इंतजार
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मन ही मन यही सोचती मेरी क्या गलती है भगवान.. |
एक परिवार था परिवार बहुत ही सुंदर और बड़ा मगर कमाने (नौकरी.) वाली कहे तो घर को "सिर्फ एक महिला" चला रही थी
इस परिवार में तीन भाई दो बहन एक बूढ़ी माँ बड़ी बेटी के दो बच्चे और दामाद थे I माँ बेटी दामाद के पास ही रहती थी सब ठीक चल रहा था मगर कहने के लिए ठीक चल रहा हैं घर के अन्दर कोई दुःखी भी थी,पर परिवार में किसी को कुछ पता नहीं था की वो अंदर ही अंदर घुंट रही थी वो किसको बोले कौन सुनता उनकी बात..
परिवार
को किसी तरह बड़ी बहन चला रही थी मगर वो सुखी नहीं थी I सिर्फ काम किये जा रही थी
और अंदर ही अंदर घुटन भरी जिंदगी जी रही थी और भगवान से यही प्रार्थना करती “सब ठीक कर दो ” उनका एक लड़की और एक लड़का था पति सुनते नहीं थे,आये दिन लड़ते झगड़ते रहते थे बेचारी से वह
इस परिवार को ले के कहाँ जाये खून के घुट पीती और परिवार के बारे सोचते रहती,पिताजी बचपन में ही गुजर गए थे I सोचती भाई
कुछ काम करेंगा तो थोड़ा बोझ कम हो जायेगा,इसी आशा से जिंदगी चली जा रही थी I कुछ
दिनों बाद बड़े भाई नौकरी के तलाश में दुसरे शहर जा रहा था,बहन बोली नौकरी लगेगी तो
पहले अपने रहने और खाने की व्यवस्था कर लेना और अपने सेहत का ध्यान रखना,ठीक है
दीदी ध्यान रखूँगा वो शहर चला गया...
समय बिताता गया कुछ दिनों बाद बहन ने उसको फ़ोन पर बोली कुछ पैसे भेज देना बहुत दिक्कत हो रही घर चलाने में माँ के दवाई के लिए पैसे बचते नहीं है किसी तरह घर चला रहा हूँ I ठीक है दीदी मैं पैसे भेज दूंगा माँ के दवाई के लिए दोनों छोटे भाई और छोटी बहन अभी पढ़ाई कर रहा था तीनो को पढ़ाई और साथ अपने बेटा बेटी को भी किसी तरह चला रही थी,परिवार में बड़े भाई की शादी ठीक हुई शादी अपने ही मोहल्ला के लड़की से हुई शादी ठीक ठाक से हो गयी,सब खुश थे माँ भी बहुत खुश थी की चलो घर में एक बहु तो आई घर को सँभालने वाली बहन कितना ध्यान देगी I कुछ दिनों बाद दुसरे वाले भाई के लिए रिश्ते किसी दुसरे शहर से आये रिश्ते वाले लोग बहुत अच्छे थे माँ बाप भाई बहन सभी लोग बहुत अच्छे थे शादी पक्की हुई कुछ दिनों बाद शादी बहुत धूम धाम से हुई दोनों परिवार बहुत खुश थे I अभी शादी के ज्यादा दिन भी नहीं हुए थे की बड़े वाले ने बोला माँ मुझे जहाँ काम करता हूँ बहुत दिक्कत हो रहा है मैं बहु को अपने साथ ले जा रहा हूँ माँ बोली कुछ दिन यहाँ रहने दो I लेकिन वो नहीं सुना और अपने बीबी को ले के चला गया शहर माँ बेचारी देखते रह गयी I
कुछ दिनों तक ऐसे ही चलता रहा बेटी घर के लिए दिन रात काम कर रही थी क्योंकी सभी के खर्चा और माँ की दवाई के लिए पैसे चाहिए और कमाने वाली वो अकेले औरत थी I इसी तरह घर चलता रहा,कुछ दिनों बाद दूसरा बेटा बोला माँ मैं पास के मोहल्ला में एक रूम किराये पर ले रहा हूँ I हम पति पत्नी वही रहेंगे माँ बोली क्यों यहाँ कोई दिक्कत है क्या,बेटा बोला नहीं,माँ बोली ठीक है मैं भी तुम्हारे साथ रहूँगी मुझे अपने साथ ले चलना,बेटा बोला ठीक है I बेटा सारा सामान ले के किराये के मकान में चला गया,माँ बोली मुझे नहीं ले जाओगे I यहाँ मुझे मन नही लगता बेटा बोला हम लोग थोड़ा व्यवस्था कर लेते है,फिर आपको बुलायेगे,माँ बोली ठीक हैं I
