खरना ( "छठ" महापर्व )

बादल गोस्वामी osr

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पढ़ने का समय : 2 मिनट


            खरना..

"छट पूजा" में खरना का प्रसाद बहुत ही महत्वपूर्ण हैं  

         पूजा में ट्रेन में भीड़, सड़को में भीड़, बाज़ार में भीड़ और नदी, झील के किनारे ऐसा रोशनी और छट की गानों से आपका मन मोह लेता हैं, खूब सुंदर सजा देख आप भी चका - चोंध हो जायेंगे I 
        हमारा देश एक विशाल देश हैं, यहाँ हर जाति और धर्म के लोग रहते हैं सभी का अपना अपना पर्व हैं जो बहुत ही हर्षो उल्लास से मानते हैं I मगर यूपी बिहार में एक पर्व मनाया जाता हैं जो काफी प्रसिद्ध हैं I 

        वो हैं "छट पूजा" इस पूजा में ये दो राज्यों की रोनक ही कुछ और होती हैं जो देखने में इतना मनमोहक हैं की पूछिए मत,इसवट और आतिश बाजी होती हैं लोग नये नये कपड़े पहन कर पूजा में शामिल होते हैं I 

          खरना प्रसाद एक ऐसी महाप्रसाद हैं जिसे एक व्रती चार दिन 36 घंटे की निर्जला उपवास रख के उसको एक शक्ति महाशक्ति सूर्य भगवान प्रदान करते हैं I नहाय खाये के बाद दुसरे दिन का खरना होता हैं । 

        फिर सूर्य अस्त की एक पूजन होते हैं जिसमे अर्घ्य दिया जाता हैं,दुसरे दिन उगते हुए सूर्य उदय के अर्घ्य देने के बाद वर्ती के पूरा व्रत समापन समाप्त होता हैं I 

        एक पूरा श्रद्धा एक महाशक्ति के आगोश में रह के वह व्रती सनातन धर्म के सबसे कठिन पर्व को मानते हैं I सिर्फ अपने लिए नहीं,परिवार के सुख के लिए शांति के लिए एक यूपी और बिहार में ही नहीं अब सारे देश में मनाने लगे हैं और व्रती जो व्रत करते हैं चार दिन की ये ये कठिन तपस्या के साथ पुरे श्रद्धा के साथ इस प्रसाद को हमलोग खाते हैं ग्रहण करते हैं पता नहीं कितने पुण्य के फल हमें मिल जाते हैं वो व्रती करते हैं प्रसाद बनाते हैं और इतने श्रद्धा से इतने भक्ति से और वो खरना प्रसाद जब हमें मिलते हैं हाथ में जब आते हैं उस छोटे से प्रसाद में इतनी ताकत होती हैं पुरे साल की ताकत हममें और सारी पॉजिटिव उर्जा सकारात्मक उर्जा हममें भर देते हैं I
 
ठंडे पानी में खड़ा हो कर सूर्य भगवान् का पूजा करना 

         व्रती के पैर छुने से और उस व्रती के हाथ सिर पर रखने से उस प्रसाद को लेते वक़्त.. 

         मतलब आ जायेंगे आपके आखों में आसूं उस व्रती को कोटि कोटि नमन, कोटि - कोटि प्रणाम, जिसने इतने श्रद्धा के साथ खरना प्रसाद को बनाते हैं पता नहीं क्या मिलाते हैं प्रसाद इतने श्रद्धा और उसके साथ और भी कुछ मिलाते होंगें या फिर छटी मैया की वो आशीर्वाद उस में घुलमिल जाते होंगे,तभी वो प्रसाद इतने स्वादिष्ट..की कोई और प्रसाद मिल जाये कही पर आप चले जाओ हर धर्म, हर जगह के अलग अलग प्रसाद के स्वाद होते हैं I 

        लेकिन खरना प्रसाद आप एक बार ग्रहण करोगे तो आपको जरुर लगेगा की ये प्रसाद नहीं ये एक महाफल जो ग्रहण करने के बाद आपको एक पॉजिटिव और सकारात्मक उर्जा आपमें पूरी तरह से आ जायेगा और मुझे ये लगता हैं की ये सनातन धर्म यूपी और बिहार एक ही राज्य हैं जो ये छटी मैया की इतनी धूम धाम के साथ आतिशबाजीयों के साथ बच्चें, बूढ़े,जवान करते हैं I  

        लेकिन जो व्रत रखते हैं और जो व्रत करते हैं उनमे अंदर ही एक आतिश सा जला के व्रत में बैठती हैं, वो चार दिन की निर्जला उपवास कठिन तपस्या कर के प्रसाद बना के पुरे मेहनत के साथ व्रत को कर के उस ठंडे पानी के नीचे सूप के साथ अर्घ्य देना और उसके साथ वो सूप को ले के प्रसाद को फिर बाटना सुहागन को सिंदूर लगाना ।

     मतलब ये यूपी और बिहार राज्य में ही ज्यादा पूजा की जाती हैं । ये सनातन धर्म के दो ही राज्य हैं जो कर पते हैं और मेरे भी यही विश्वास हैं ।

  इन्हीं दो राज्यों में सबसे ज्यादा आई एस, आई पी एस निकल के आते हैं I आई एस,आई पी एस बनने के लिए भी एक तपस्या करना होता हैं शायद ये तपस्या को करने के लिए उस घर की एक व्रती जरुर इस फल को देने में सहायता करते हैं I

         मेरा ये पूरा मानना हैं, की "खरना" प्रसाद वो शक्ति हैं वो महाशक्ति हैं, जो पुरे सकारात्मक उर्जा उस व्रती ने सारे परिवार के लिए एक राज्य के लिए व्रत जो रखते हैं चाहे वो पुरुष हो महिला हो सर्वश्रेष्ट ज्ञान से भरपूर जो भी हो अनपढ़ हो चाहे पढ़े लिखे हो,सब इस फल को पाने के लिए इस व्रत को करने के लिए पुरे चार दिन की मेहनत सफलता के साथ सफलता पूर्वक व्रत को प्रदान करते हैं और इस फल को भी प्रदान करते हैं I


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Blog : Baadal Goswami    

                                                                

     

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