"बस एक Reel और"...
बादल गोस्वामी osr
कुछ अलग कहानियां.com
पढ़ने का समय : 4 मिनट
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आज देश टेक्नोलोजी के मामले में काफी आगे बढ़ चूका हैं और तरक्की के रास्ते पर रफ़्तार से दौड़ रहा हैं I मगर इस दौड़ में हम बहुत कुछ पीछे छोड़ते जा रह हैं, अब हमारे पास समय ही नहीं बचा कुछ और करने के लिए क्योंकि आज टेक्नोलोजी ने हमारे सेल फ़ोन को इतना hi-tech और facility से परिपूर्ण कर दिया की कुछ और करने का समय ही नहीं निकल पा रहे हैं I
"राहुल एक बहुत ही होनहार और पढ़ने में बहुत ही अब्बल लड़का था I वो सुबह - सुबह कॉलेज के लिए निकल ही रहा था की तभी एक फ़ोन आया और बात करने लगा बात ख़त्म होने पर वो सोचा चलो 10 मिनट Reels देख लूँ I उसे लगा दो - चार Reel देखकर रख दूंगा, मगर पहली Reel ख़त्म हुई तो उसने दूसरी चला दी, दूसरी के बाद तीसरी और फिर पता ही नहीं चला की 10 मिनट कब 6 घंटे में बदल गए I जब उसने मोबाइल स्क्रीन पर समय देखा,तो शाम के चार बज चुके थे I"
"राहुल अकेला नही था I आज हमारे आसपास ऐसे बहुत से लोग हैं, जिनकी खाली समय धीरे - धीरे Reel की स्क्रॉलिंग में बदलता जा रहा हैं I"
भारत में 31 जुलाई 1995 को बेहद ही महत्पूर्ण दिन माना जाता हैं I इसी दिन देश में पहली मोबाइल फ़ोन कॉल की गई और यह कॉल पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने तत्कालीन केंद्रीय दूरसंचार मंत्री सुख राम से मोबाइल फोने पर बात की थी I यह कॉल Nokia Mobile हैंडसेट से Mobile net नेटवर्क पर हुई थी I उस समय मोबाइल फ़ोन आम लोगों की जरूरत की चीज नहीं थी I बल्कि एक खास महंगी सुविधा हुआ करता था I
यह कॉल कोलकता के "Writers Building" से नई दिल्ली के संचार भवन के बीच हुई थी I
3 अप्रैल 1973 का दिन इस दिन Motorola के engineer "Martin Cooper" ने न्यूयार्क की सड़क पर दुनिया की पहली सार्वजानिक Handhold mobile phone कॉल की, आज के हलके Smart phone की तुलना में यह काफी भारी था, इसका वजन लगभग 1.1 किलोग्राम था I आज देश technology के मामले कितना आगे बढ़ चूका हैं I
आज 53 साल हो चुके हैं मोबाइल ने हमारी जिंदगी को बहुत ही आसन बनाया I लेकिन इस छोटे से डिब्बा ने हमारी जिंदगी को मनोरंजन से भर दिया और धीरे - धीरे हमारा खाली समय ही नहीं हमारा ध्यान भी अपने कब्जे में लेना शुरू कर दिया I जिस मोबाइल को हमने सुविधा और समय बचाने के लिए बनाए,वही मोबाइल कब हमारे समय का सबसे बड़ा उपभोक्ता बन गया पता ही नहीं चला I आज लोग बिना मोबाइल के एक कदम भी आगे नहीं चल पा रहे हैं I आज मोबाइल फ़ोन हमारे लिए क्या - क्या कर सकता हैं, शायद कुछ लोगों को अभी भी मोबाइल की facility के बारे में पता नही हैं I
दुनिया की सारी जानकारी कुछ ही सेकेण्ड में Browsing के द्वारा मिल जाती हैं I
- High quality Camera - दूर बैठे व्यक्ति से आवाज़ और Video के जरिये बात
- High quality - फोटो और विडियो बनाना
- you tube - Online education, online classes, e-book और education apps से पढाई
- Social media - WhatsApp, Facebook,Instagram आदि से लोगों को जोड़ना
- Entertainment - Youtube, OTT, Games और Short Videos and Reels
- Online payment - UPI और Banking apps से पैसे मँगाना और Bill भरना
- GPS और Maps - रास्ता ढूंढना और location देखना
- Online Shopping - घर बैठे सामान खरीदना
- Health - related सुविधाएँ Appointment, health apps और कुछ basic health tracking
- काम और कमाई - Email, video, meetings, freelancing, blogging और content creation.