बड़ा बेटा शहर जा कर कभी माँ को बुलाया नहीं की आप हमारे साथ रहो,माँ बेचारी इंतजार करते रही,काफी समय बीत चूका था I दोनों बेटो के घर बच्चा हुआ I एक के घर लड़का और दुसरे के घर लड़की फिर भी माँ को नहीं बुलाया I माँ बहुत दुखी हुई की दोनों बेटा मुझे रखना नहीं चाहता,बेचारी बेटी के यहाँ ही रहने लगी I
साल दो साल ऐसे ही बीतता गया माँ कभी कभी बोलती बेटे कुछ पैसे भेज दो मेरे दवाई के लिए,मगर वो भेजते नहीं थे और फ़ोन पर कहते माँ पैसे नहीं बचते कैसे भेजू I भगवान की मर्जी देखो बड़े बेटे की तबीयत ख़राब हुई डॉक्टर ने बोला आप को ऑपरेशन करना पड़ेगा खर्चा बहुत ज्याद होगा I ये सुन के वो बहुत हो गया और सोचा बड़ी दीदी तो बड़े शहर में है वही चलते है,खर्चा कम होगा और इलाज भी हो जायेगा I पुरे परिवार को ले के दीदी के यहाँ आ गया,माँ बहुत खुश हो गयी की बेटा बहुत दिनों बाद आया है I माँ सारा दिन पोते के साथ रहती I उसे खिलाती पिलाती पूरा ध्यान रखती,बेटे का ऑपरेशन हो गया कुछ खर्च नहीं हुआ क्योंकी बड़ी बहन अस्पताल में काम करती थी I कुछ दिनों बाद बड़ा बेटा माँ से कहा हम लोग शहर जा रहे है ऑफिस से फ़ोन आया हैं और अपने परिवार के साथ शहर आ गया,माँ बेचारी बहुत दुखी हुई की मुझे अपने साथ नहीं ले गया I बेटी की हालत बहुत ख़राब हो गयी पैसे की तंगी के कारण I
एक दो साल बीत गया दोनों बेटे मैं किसी ने
भी माँ को अपने पास नहीं बुलाया I माँ वही कड़वे बात दामाद से सुन सुन के जी रही थी I छोटा बेटा माँ के लिए हर महीने जो
कमाता उससे कुछ पैसा बचा के माँ को भेजता था,माँ उसी पैसे से अपनी दवाई ले लेती
ऐसे ही चल रहा था I माँ अपने छोटे
बेटे को हमेशा कहते रहती की तुम कोई अच्छी सी लड़की देख कर शादी कर लो I मुझे
बहुत ख़ुशी होगी मैं तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ,बेटा बोला माँ पता नहीं मेरी शादी कब
होगी I आप मेरे बच्चो कब अपनी गोद में
खिलाओगी I माँ बोली कोई लड़की देखो शादी कर लो I काफी समय बीत गया माँ बड़ी बेटी के
साथ रह रही थी बेटी किसी तरह घर चला रही थी I
समय के साथ माँ की आँखों की रौशनी कम होती जा रही थी,माँ को देखने में बहुत दिक्कत होने लगी I किसी तरह पुरानी चश्मा से काम चला रही थी I बेटी को पता था की माँ आंखो से ठीक से देख नहीं पा रही हैं I एक दिन बेटी बोली माँ चलो डॉक्टर के पास चलते है,आपको दिखा के लाता हूँ I फिर माँ को ले के डॉक्टर के पास पहुंची I डॉक्टर ने माँ की आंख देख के बोले की इनकी आँखों की हालत बहुत ख़राब हैं ऑपरेशन करना होगा,नहीं तो ज्यादा दिन तक देख नहीं पायेगी जल्दी ऑपरेशन करवा लो I बेटी बोली ठीक है डॉक्टर साहेब I माँ को सब पता था की बेटी ऑपरेशन के लिए पैसे कहाँ से लाएगी ये सोच कर माँ ने अपने दोनों बेटो को फ़ोन किया की कुछ पैसे भेज दो आंख की ऑपरेशन करवानी है I मगर दोनों में से किसी ने भी माँ के आंख के ऑपरेशन के लिए पैसे नहीं भेजें,माँ बहुत दुखी हुई I छोटा बेटा माँ को हमेशा फ़ोन पर हाल चल पूछते रहता था I
एक दिन अचानक ही छोटा बेटा माँ से मिलने शहर आ गया I माँ को पता नहीं था की वो अभी आएगा,एकदम अचानक घर पहुँच गया..
