीं चल रहा था की गाड़ी आखिर जा कहाँ जा रही हैं I तभी अचानक गाड़ी जंगल की ओर मोड़ दी I डॉक्टरनी ने बड़ी हिम्मत जुटा के पूछ ली हम जंगल की ओर क्यों जा रहे हैं I
वो आदमी कुछ नहीं बोला,फिर डॉक्टरनी पूछी हम जंगल की ओर क्यों जा रहे I
वो आदमी बोला वहाँ मेरा घर हैं,
डॉक्टरनी बोली वहाँ तो कोई घर नहीं है और जंगल में कोई रहता नही है I
वो आदमी बोला हम रहते है अपने परिवार के साथ घबराओ नहीं आप को कुछ नही होगा I
वह गाड़ी जंगल के अंदर चली जा रही थी,तकरीबन एक किलोमीटर जाने के बाद गाड़ी एक छोटा सा मैदान के पास रुका I चारो तरफ अंधेरा था कुछ दिख नहीं रहा था,मगर डॉक्ट नी को अनुमान हो गया था की वो जंगल के कितने अंदर आई हैं I
तभी वो आदमी बोला डॉक्टरनी जी आप गाड़ी से नीचे उतरिये...
डॉक्टरनी डरे डरे से नीचे उतरी और बोली तुम्हारा घर कहाँ है,कही तो दिख नहीं रहा हैं I
वो आदमी बोला वो देखो डॉक्टरनी जी सामने झोपड़ी दिख रही हैं,वह मेरा घर हैं,आप चलो...
डॉक्टरनी मन ही मन सोच रही हैं उस अंधेरे झोपड़ी में कौन रहता होगा,चलो जब इतनी दूर आ गए है तो चलते हैं I वो आदमी आगे आगे और डॉक्टरनी पीछे पीछे चलने लगी तभी डॉक्टरनी बोली झोपड़ी में कोई रोशनी क्यों नहीं है,कितना अंधेरा है कुछ दिख नहीं रहा हैं,वो आदमी कुछ नही बोला चलता जा रहा था I
कुछ दूर चलने के बाद वो आदमी बोला डरो मत,आप चलो...
झोपडी में रौशनी हैं I
डॉक्टरनी बोली मुझे तो कहीं रोशनी दिख नहीं रही हैं,कैसी बात कर रहे हो,अंधेरे में पता नही कहाँ ले जा रहे हो I मैं यहाँ से घर कैसे जाउंगी पता नहीं I
वो आदमी बोला डॉक्टरनी जी आप बहुत डरती हो,मैंने बोला ना कुछ नहीं होगा,
आप घबराओ नहीं,फिर भी डर रही हो...ये बोल के वो चुप हो गया..
झोपड़ी के अंदर पहुँचने पर डॉक्टरनी बोली कहाँ हैं,रोशनी.. चारो तरफ तो अंधेरा ही हैं I
तभी वो आदमी बोला डॉक्टरनी जी आओ इधर,,बोला नीचे देखो..
डॉक्टरनी जब नीचे देखी तो नीचे उतरने के लिए सीढ़ी बनी थी और बहुत रोशनी आ रही थी और खुशबु भी बहुत अच्छी आ रही थी I वो आदमी आगे था,और डॉक्टरनी पीछे थी I
वो आदमी बोला डॉक्टरनी जी आ जाओ नीचे मेरे साथ....
डॉक्टरनी उसके साथ नीचे की और चलने लगी,करीब दस से बारह सीढ़िया उतरने पर देखा,और डॉक्टरनी की आंख खुली की खुली रह गयी I उसका शरीर जैसे सुन हो गया हो,वहाँ की नज़ारा देख कर कुछ बोल नहीं पा रही थी I डॉक्टरनी ने देखा की एक बड़ी सी होल,राजा महाराजा की महल की तरह सजी थी और खुबसूरत लड़किया चेहरे पर रुमाल लगा के चारो तरफ खड़ी थी I नज़ारा देख कर ऐसा लग रहा था,कि जन्नत में वो पहुँच गयी है,ये देख कर डॉक्टरनी की हालत बहुत ख़राब होने लगी,वह कुछ बोलती की तभी
वो आदमी बोला डॉक्टर साहिबा घबराओ नहीं,आपको कुछ नहीं होगा..इधर आओ आप...मेरी बीबी दुसरे कमरे में हैं I
डॉक्टरनी जब कमरे में पहुंची तो वहाँ की नज़ारा देख कर चकित और आंखे खुली की खुली रह गयी I वो देखी एक लम्बे से बिस्तर में एक दस से बारह फूट की बहुत ही खूबसूरत महिला सो रही थी,और कहार रही थी,जैसे उसको कोई तकलीफ हो रही है I उसके चारो तरफ देखभाल करने के लिए सुंदर सुंदर कन्याएं खड़ी थी,उसकी खिदमत के लिए I खुशबू भी बहुत अच्छी आ रही थी I डॉक्टरनी ने चारो तरफ अपनी नज़र घुमा के सब कुछ देख रही थी तभी....