आज का Smart Phone सिर्फ फ़ोन पर बात करने या हाथ में ले के घुमाने का साधन या दिखने का सामान नहीं हैं I इसमें कई तरह की सुविधाएँ एक साथ मिलती हैं I जितने भी मोबाइल कम्पनीयां हैं आज सब एक - दुसरे से Competation में लगा हैं I जब से मोबाइल फ़ोन आया सुविधाओं के साथ बदलते रूप भी आप लोगों में देखा हैं I
लगातार रील्स देखने से लोग अपनी भावनाओ को सही तरीके से समझ और संभाल नहीं पाते हैं I जब आप Instagram और दूसरी Social साइट्स पर लगातार रील्स देखते हैं तो एक रील्स में कोई और इमोशन होता हैं, दूसरी रील्स में कोई और इमोशन होता हैं, तीसरी में कोई और इमोशन होता हैं I
इस दौरान हमारी भावनाएं बहुत तेजी से बदल रही होती हैं और वैसे में हमारा दिलो दिमाग उसे सही तरीके से प्रोसेस नहीं कर पता I हमें यह पता ही नहीं चलता कि हमें अपनी भावनाओं को कैसे प्रोसेस करना हैं,आप ही इतनी सारी चीजें जो हम स्कीन पर खोल रहे हैं, वे सभी tabs हमारे दिमाग में भी खुल रहे हैं I इस वजह से ब्रेन फ़ॉग जैसे स्थिती होती हैं और दरअसर ऐसे में ये समझ ही नहीं आती की हम कौन सा फैसला ले I
- Mental illness - मानसिक बीमारी
- Depression - डिप्रेशन
- Stress - तनाव
- Anxiety - एंग्जायटी
ज्यादा रील्स और विडियो जब हम लगातार देखते रहते हैं तो बहुत तरह की मानसिक समस्याएँ उत्पन होने लगाती हैं I आप चिड़-चिड़ा बहुत ज्यादा हो जाते हैं, किसी की बात को अनसुना कर देते हैं, कोई चिल्ला के आपको कुछ बोल रहा हैं और आप रील्स देखने में व्यस्त हो I फिर एक दम से चिल्ला के कहते हो क्या हैं..
क्योंकि आप काफी देर से अपने कान में ear beds या उस रील्स में खो जाते हो I आप कुछ भी देखते हैं तो उसे सिमित तरीके से देखे, अगर आप किसी चीज को आदत बना लेंगे तो ये आपके लिए नुकसान दायक हो सकता हैं I
आज सिर्फ बड़े ही नहीं,बच्चें भी Reels की दुनिया में तेजी से खिंचते जा रहे हैं I छोटी - सी उम्र में घंटों स्क्रीन पर उंगली चलाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बनता जा रहा हैं I
खेलने, पढ़ने और परिवार के साथ समय बिताने की जगह कई बच्चे मोबाइल में व्यस्त दिखाई देते हैं
सवाल यह नहीं की मोबाइल कितना उपयोगी हैं,सवाल यह हैं की बच्चे उसका इस्तेमाल कर रहे हैं या मोबाइल उनका समय इस्तेमाल कर रहे हैं I
ये सारे सवाल हमारे पाठकों से हैं, जो मेरे ब्लॉग को रोजाना पढ़ते है I
हम Reels देख रहे हैं या Reels हमें ?
क्या खाली समय Reels का समय ?
स्क्रॉल करते - करते जिंदगी कहाँ जा रही हैं ?
मोबाइल हाथ में, समय हाथ से बाहर क्यों ?
10 मिनट की रील्स और 2 घंटे का समय क्या हैं ये... अभी से अपने बच्चों और बच्चियों को सावधान कर ले क्योंकि अब पहले वाली Reels या Video नहीं हैं, अब AI का जमाना आ गया हैं, थोड़ा Reel से दूर रहे I
"उसकी जिंदगी में संघर्ष भी है, मेहनत भी और एक अलग अंदाज भी"
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Blog : Baadal Goswami
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