दरवाजे की कुण्डी बजाया तो अंदर से आवाज़ आई कौन हैं..बेटा बोला मैं हूँ “माँ बोली कौन हो तुम”
“माँ फिर बोली बताओ कौन हो” बेटा धीरे से बोला “माँ मैं हूँ” इतना सुनते ही माँ पहचान गयी बोली बेटा तुम, ”हाँ माँ मैं” बेटे की आवाज सुन माँ बहुत ख़ुशी हुई और बोली तुम अचानक से कब आये बेटा,माँ ने दरवाजा खोली और वो कुछ ठीक से देख नहीं पा रही थी माँ बोली मुझे साफ साफ दिख नहीं रहे हो,बेटा चुप था और सोच रहा था,की क्या हो गया I माँ आँखों से देख क्यों नहीं पा रही I माँ बस अभी अभी आया हूँ I जब बेटे ने माँ की आँखों की और देखा तो बोला माँ आपके आँखों में ये क्या हो गया हैं,माँ बोली मुझे मोतियाबीन हो गया हैं,आँखों से कम दिखती हैं I ये सुन कर बेटे के आँखों में आँसू भर गया और मन ही मन सोचने लगा की माँ की आँखों का इलाज करवाना पड़ेगा I तभी माँ बोली तुम अचानक से कैसे आ गए हो तुम आओगे बताये नहीं,बेटा बोला नहीं माँ आपको देखने की बढ़ी इच्छा हो रही थी इसलिए अचानक आ गया हूँ I माँ बोली ठीक हुआ तुम आ गए हो I चलो नहा लो और कुछ खाना खा लो फिर आराम से बात करेंगे,तुम्हारा वहां कैसा चल रहा नौकरी,कुछ तनखाह बढ़ा की नहीं,बेटा बोला नहीं माँ अभी बहुत कम पैसे दे रहा है बोला तनखाह बढ़ाएंगे कुछ साल काम कर लो I माँ बोली डॉक्टर के पास गए थे Iडॉक्टर ने कहा माताजी ऑपरेशन करवा लो फिर सब साफ़ साफ़ देख सकोगी ज्यादा देर करोगी तो हम कुछ नहीं कर पाएंगे I बेटा बड़ा सोच में पढ़ गया की ऑपरेशन के पैसे मैं कहाँ से लाऊंगा मेरे पास तो सिर्फ जाने के पैसे है I बहुत सोच कर बोला ठीक है माँ कल डॉक्टर के पास चलते हैं I
अगले दिन सुबह माँ को ले के डॉक्टर
के पास गया डॉक्टर के कम्पाउण्डर ने कहा डॉक्टर कल मिलेंगे वो किसी मीटिंग में शहर
से बाहर गए हुए है I फिर दुसरे
दिन सुबह डॉक्टर के पास माँ को ले के गया I डॉक्टर ने देखते ही बोला माताजी आप तो
पहले भी आई थी आपको तो ऑपरेशन के लिए बोला था I माँ बोली हां आपने बोला था डॉक्टर ने माँ की आँखों को देख कर
बोले परसों आपकी आँखों की ऑपरेशन की तारीख दे रहा हूँ,सुबह आठ बजे खाली पेट आना
हैं,दो घंटे में ऑपरेशन हो जायेगा और शाम को छुट्टी दे देंगे ठीक हैं अम्मा और कोई
चिंता की बात नहीं हैं I आप एकदम घबराना नहीं अच्छा से आपका ऑपरेशन हो जायेगा I फिर सब कुछ साफ़ साफ़ देखोगी,फिर माँ ने
डॉक्टर से पूछा कितना खर्चा आएगा I डॉक्टर बोला यही करीब बारह हजार रूपये खर्च आएगा,माँ बेटे के ओर देखा कुछ
बोली नहीं I
घर पहुँचने पर माँ बोली इतने
पैसे का इंतजाम कहाँ से होगा,बेटी बोली मैं इतने पैसे का इंतजाम नहीं
कर सकूँगा,बेटा चुप था,कुछ बोला नहीं माँ सोच रही है मेरे आंख के ऑपरेशन के लिए
पैसे का इंतजाम कैसे और कहाँ से होगा I बेटा सोच रहा था पैसे का इंतजाम कहाँ से करूँगा ये सोचते