वो बोला डॉक्टर साहिबा मेरी बीबी को देखो,वो तड़प रही हैं,दर्द से ?
डॉक्टरनी बोली आप लोग थोड़ा हटो मैं देख लूँ,वो औरत इतनी लम्बी थी की मत पूछो,डॉक्टरनी उसके पास जा कर बोली क्या हुआ,दर्द ज्यादा हो रहा है क्या ? वो मुस्कुरा के इशारे से बोली हा दर्द ज्यादा हो रही है.डॉक्टर ने अपने बैग से आला निकली और अपने कानो में लगा ली और जाँच करने लगी,जब डॉक्टरनी ने उसके छाती में आवाज़ सुनने के लिए आला लगायी तो आवाज़ सुन के वो घबरा गयी,और कुछ सोचने लगी,डॉक्टरनी को खूब पसीना आ रहा था,वो उस आदमी की ओर देखी वो आदमी मुस्करा रहा था.
तभी अचानक से वो औरत बहुत जोर जोर से सांसे लेने लगी,और चिल्लाने लगी,डॉक्टरनी बहुत घबरा गयी,कुछ समझ नहीं पा रही थी की क्या करे ? वो आदमी बोला डॉक्टरनी जी मेरी बीबी को बचा लो कृपया करो और हाथ जोड़ के खड़ा हो गया,डॉक्टरनी ने हिम्मत जुटा के बोली गरम पानी लाओ अभी तुरंत और सभी लोग यहाँ से जाओ और अपने बैग से एक इंजेक्शन निकली और उस औरत को दे दी और भगवान का नाम ले के उसकी पेट को जोर जोर से नीचे की तरफ धकेलने लगी.कोशिश करते करते औरत ने एक बहुत ही खुबसूरत बच्चे को दी,बच्चे की रोने की आवाज़ चारो तरफ गूंज रही थी,जैसे लग रहा था की मानो कोई फ़रिश्ता जन्म लिया हो सभी लोग खुश थे,डॉक्टरनी ये सब नजारा देख कर बहुत चकित थी,और मन मन ही बोल रही थी हे भगवान आज आपने मुझे बचा लिया और एक लम्बी साँस ली,डॉक्टरनी ने बच्चे को गोद में ली और टकाटक देखते रही,बच्चे को उस आदमी के गोद में दे दी वो बहुत खुश हुआ.
वो आदमी बहुत ख़ुशी से बोला डॉक्टरनी साहिबा आज आपने जो ख़ुशी दी हमलोग को,
“हम जिंदगी भर नहीं भूलेगें सदा याद रखेगें हमलोग” आपको...
इस तरह से ख़ुशी को जाहिर किया,और वो आदमी ने बोला..
डॉक्टरनी साहिबा हम कुछ देना चाहते आपको,वो आदमी ने इशारा किया.तभी कुछ लड़कीया तोहफा ले कर आई हीरा,चांदी,सोना बहुत सारे अशर्फीया और कीमती कपड़े.डॉक्टरनी बोली मुझे कुछ नहीं चाहिए मुझे घर जाना हैं.
वो आदमी बोला नहीं कुछ तो लेना पड़ेगा डॉक्टरनी साहिबा खाली हाथ आपको जाने नहीं देंगे.
ये सुन के डॉक्टरनी बहुत घबरा गयी,बोली नहीं मुझे घर जाना हैं,फिर वो आदमी बोला ले लो कुछ भी..
