सच्चा प्यार..

बादल गोस्वामी osr
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पढ़ने का समय : 2 मिनट  


"दर्द किसी किरदार में नहीं होती, बल्कि जिंदगी की सच्चाई में होती हैं "

"चेहरे पर झुरियां आँखों में चिंता और शरीर झुका हुआ, कब समय ने उम्र को इस मुकाम पर ले आया पता ही नहीं चला"

70 साल की आशा देवी को सलाम 

अक्सर हम इस तरह पटरी पर बैठे बहुत से लोगों को सामान बेचते देखे हैं I हर एक के पीछे कुछ ना कुछ जिंदगी की कहानी होती हैं, मगर कोई सुनने वाला नहीं हैं I

       जब भी इस रोड से गुजरता हूँ, अम्मा को पटरी पर सामान लेकर बैठे देखता हूँ I बूढ़ी अम्मा की यह दुकान नहीं हैं ! पटरी पर सामन लगा कर चाय, बिस्कुट, मिक्सचर बहुत सारे खाने के चीजों के साथ बैठी रहती हैं I लोग आते - जाते हैं कोई बिस्कुट तो कोई मिक्सचर लेते हैं मेन रोड पर होने के कारण अम्मा का काफी खाने के सामान बिक जाते हैं, लोग चाय पीते है और अम्मा की तारीफ करते हैं I अम्मा जब कप प्लेट साफ़ करती हैं तो देख कर बहुत दुख होता हैं, बेचारी झुक कर धीरे - धीरे चलती हैं और फिर कप प्लेट को साफ़ करती I जिंदगी क्या नहीं करवाती एक 70 साल की बूढ़ी अम्मा को आराम और तीर्थयात्रा करने के समय ये सब करना पड़ रहा हैं "वाह रे जिंदगी तेरे भी कितने रूप"

भावुक करने वाली कहानी जो आँखों को नम कर देती हैं..

मैं अम्मा को बहुत दिनों से देख रहा था, फिर एक दिन मुझसे रहा नहीं गया बिना बात किये I अम्मा से बात करने चला गया I मुझसे पूछी तुम कौन हो भाई क्या काम हैं ? आप से कुछ बात करनी हैं बोली क्या बात करनी हैं ? मैंने बोला आपसे थोड़ी बात करनी हैं I उनसे बहुत सारी बातें की घर परिवार अंकल, पोता - पोती उनके बेटे उनकी बहु, मतलब कैसे घर चल रहा हैं I उनके हिम्मत और जज्बात परिवार के प्रति दो वक़्त की रोटी की है कितना मेहनत करती हैं, सुनकर में हैरान हो गया I मेरा दिमाग सोचने पर मजबूर हो गया की 70 साल की बुजुर्ग महिला कैसे सब कर रही हैं I

हम अक्सर सड़क किनारे बैठे बुजुर्गों को सामान बेचते देखकर नज़रअंदाज कर देते हैं और आगे बढ़ जाते हैं I हरेक का अपना एक कहानी होता हैं जो शायद वह कभी किसी को बोल नहीं पाते हैं I

भावुक तस्वीर देख आँखों में आंसू आ जाती हैं 

जज्बें और हौसला को सलाम..

70 साल की उम्र कमर झुकी हुई चलने में दिक्कत दुकान लगाना फिर बंद करना अम्मा का रोज का काम हैं I लेकिन यह कभी किसी को पता चलने नहीं देती की वह कितना कमजोर और अंदर से टूट चुकी हैं I फिर भी घर से सुबह 5 बजे निकलती हैं और किसी तरह 7 बजे तक पहुँच पाती हैं I रात को 9 बजे सामान को चारों तरफ से प्लास्टिक से कवर कर रस्सियों से बांध कर घर निकलती हैं, ये अम्मा का रोज का काम हैं I ये सब सुन कर बड़ा अजीब सा लगता हैं की अम्मा ने कौन सी गलती की हैं ?

