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छोटी बेटी

पहला अध्याय..      आ ज से आठ साल पहले की बात हैं,एक परिवार में कुल ६ लोग थे माँ  पिताजी और उनके चार संतान जिसमे चारों लड़कियाँ थी एक भी बेटा नहीं था I लेकिन उनके पिताजी को बहुत ही लालसा था एक लड़के की मगर भगवान् की यही कृपा थी की उनको एक भी बेटा नहीं दिया,परन्तु पिताजी कभी भी इन चारों को लड़की नहीं समझते थे,वे हमेशा यही कहते की ये चारों मेरे बेटे हैं,छोटी बेटी माँ पाप को बहुत चाहती थी  और हमेशा उनके बारे में सोचते रहती थी,माँ पाप बहुत ही लार प्यार से बच्चों की परवरिश कर रहे थे और घर में कमाने वाला सिर्फ उनके पिताजी ही थे सारे परिवार की देखभाल और सभी लड़कियों की खर्चा पानी पढ़ाई लिखाई और परिवार की राशन खाने की सारी व्यवस्था पिताजी ही कर रहे थे क्योंकी उनके घर मैं और कोई था नहीं इसलिए सारा परिवार का दायित्व उनपर था पिताजी एक प्लांट में काम करते थे बहुत ज्यादा तनख्वा नही था उसी छोटी सी नौकरी से उन्होंने सारे परिवार को बहुत ही जत्न से पाल पोश रहे थे Iइसमे सबसे बड़ी बेटी हमेशा माँ पाप की चिंता बहुत करती थी हा लेकिन एक और बेटी थी जो हमेशा यही सोचते रहती की कब मैं बड़ी ह...

बेबस बचपन

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                                                                                                   हमारा भारत देश बहुत विशाल हैं,हमारे देश की जनसंख्या आज के तारीख में विश्व में दुसरे स्थान पर हैं और चीन पहले स्थान में हैं I जिस देश की जनसंख्या ज्यादा होगी वहाँ भूखमरी भी ज्यादा होगी I जिससे बेरोजगारी भी बढ़ेगी लोग अपने पेट भरने के लिये कुछ भी काम करेंगे I देश की आबादी के हिसाब से सभी चीजों की मांग भी बढ़ेगी,मगर आपको हमको सभी को आत्म निर्भर बनना पड़ेगा I    देश बचेगा नहीं तो पहले की तरह गुलाम बनने में समय नहीं लगेगा,क्योंकी भारत पर सभी देशों की निगाह है I  हमारे देश में गरीबों की संख्या सबसे ज्यादा हैं किसी ज़माने में भारत की आर्थिक स्थिति चीन से बहुत अच्छी थी ४० साल पहले चीन भारत से काफी गरीब देश था मगर अब चीन को मैकेंजी की रिपोर्ट...

अस्पताल

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                  डॉक्टरनी जी सुई दे दीजिये मेरे बीबी को..       यह  कहानी  करीब ४० साल पुरानी एक सरकारी अस्पताल की हैं,यह बिहार के गंगा नदी के पास स्थित हैं यह अस्पताल एक चिकित्सा महाविधालय भी हैं यह बहुत बड़े क्षेत्रफल में विकसित हैं और यह भारत के चिकित्सा विद्यालयों में एक हैं इसकी चर्चा देश के हर कोने में हैं ये काफी चर्चित अस्पताल हैं इस अस्पताल में सबसे ज्यादा मरीज देखे जाते हैं इसमे हर इलाज के अलग अलग विभाग हैं I इस अस्पताल में करीब दो हजार से लेकर तकरीबन तीन हजार मरीजों के बिस्तरों वाला अस्पताल हैं I      लोग इस अस्पताल के बारे में कुछ अनसुनी कहानीयां बताते हूँ सुन के हैरान हो जाएंगे I रमेश की बहन नर्सिंग की कोर्स कर रही थी काफी पढ़ी लिखी लड़की थी मेट्रिक में अच्छा नंबर से पास की थी कॉलेज में भी अच्छी नंबर लायी थी उसके घर वाले ने बहुत कहा की कोई और कोर्स कर लो मगर वो बोली नहीं मुझे नर्सिंग की ही पढ़ाई करनी हैं बहुत हट्टी थी एक बार जो सोच लेती वही करके मानती,घर वाले भी क्या करते चलो ठी...