सोचते उसे कब नींद आ गया कुछ पता नहीं I सुबह हुई बेटी काम पर निकल गयी पोता पोती कॉलेज चले गए,माँ बेटा घर में अकेले
थे बेटा दुसरे कमरे में सोच रहा था माँ के आंख का ऑपरेशन के पैसे का इंतजाम कहाँ
से करूँ I
तभी बाहर से किसी ने कहा चाची नमस्ते,माँ बोली कौन है “मैं शर्माजी चाची “ (शर्माजी सहारा एजेंट) हाँ आइये अंदर शर्माजी,चाची कैसी हो आप की तबियत कैसा है ”सब ठीक है” सुना हैं बेटा आया हैं कहाँ है I माँ ने आवाज़ लगाया बेटा शर्माजी आये है,नमस्ते शर्माजी कैसे हो,ठीक है हम,आप कैसे हो हम भी ठीक हैं I शर्माजी आप से बहुत जरुरी काम हैं सुना हैं आप आये हो इसलिए भागा भागा आया हूँ बताये क्या काम है I आपने जो बहुत पहले एक सहारा में खाता खुलवाये थे,और बीच में ही छोड़ कर चले गए I उसमे कुछ पैसा जमा किये थे वो निकलने का अंतिम तारीख है Iआप जल्दी से चलो मेरे साथ ब्रांच ऑफिस से फ़ोन आया था की जिस किसी का भी थोड़ा भी पैसा जमा है वो आज पैसे निकल ले वरना फिर निकल नहीं पायेगा,ठीक है शर्मा जी चलता हूँ I माँ मैं आ रहा हूँ थोड़ी देर में कुछ काम है शर्माजी को.. ठीक हैं बेटा..
दोनों ब्रांच पहुंचे,शर्मा जी बोले आप यहीं बैठो मैं अभी मैनेजर से मिल के आता हूँ कुछ देर बाद शर्मा जी आये,एक फॉर्म ले के और बोले इसे जल्दी से भर दो अभी ब्रांच मैनेजर बैठा है,काम हो जायेगा,उसने फॉर्म को भरने लगा शर्मा जी बोले देखो तुम्हारा डूबा हुआ पैसा मिल जायेगा I कितना पैसा होगा,शर्मा जी बोले यही करीब “बारह हजार चार सौ पचासी रूपये” ये सुन के वह बहुत चकित हुआ और मन ही मन बोलने लगा की कितना बड़ा काम हो गया I वो ख़ुशी से पागल हो गया I तभी शर्माजी बोले क्या हुआ कुछ सोच रहे हो क्या बताओ I नहीं शर्मा जी कुछ और ही सोच रहा हूँ I शर्मा जी बोले मूलधन और कुछ ब्याज मिल रहा हैं क्योंकी तुमने बीच में पॉलिसी बंद कर दी थी I ठीक है शर्मा जी आप जो ठीक समझे,फॉर्म ले के शर्माजी ऑफिस गए I थोड़ी दे बाद शर्मा जी हाथो में पैसे ले के आ रहे थे और वो सब देख रहा था,मन ही मन यही कह रहा था की अब माँ की आँखों का ऑपरेशन हो जायेगा I शर्मा जी बोले ये लो भईया अपनी पैसे पकड़ो अब कभी ये मत कहना की शर्मा जी मेरे पैसे खा गए I नहीं शर्मा जी हम ऐसा कभी नहीं बोलेंगे और आपने जो आज काम किया ना ये हमेशा याद रखेंगे I शर्मा जी बोले अरे मैंने तो मजाक किया I आप ने जो काम किया ना उससे माँ की आँख के ऑपरेशन हो जायेगा I हम लोग बहुत चिंतित थे की पैसे कहाँ से लायेंगे,मगर आप भगवन की तरह प्रकट हुए और मिनटों में हमारा तकलीफ दूर कर दिए इसके लिए धन्यवाद.. चलो तुम अपने घर जाओ चाची अकेली है और चाची की आखं का ऑपरेशन करवा के जाना I ये सब भगवन की कृपा है I मैं अपने ऑफिस जाता हूँ बहुत काम है ये बोल के शर्मा जी चले गये I
घर पहुँच कर..बेटा बोला माँ आपकी आँखों का ऑपरेशन हो जायेगा..