वो आदमी बोला ठीक है,आप ये शाल ले लो,कभी भी कोई तकलीफ,परेशानी हो तो..इस शाल को अपने उपर डाल कर जो भी मांगोगी,वो मिलेगा...
ये कह कर वो आदमी ने शाल डॉक्टरनी को दे दिया और बोला चलिये..
मैं आपको घर छोड़ देता हूँ...
झोंपड़ी से बाहर निकले तो बाहर बहुत तेज बारिश और बिजली कड़कने की आवाज़ आ रही थी और अंधेरा काफी था,मानो आज ही सारी बारिश हो जाएगी.
वो आदमी बोला चलिए डॉक्टरनी साहिबा जीप में बैठिये,जीप चलने लगी..
डॉक्टरनी बहुत कोशिश कर रही थी,अंधेरे में कुछ पहचाने की वो जंगल में कहाँ आई है,फिर वही ड्राईवर की सीट कभी वो आदमी दिखता है,कभी गायब हो जाता हैं.आखिर डॉक्टरनी अपने घर पहुँच गयी,वो आदमी डॉक्टरनी को बोला आपकी बहुत बहुत धन्यवाद,अच्छा अब मैं चलता हूँ,ये कह कर वो आदमी चला गया.डॉक्टरनी घर आ कर साँस ली.यही करीब साढ़े तीन बज रहे थे,ऐसे सोचते सोचते डॉक्टरनी को कब नींद आ गयी पता नहीं चला...
सुबह के दस बज रहे थे,बारिश बंद हो गयी थी,अस्पताल में भीड़ थी.गाँव के लोग डॉक्टरनी जी की इंतजार कर रहे थे,तभी किसी ने कहा हरिया जाओ डॉक्टरनी जी के घर इतना देर क्यों हो रही है आने में पता लगाओ.तभी दरवाजा की कुण्डी की आवाज डॉक्टरनी को सुनाई दी,हडबडा कर उठी और बोली कौन हैं,बाहर से आवाज़ आई डॉक्टरनी जी मैं हरिया हूँ,आप आज अभी तक अस्पताल नहीं पहुंची,डॉक्टर नी बोली मैं आ रही ही तुम जाओ.वो सोचने लगी रात में क्या हुआ था,क्या मैंने कोई सपना देखा था,ये सोचते सोचते वो जल्दी जल्दी तैयार हो कर अस्पताल पहुँच गयी.अस्पताल में और दिनों से ज्यादा भीड़ थी एक एक कर सभी मरीज को देखी.शाम के चार बज चुके थे.डॉक्टरनी घर ना जा के वो जंगल की तरफ निकली,उसे ये पता लगाना था,की रात को जहाँ गयी थी सच में वहाँ कोई झोपड़ी या घर है या नहीं,रास्ते में ये सोच कर परेशांन हो रही थी कि वो रात में कहाँ गई थी.करीब एक घंटा हो चूका था चलते चलते आखिर वो जंगल पहुँची और पहचाने की कोशिश करने लगी की वो जीप कहाँ रुकी थी,ये सोचते सोचते वो जंगल के बहुत अन्दर पहुँच गयी I तभी उसे एक झोपड़ी दिखी.डॉक्टरनी ने नीचे जमींन देखी तो चकित हो गयी देखी की जीप के टायर के निशान थे,डॉक्टरनी मन ही मन बोली रात में मैं यही आई थी चलो उस झोपड़ी में कोई हैं तो पूछता हूँ .झोपड़ी के अंदर एक दाढ़ी वाले बाबा बैठे हुए थे,डॉक्टरनी कुछ बोलती...
उससे पहले बाबा बोले तुम जिसकी खोज कर रही हो.. “वह यही जगह है”
ये सुनते ही डॉक्टरनी चकित हो गयी,हिम्मत जुटा के बोली बाबा आप कौन हो,वो बोले...
मैं वही आदमी हूँ जो तुम्हे रात को यहाँ ले आये थे..ये सुनते ही डॉक्टरनी कांप गयी और बोली ठीक हैं मैं चलती हूँ.बाबा बोले रुको इधर आओ...डॉक्टरनी जी...
वो गयी बोली बोलिए बाबा..
