साल का जशन
इस संसार की रचना भगवान् ने कितनी सिद्दत और फुर्सत से की और उस धरती को सुंदर बनाये रखने के लिए एक नारी को भेंजा.
नारी ने धरती में इन्सान को जन्म दिया फिर धरती में इंसानों की आबादी बढ़ी. मगर इन्सान को ये रास नहीं आया और इन्होनें धरती को ही नष्ट करना शुरु कर दिया I
आज धरती ऐसी डगर पर आ गया की कभी भी इसका विनाश या खत्म हो सकता हैं, मगर इन्सान अपनी भोग विलाश में इतना मशगुल हैं की उन्हें ये पता नहीं की वह क्या कर रहा हैं और अंधों की तरह पाप किये जा रहा हैं.जहाँ नारी का अपमान होता हैं वहाँ भगवान् भी नाराज हो जाते हैं और फिर वो अपना प्रकोप किसी प्रकार से देते हैं चाहे देश में कोरोना हो या और कुछ I
१ जनवरी २०२३ नये साल की पहली रात की बात कर रहा हूँ, इस रात में नये साल की ख़ुशी में लोग एक दुसरे से गले मिलते है तो कोई खुशियाँ मानते हैं तो कोई मौज मस्ती तो कोई जश्न मानते हैं और कोई नया काम शुरू करने के लिए भगवान् से प्रार्थना भी करने बड़े बड़े मंदिरों में जाते हैं. मगर इस नये साल में कोई अपनी जिंदगी की भीख मांग रही थी I
पता नहीं नये साल की रात उसके साथ ऐसा क्यों हुआ,वो अपनी स्कूटी से घर जा रही थी रास्ते में एक कार से टक्कर लगी और वो कुछ समझ पाती कार के नीचे आ गयी मगर कार में बैठे पांचो लोगों में किसी को भी भनक तक नहीं लगी की कार के नीचे एक लड़की फस गयी हैं. वो चिल्ला रही थी की मैं कार के पहिये में फस गयी हूँ गाड़ी रोकों, मगर उस कार में बैठे पांचो को जरा सा भी उसकी दर्द सुनाई नहीं दी, उन्होंने कार में संगीत इतना तेज बजा रहा था की बाहर की कोई आवाज़ उनको सुनाई नहीं दी और एक लड़की को बढ़ी बेहरहमी से घसीटे हुए चार पांच किलोमीटर गाड़ी चलाता रहा, वो चीखती चिल्लाती रही की कोई मुझे बचा लो मगर १ जनवरी २०२३ नये साल की पहली रात ३.३० बजे सुनसान सड़को में कोई हो तो सुनेगा ना कुछ देर बाद उसकी आवाज़ बंद हो गयी. पांचो व्यक्ति अपने नये साल का जश्न चलती कार में मना रहा था शराब संगीत में ये इतने पागल हो गए की वह एक लड़की की चीख पुकार सुनाई नहीं दी और कुछ देर बाद उसकी मौत हो गयी I
जब ड्राईवर ने अपने साइड मिरर्र में देखा की लड़की का हाथ तब उन्हें होश आया और गाड़ी रोक कर उस लड़की को वही रोड में छोड़ कर भाग गये. उस लड़की को इतना घसीटा की उसकी पसलियाँ तक निकल गयी. लोगों ने सड़क पर एक लड़की की लाश देखा तो पुलिस को फ़ोन किया,ना तो उसके शरीर में मांस थी और ना ही बदन में कपड़े थे. लोग लड़की की दशा देख कर चकित और गुस्से से पागल हो रहे थे I
इधर घर वाले इंतजार कर रहे की बेटी कब आयेगीं वह सोच रहे थे की नया साल हैं वह अपने दोस्तों के साथ नये साल की खुशियाँ मना रही होंगी,उन्हें क्या पता था की बेटी की मौत हो गयी और वो भी इतनी दर्दनाक तरीके से जब उनके घर वाले ने सुना होगा तो उनपर क्या बिता होगा I
जरा सोचिये ?
लड़की किसी की बहन तो किसी की बेटी कुछ भी हो सकती हैं, आज इस तरह की घटना सुन कर दिल दहल जाता हैं, हम अपने बहन बेटी को कैसे निकलने दे घर से बाहर बहुत डर लगता हैं लोग इतना गिरते जा रहे हैं, इन्सान की इंसानियत कहाँ गयी I
आज हमें जागरूक होना पड़ेगा और आवाज़
उठानी पड़ेगी नहीं तो हम अपने बहन बेटी को कैसे सुरक्षित रखेंगे..जरा सोचिये ?
Blog: Badal Goswami
..osr..

Very Good.
जवाब देंहटाएंThank You Sir...
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