माँ बोली पैसे का इंतजाम हो गया.. हाँ माँ ..
अब आप चिंता छोड़ो और कल ऑपरेशन के लिए तैयार हो जाओ..
माँ बहुत खुश हो गयी और हाथ जोड़
कर भगवान का शुक्रिया अदा करने लगी..
कहते हैं..
”जिसका कोई नहीं होता उसका खुदा (भगवान) होता है”
ऑपरेशन हो गया,माँ बहुत अच्छी तरह से देखने लगी और बहुत ही खुश थी मगर एक बात उन्हें बार बार जेहन में आ रही थी,की काश मेरे दोनों बेटे अगर मुझे अपने पास रख लेते तो आखरी वक़्त पोता पोती के साथ समय अच्छा बीत जाता I मगर दोनों बेटे ने कभी उन्हें अपने पास नहीं बुलाया I माँ घर में अकेले रहने लगी बेटी काम पर चली जाती,बच्चे कॉलेज चले जाते थे I ऐसे ही समय बीत रहा था,बेचारी अपने दुःख किसे बोलती I छोटा बेटा कुछ दिनों बाद शहर चला गया,माँ और भी अकेले हो गयी I छोटा बेटा माँ के लिया हर महीने कुछ पैसें भेज दिया करता था,माँ को बहुत मन था की वह अपने छोटे बेटे के बच्चे के साथ अपनी आखरी समय रहे और उसके बच्चे को प्यार दुलार करे I मगर उनके मन की बात मन में ही रह गयी,बेटी उनकी बहुत सेवा करती थी,उनके बच्चे अपनी नानी को बहुत प्यार करते थे I मगर वो ख़ुशी नहीं मिली जो वह चाहती थी I माँ अकेले में बहुत रोती बिलखती कष्ट सहती और बड़बड़ाती रहती I इसी तरह समय बिताता गया I
एक दिन अचानक से छोटे बेटे के पास उससे बड़े बाले भाई का फ़ोन आया कि माँ गुजर गयी I यह सुन कर छोटा बेटा बहुत फुट फुट कर रोया I फिर क्या था सब को छोड़ कर माँ चली गयी I माँ की आस आस ही बन कर रह गयी I बेटें सभी सुखी सुखी रहने लगे किसी को कोई चिंता नहीं कोई जिम्मेदारी नहीं था I
आज के तारीख में बड़ी बहन का आज भी वही हालत हैं जो पहले था,पैसे के लिए मोहताज़ है कोई सहयता करने वाला नहीं हैं,पति गुजर गया,बेटा बेटी छोटे मोटे काम कर के घर चला रहे है I मगर जिसके लिए उसने अपनी सारी जिंदगी काम में गुजर दी और ख़ुशीयो का बलिदान कर दी भाईयो को पढ़ने लिखने और उनके सुख की चिंता करते करते कब वह बूढ़ी हो गयी उन्हें भी पता नहीं चला I
आज बड़ी बहन से कोई बात तक नहीं करना चाहता,क्योंकी वह बेचारी थोड़ा पैसे कभी कभी मांगती हैं अपने घर चलाने के लिए और इसलिए उनका फ़ोन उठाते नहीं है,अगर गलती से फ़ोन उठा लिये तो बोलते ऑफिस में काम बहुत है,बाद में बात करता हूँ और फिर कभी फ़ोन पर बात नहीं करते I
"आज वह जिन्दा है सिर्फ भगवान के सहारे" एक एक दाने के लिए मोहताज़ खाने को लाले पड़े हुए है,पर कोई सहायता करने वाला नहीं हैं,अपने मन को मार कर जी रही हैं किसी तरह..और
मन ही मन यही सोचती मेरी क्या गलती है भगवान..
जिसका कोई नहीं होता उसका साथ भगवान देता है
"माँ तुझे सलाम”
Blog: Badal Goswami
..osr..

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