बाबा बोले तुम कल यही आई थी,और ये बात कभी भी मरते दम तक किसी को मत बताना,अगर तुम किसी को बताई तो वो दिन तुम्हारा आखरी दिन होगा.ये बात हमेशा अपने दिमाग में रखना और आप तो एक बहुत अच्छी डॉक्टर हो “आपका उपकार हम कभी नहीं भुलेगे”
ठीक है मैं चलती हूँ,ये बोल कर डॉक्टरनी तेज कदमो से चलने लगी.किसी तरह भागते भागते जंगल से बाहर निकली,दिन ढल चूका था,डॉक्टरनी घर पहुंची.इसी तरह दिन बीतता गया,गाँव की सेवा करती रही.कई साल कई महीने बीतते गये.एक दिन अचानक से डॉक्टरनी के पास एक तार आया ”उसमे लिखा था की माँ की तबियत बहुत ख़राब है,आप जल्दी आओ माँ बहुत बीमार है अस्पताल में भर्ती करना होगा”
डॉक्टरनी ने प्रधानजी को एक चिट्टी दे के गाँव से चली गयी अपने माँ को देखने.
गाँव वालो को जब पता चला की डॉक्टरनी यहाँ से चली गयी तो सब परेशांन हो गये.प्रधानजी के पास गये बोले हमारे गाँव में कोई डॉक्टर नहीं हैं,आप कोई व्यवस्था कर दीजिये.प्रधानंजी बोले ठीक हैं मैं चिकित्सा अधिकारी को चिट्टी भेजता हूँ.इसी तरह कई महीना बीत चूका था.अचानक से गाँव में एक डॉक्टरनी आई. प्रधानंजी ने उनको उसी झोंपड़ी में रहने की व्यवस्था कर दी, डॉक्टरनी वही रहने लगी.
उधर पुरानी डॉक्टरनी अपने घर पहुंची,उनकी माँ की हालत बहुत ख़राब थी माँ को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा.माँ की हालत दिन प्रतिदिन और बिगड़ता गया,डॉक्टर ने कहा अब आपकी माँ को सिर्फ भगवान ही बचा सकता है
“प्रार्थना कीजिये”
डॉक्टरनी बहुत रोने लगी,अब क्या करूँ माँ को कैसे बचाऊ तभी उसे “शाल” की याद आई जो वो आदमी ने जंगल में दी थी, “शाल” निकली और अपने उपर ओढ़ ली अब ये सोचने लगी माँ को बचा सकती हूँ क्या इस “शाल” से हिम्मत झुटा के डॉक्टरनी ने आंख बंद और हाथ जोड़ कर बोली मेरी माँ को ठीक कर दो और आंख बंद कर बैठी रही.तभी माँ की आवाज़ आई..
“बेटा तुम आ गयी हो” ये सुनते ही डॉक्टरनी चमक कर उठी,माँ को देख कर आँखों में आंसू आ गया,बोली माँ कैसी हो,माँ बोली मैं तो एकदम ठीक हूँ.तुम कैसी हो बेटा,मैं ठीक हूँ माँ...
डॉक्टरनी ने उस आदमी का हाथ जोड़ कर धन्यवाद किया जिसने उसे “शाल” दिया था,और मन ही मन मुस्कुरा रही थी...
"रात" पार्ट ५...समाप्त..
नया मोड़ आया...
अचानक से गाँव में बिजली की कड़कने की आवाज़ और भयानक तेज बारिश शुरू हो गयी,गांववाले बहुत परेशान हो गये,की अचानक से इतनी तेज बारिश और बिजली कड़कने की आवाज़ क्यों हो रही हैं.चारो तरफ अंधेरा और बारिश झमाझमा हो रही थी लोग परेशान हो कर अपने अपने घर में दुबक गये...
वही बरसात की रात...