"अम्मा को ऐसी क्या मजबूरी हैं जो आज भी काम करने के लिए मजबूर हैं "

अम्मा (आशा देवी) जिला दिल्ली खानपुर में शादी कर के आई बहुत खुश थी I घर परिवार में बहुत खुशियाँ थी, किसी चीज की कोई कमी नहीं थी रहने के लिए अपना घर था I परिवार बहुत अच्छा चल रहा था चारों तरफ खुशियाँ ही खुशियाँ थी I शादी के बाद एक बेटा हुआ, बेटा भी बहुत होनहार था, पढ़ने लिखने में अच्छा था I

        लेकिन अचानक एक दिन आशा देवी के पति हार्ट अटैक से गुजर गये I आशा देवी को लगा सब ख़त्म हो गया, पहाड़ जैसी जिंदगी दिख रही थी, क्या करे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था I आशा देवी सोचने लगी एक छोटा बेटा महज 14 से 15 साल का हैं, उसको पढ़ाये कैसे पैसे कहाँ से आएगा, रोजी रोटी के लिए चिंता होने लगी, यह सोच आशा देवी बहुत परेशान हो गयी I कुछ समझ नहीं आ रहा था I 

फिर उन्हें याद आया उनके पति पटरी पर एक (खोखा) चलाते थे I आशा देवी ने ठान लिया जब मेरे पति ने इस दुकान (खोखा) से सारी  खुशियाँ एकत्रित किये I घर बनाए शादी की सभी चीजों से पूर्ण किये I फिर यह दुकान (खोखा) को मैं चलाऊँगी I इस दुकान से अपने बच्चों को पढ़ाऊँगी और एक अच्छा इन्सान बनाऊँगी I 
   
       "आशा देवी के पति ने यह (खोखा) दुकान पटरी पर करीब 10 से 15 साल पहले और इसे करीब 20 साल तक चलाया I इसी दुकान की कमाई से घर चल रहा था"

अम्मा की चाय 

        आशा देवी ने ठान लिया और (खोखा) दुकान पर बैठना शुरू कर दी I सुबह 5 बजे घर से निकलती हैं और करीब 7 बजे (खोखा) दुकान खोल देती हैं I फिर रात को 9 बजे दुकान को बंद कर के घर के लिए निकल जाती हैं I घर जा कर खाना बनाना बच्चों को देखना, पढ़ाना I अगले दिन सुबह 4 बजे घर का पानी भरना, खाना बनाना और बेटे को अपने साथ दुकान पर ले आती I इस तरह आशा देवी की जिंदगी चल रही थी, फिर कुछ दिनों बाद बेटे की शादी करायी, सिर्फ इसी दुकान की आमदनी से सब हुआ I आज आशा देवी दादी हो गयी बेटे के दो बच्चें हैं I

आशा देवी का प्यार..  

आशा देवी आज इसी दुकान में बैठती हैं, अपने पति की याद में छोटी - छोटी चीजें बेचती हैं I लोग अम्मा अम्मा कह कर सामान खरीदते हैं I इस पटरी से रोज लाखों लोग गुजरते हैं, मगर कोई ये नहीं पूछता की अम्मा आखिर इस उम्र में एक छोटा सा (खोखा) दुकान क्यों चला रही हैं क्या मजबूरी हैं I लोग आते हैं सामान लेते हैं, पैसे देते हैं और चले जाते  हैं, किसी को आशा देवी से हमदर्दी नहीं हैं I

किसी को हमदर्दी नहीं हैं "आशा देवी" से 

आज 40 साल हो गया हैं इस दुकान (खोखा) को 20 साल आशा देवी के पति ने चलाया और 20 से 25 साल से आशा देवी दुकान चला रही हैं I 

मैंने आशा देवी से पूछा कब तक दुकान चलाते रहोगी, थोड़ा आराम कर लो वो बोली ये छोटा सा दुकान (खोखा) मेरी जिंदगी हैं I जब तक मैं जिन्दा हूँ, तब तक ये खोखा चलाऊँगी I जिस दिन मर जाउंगी, कौन दुकान पर बैठेगा मुझे नहीं मालूम I "भगवान सब को स्वस्थ रखे"

आशा देवी ने एक दिल छू लेने वाली बात बोली..

आशा देवी ने कहा इस दूकान में अंतिम सांस तक बैठूंगी, जब तक मेरी मौत ना आ जाये I मुझे महसूस होता हैं, की मेरे पति मेरे बगल में बैठे हैं I उनकी यादें हमेशा साथ हैं, जब वो ले जाना चाहेंगे तब चली जाउंगी I 

पति के प्रति आशा देवी की प्रेम और प्यार देख मेरे आँखों में आंसू आ गया I "लोग यूँ ही नहीं जिंदगी बिता देते प्यार में"💖! 

आज देख भी लिया.."किसी ने सही कहा सच्चा प्यार अंधा होता हैं " 🫡 

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