अपडेट

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                                “ये ब्लॉग मेरे प्रिये पाठको के लिए हैं जो मेरे ब्लॉग को रोज पढ़ते हैं”        हमारा देश कृषि प्रधान देश हैं यहाँ हिन्दू,मुस्लिम,सिख,इसाई सभी जाति के लोग रहते हैं और सभी की भाषा भी अलग अलग तरह की हैं । आज से कुछ ६० साल पहले भारत में गाँव हो या शहर कितना अच्छा लगता था चारो तरफ हरियाली पेड़ पौधे चिड़ियों की चक-चकाहट और वातावरण कितना अच्छा था मिटटी की खुशबू आती थी उस समय लोग एक दुसरे से मिलते थे तो मुस्कुरा कर जैसे वह एक ही परिवार के हो जब रास्ते से निकलते थे लोगों को कोई फ़िक्र नहीं थी की पैसा ज्यादा कमाना हैं जो जिस काम में लगे हैं उसे उसी काम में मन लगता था और बहुत खुश भी रहते थे उन्हें बस आज कितना   कमाये ये जानते थे कोई भी त्यौहार हो या कोई उत्सव बड़े हर्षो उल्लास से मानते थे सभी लो गों में भाई चारा थी कौन हिन्दू है कौन मुस्लिम , सिख,इसाई वह ये नहीं देखते थे बस पर्व और त्यौहार का आनंद उठाते थे लोगों में ये झिझक नहीं थी की फलाने के पास इनता पैसा कहाँ से आ...

रोटी

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                " रोटी की रोना भी अजीब हैं जिसको सबसे ज्यादा जरूरत हैं उसे ही नहीं मिलती "       हमारा देश कृषि प्रधान देश हैं हमारे  यहाँ सभी जाति के लोग रहते हैं सभी की भाषा भी अलग अलग तरह की हैं सभी के पहनावा भी अलग अलग हैं कितना सुंदर लगता हैं जब सभी को अलग अलग पोशाक में देखते हैं I लेकिन कृषि प्रधान देश होने के बावजूद भी लाखों लोगों को खाने को पर्याप्त अनाज नहीं मिल पाता हैं और उसकी वजह से लाखों लोग भूखे रह जाते हैं ये सारे अनाज जमाखोर या तो जमा कर के रखते है और अनाज की मूल्य जब बाजार में बढ़ जाती हैं तब ये जमाखोर अनाज को बाजार में बेचते हैं इसकी बजह से अधिकतर अनाज गोदामों में या तो सड़ जाते हैं या ऊँची दामो में बाजार से खरीदना पढ़ता हैं और ऊँची दाम में कुछ लोग खरीद नहीं पाते,वो हैं गरीब ये हैं हमारे देश के अनाज की हाल. इसी अनाज से रोटी बनती हैं,रोटी की बात सुनते ही . मन में ख्याल आता हैं,वह क्या हैं ?      रोटी का नाम सुनते ही कई तरह के रोटी की  फोटो हमारे दिमाग में आता हैं अगर कोई मांगता हैं तो होटल से...

उपहार

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                                  " आपका प्यार सच्चा और  पवित्र हैं  "          भारतवर्ष एक बहुत बड़ा देश हैं यहाँ भिन्न भिन्न तरह के लोग रहते है और अपनी जीवन जीने के लिए बहुत कुछ कर रहे है आइये आपको एक सच्ची कहानी सुनाता हूँ शायद आपको पसंद आये..  सुबह ६ बजे अलार्म बजें चाय,नास्ता पानी कर के घर से "वाहे गुरूजी" के नाम लेके निकल गये, स्कूटर पर किक पे किक मारे जा रहे हैं.उस समय के सबसे जाने माने स्कूटर vespa जो शायद नाम आपको मालूम होगा.रोज मरे की सफ़र हो गयी शुरू काम कुछ खास नहीं हैं.बस खिलोनों की बिज़नस हैं,कभी हमलोग खिलोनें बन जाते कभी लोगों के हाथ में हम खिलोनें पकड़ा देते.चले जाते भीड़ भाड़ में और कभी रत्नाल के गलियों में कहीं शोर तो कहीं सन्नाटा ऐसा ही बिज़नस का हाल.कभी मुनाफा तो कभी घाटा सफ़र जारी हैं.जहाँ एक ही नारा “रुकना नहीं थमना नहीं आगे बढ़ते जाना” फिर एक दिन किसी के बातों बातों में एक मन्नत मिल गया.जहाँ खुद की कंपनी उस का नाम और उसमें मेहनत.. मेहन...