रात करीब एक दो बज़े की बात हैं,अचानक से दरवाजे की कुण्डी बाहर से कोई जोर जोर से बजा रहा था I डॉक्टरनी की नींद इतनी तेज थी,की उसे कुछ सुनाई नहीं दे रही थी I लेकिन कुण्डी कोई बाहर से जोर जोर से बजाये जा रहा था I मगर अन्दर से कोई आवाज़ नहीं आई,काफी देर से कुण्डी बाहर से लगातार बजाये जा रहा था I तभी अचानक से डॉक्टरनी की नींद खुली और चीख कर बोली “कौन है बाहर” और इतनी रात को क्या काम आ गया हैं,जो कुण्डी इतनी जोर जोर कर बजा रहे हो कोई आवाज़ नहीं आई बाहर से बस कुण्डी बजाये जा रहा था I फिर डॉक्टरनी ने चीख कर बोली “कौन है बाहर” जवाब दो..फिर बोली कौन हैं,इतनी रात को I डॉक्टरनी सोच रही हैं की कौन हो सकता हैं,इतनी रात को वो भी इतनी ख़राब मौसम में डॉक्टरनी साहेब ने फिर बोली “कौन है बाहर”
कुछ दे बाद शांत होने के बाद बाहर से एक बड़ी प्यारी और सहमी सी आवाज़ आई.. “मैं हूँ” डॉक्टरनी जी दरवाजा खोलो..
डॉक्टरनी बोली क्या काम हैं बताओ इतनी रात को क्या काम आ गया हैं..
“वो आदमी फिर बोला डॉक्टरनी जी दरवाजा खोला”
डॉक्टरनी फिर बोली क्या काम हैं...बताओ इतनी रात को क्या काम आ गया हैं..
“वो आदमी बोला मेरी पत्नी की हालत बहुत ख़राब हैं वो दर्द से तड़प रही हैं”
आप दरवाज़ा खोलो..”मेरे साथ चलो उसे देख लो”
डॉक्टरनी बोली इतनी बारिश में कैसे जाउंगी,बाहर बहुत अंधेरा है कल सुबह आना..
वो आदमी बोला ऐसा मत करो डॉक्टरनी जी कृपया मेरे साथ चलो मैं जीप गाड़ी ले के आया हूँ..
आपको कोई दिक्कत नहीं होगा और मैं आपको घर भी छोड़ दूंगा..
कृपा चलो डॉक्टरनी जी...
डॉक्टरनी बोली अभी मैं नहीं जा सकती हूँ,तुम कल सुबह आना,बारिश में मैं कही भी नहीं जाउंगी “तुम जाओ “
वो आदमी बहुत मिन्नतें किया मगर डॉक्टरनी ने दरवाजा नहीं खोली
वो आदमी बोला ठीक है “आप नहीं आओगी मेरे साथ देख लो बहुत पछताओगी”
डॉक्टरनी बोली जा जा कहाँ से आ जाते हैं रात को और बोल रहा हैं,पछताओगी..”जाओ यहाँ से”
इस बहस में सुबह के साढ़े तीन बज गए,आखिर दरवाजा नहीं खुला..और फिर वो आदमी बोला जा रहा हूँ,मगर याद रखना मुझे..
अगर जिन्दा रही तो..बोल के चला गया..
सुबह हो चुकी थी,बारिश भी बंद हो गयी थी,सूरज पूरी तरह खिल चूका था,लोग अस्पताल में डॉक्टरनी का इंतजार कर रहे थे,मगर वो आई नहीं I गांववाले ने हरिया को बोला जाओ डॉक्टरनी को ले के आओ I हरिया झोपड़ी का कुण्डी जोर जोर से बजाया मगर अंदर से कोई आवाज़ नहीं आई I हरिया ने लगातार कुण्डी जोर जोर से बजाया मगर दरवाजा नहीं खुला I गाँववालो की भीड़ जमा होने लगी,हरिया बोला दरवाजा तो अन्दर से नहीं खोल रही हैं I गाँववाले ने झोपड़ी का दरवाजा तोड़ दिया और जब अंदर का “दृश्य” देखा तो सब चकित हो गया .. डॉक्टरनी की शरीर देख कर सब यही बोले..
“ये कैसे हो गया”
“ये कैसे हो गया”
“आप कही भी रहो,आपकी हमेशा किसी ना किसी को जरुरत है”
इसलिए अपना फर्ज हमेशा ईमानदारी से निभाओ...
blog : Badal Goswami
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Aap na Sabse Pehale apne blog ki copywrite karo.Nahi to koi Chori kr ke story pr Film bana lenga..Maja aa gaya story Raat padh kr bahut Suspence hain story me.
जवाब देंहटाएंधन्यवाद.आप ने सही कहा कुछ करता हूं ।
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